Integrated Command Centres India: बॉर्डर पर बनेगा ‘स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम’, पाकिस्तान बॉर्डर से होगी शुरुआत - जानिए क्या है सरकार का ‘स्मार्ट बॉर्डर’ प्लान?
भारत की सीमा सुरक्षा अब टेक्नोलॉजी से लैस होने जा रही है। Integrated Command Centres India के जरिए ड्रोन, कैमरे, सेंसर, रडार और AI से मिलने वाली जानकारी को एक नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे बॉर्डर की रियल-टाइम निगरानी और खतरे पर तेज कार्रवाई संभव होगी।
भारत की जमीन से लगी सीमाओं की निगरानी अब सिर्फ जवानों की गश्त और फेंसिंग तक सीमित नहीं रहने वाली है। केंद्र सरकार Integrated Command Centres India के तहत बॉर्डर पर तैनात अलग-अलग सुरक्षा प्रणालियों को एक नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। इसका मकसद फील्ड से मिलने वाली जानकारी को कमांड सेंटर तक तेजी से पहुंचाना और किसी भी खतरे पर जल्द कार्रवाई करना है।
गृह मंत्रालय की इस नई व्यवस्था में कैमरे, सेंसर, ड्रोन, रडार, इमेज प्रोसेसिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों से मिलने वाली जानकारी को एक साथ लाने की योजना है। आगे ये सूचनाएं फॉरवर्ड इलाकों से लेकर दिल्ली तक जुड़े कमांड सेंटरों में पहुंचेंगी। सरकार इसे Smart Border की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।
बॉर्डर पर अब सिर्फ फेंसिंग नहीं, टेक्नोलॉजी भी बनेगी सुरक्षा की ढाल
भारत की करीब 15,106.7 किलोमीटर लंबी जमीन से जुड़ी सीमा सात देशों के साथ है। लेकिन हर सीमा पर एक जैसी सुरक्षा व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है। कहीं रेगिस्तान है, कहीं पहाड़, कहीं जंगल तो कहीं नदियों और बाढ़ वाले इलाके हैं।

सबसे बड़ी चुनौती चीन से लगी करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो कई जगहों पर अभी पूरी तरह सीमांकित नहीं है। ऐसे इलाकों में हर जगह फेंसिंग करना व्यावहारिक नहीं है। इसी तरह बांग्लादेश सीमा के कुछ हिस्से नदी और बाढ़ प्रभावित हैं, जहां स्थायी बाड़ लगाना मुश्किल है।
इसी वजह से सरकार अब ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती है जिसमें जहां फिजिकल फेंसिंग संभव नहीं है, वहां तकनीक के जरिए लगातार निगरानी की जा सके। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक, “हर सीमा एक जैसी नहीं होती”, इसलिए इलाके के हिसाब से तकनीकी समाधान तैयार किए जाएंगे।
Integrated Command Centres में कैसे जुड़ेगा पूरा बॉर्डर नेटवर्क?
इस व्यवस्था में सीमा पर मौजूद अलग-अलग निगरानी उपकरणों से मिलने वाला डेटा स्थानीय कमांड सेंटर तक पहुंचेगा। वहां से जरूरी जानकारी आगे फील्ड मुख्यालय और फिर दिल्ली स्थित शीर्ष स्तर के कमांड सेंटर तक भेजी जा सकेगी।
मसलन, किसी इलाके में कैमरा संदिग्ध गतिविधि पकड़ता है, सेंसर किसी हलचल का संकेत देता है या ड्रोन से कोई असामान्य गतिविधि दिखाई देती है, तो संबंधित जानकारी एक साझा सिस्टम में उपलब्ध हो सकती है। इससे सुरक्षा एजेंसियों को अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य एक ऐसा common operational picture तैयार करना है, जिसमें अलग-अलग तकनीकों से मिली जानकारी एक जगह दिखाई दे। इससे सीमा पर तैनात एजेंसियां स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकेंगी और जरूरत पड़ने पर तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेंगी।
AI, ड्रोन और सेंसर से होगी रियल टाइम निगरानी
सरकार की नई रणनीति सिर्फ तकनीकी उपकरणों तक सीमित नहीं है। इसके साथ सीमा सुरक्षा बलों, राज्य और जिला प्रशासन, केंद्रीय एजेंसियों तथा स्थानीय नागरिकों को जोड़ने वाली Quadrangular Security Grid भी विकसित की जा रही है।
9 जुलाई 2026 को दिल्ली में पहली Land Border Districts’ Superintendents of Police Conference-2026 आयोजित हुई। इसमें सीमा से जुड़े 119 जिलों के पुलिस अधीक्षक और संबंधित अधिकारी शामिल हुए। गृह मंत्री ने कहा कि बॉर्डर सुरक्षा को ज्यादा एकीकृत तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा और स्थानीय नागरिकों को भी इस व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा।
इसका मतलब यह है कि सीमा पर किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी सिर्फ एक सुरक्षा बल तक सीमित न रहकर जरूरत के अनुसार पुलिस, प्रशासन और दूसरी संबंधित एजेंसियों तक तेजी से पहुंच सके।
Pakistan Border से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
सरकार इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इसका पायलट प्रोजेक्ट पाकिस्तान सीमा से शुरू किया जाना है।
यह इलाका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां घुसपैठ, ड्रोन के जरिए तस्करी और सीमा पार से आने वाली अन्य गतिविधियों की चुनौती बनी रहती है। सरकार पहले से ही पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर Smart Border तकनीक को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बाकी सीमाओं पर मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था खत्म हो जाएगी। नई तकनीक फेंसिंग, बॉर्डर आउटपोस्ट और जवानों की तैनाती के साथ मिलकर काम करेगी।
हर सीमा के लिए अलग होगा सुरक्षा का मॉडल
भारत की भौगोलिक परिस्थितियां इतनी अलग-अलग हैं कि एक ही तकनीक हर जगह प्रभावी नहीं हो सकती। पाकिस्तान सीमा के रेगिस्तानी इलाकों, चीन सीमा के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों और बांग्लादेश सीमा के नदी वाले हिस्सों में निगरानी की जरूरत अलग है।
इसीलिए सरकार का जोर customised border security पर है। जहां फेंसिंग संभव है वहां आधुनिक फेंसिंग और उसके साथ सेंसर लगाए जा सकते हैं, जबकि कठिन और दुर्गम इलाकों में कैमरे, ड्रोन, सेंसर और दूसरे निगरानी साधनों पर ज्यादा निर्भरता हो सकती है।
सरकार पहले से Integrated Border Management System यानी IBMS जैसी तकनीकी व्यवस्था पर भी काम कर रही है। धुबरी में इसका पायलट प्रोजेक्ट पहले लागू किया जा चुका है और सरकार ने इसे आगे पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमाओं के संवेदनशील हिस्सों में विस्तार देने की बात कही थी।
सरकार को इससे सबसे बड़ा फायदा क्या मिलेगा?
इस पूरी व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा तेज सूचना और तेज प्रतिक्रिया के रूप में सामने आ सकता है। अभी अलग-अलग जगहों पर मौजूद सुरक्षा उपकरणों और एजेंसियों से आने वाली सूचनाओं को एक साथ जोड़ना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। Integrated Command Centres इस प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित बनाने की कोशिश है।
अगर किसी इलाके में घुसपैठ, तस्करी, ड्रोन गतिविधि या कोई दूसरी संदिग्ध गतिविधि सामने आती है, तो संबंधित जानकारी कम समय में उन एजेंसियों तक पहुंच सकती है जिन्हें कार्रवाई करनी है।
इसके अलावा लगातार निगरानी से जवानों को हर जगह लगातार शारीरिक गश्त करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे मानव संसाधन को उन इलाकों में लगाया जा सकेगा जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
Quadrangular Security Grid को भी किया जा रहा है मजबूत
Smart Border के साथ सरकार Quadrangular Security Grid को भी संस्थागत रूप दे रही है। इसमें सीमा सुरक्षा बल, राज्य और जिला प्रशासन, केंद्र सरकार की संबंधित एजेंसियां और सीमा क्षेत्र के स्थानीय लोग शामिल होंगे।
जुलाई में सामने आई जानकारी के मुताबिक इस सुरक्षा व्यवस्था में सात प्रमुख actionable points और 33 sub-points शामिल किए जाने हैं। राज्यों और सुरक्षा एजेंसियों से सुझाव लेने के बाद इसे आगे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इसका उद्देश्य सिर्फ सीमा पर किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि संभावित खतरे की जानकारी पहले हासिल करके उसे रोकने की दिशा में काम करना है।
FAQ:
Integrated Command Centres क्या होते हैं?
Integrated Command Centres ऐसे कमांड सेंटर होते हैं जहां अलग-अलग जगहों और तकनीकों से मिलने वाली निगरानी संबंधी जानकारी को एक साथ देखा और समझा जा सकता है। बॉर्डर सुरक्षा में इनका उद्देश्य फील्ड से मिलने वाली जानकारी को कमांड स्तर तक तेजी से पहुंचाना और प्रतिक्रिया का समय कम करना है।
Centre Border Security के लिए Integrated Command Centres क्यों बना रहा है?
क्योंकि भारत की सभी सीमाओं पर फेंसिंग या लगातार भौतिक गश्त संभव नहीं है। चीन सीमा के दुर्गम इलाकों और बांग्लादेश सीमा के नदी तथा बाढ़ प्रभावित हिस्सों में तकनीक आधारित निगरानी ज्यादा उपयोगी हो सकती है। सरकार Smart Border के जरिए ऐसे इलाकों की निगरानी मजबूत करना चाहती है।
Integrated Command Centres में कौन-सी Technology इस्तेमाल होगी?
प्रस्तावित व्यवस्था में कैमरे, सेंसर, ड्रोन, रडार, थर्मल कैमरे, इमेज प्रोसेसिंग सिस्टम और AI आधारित निगरानी तकनीकों को जोड़ा जा सकता है। इनसे मिलने वाली जानकारी को एक साझा ऑपरेशनल सिस्टम में लाने की योजना है।
क्या इन Centres में AI और Real-Time Surveillance का उपयोग होगा?
हां। Smart Border व्यवस्था में AI आधारित निगरानी और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग को महत्वपूर्ण भूमिका दी जा रही है। इसका उद्देश्य बड़ी मात्रा में निगरानी जानकारी को समझने और संदिग्ध गतिविधियों पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद करना है।
Integrated Command Centres भारत की Border Security कैसे मजबूत करेंगे?
इनसे फील्ड में मौजूद कैमरे, सेंसर, ड्रोन और दूसरे निगरानी उपकरणों की जानकारी संबंधित कमांड सेंटर तक तेजी से पहुंच सकेगी। इससे घुसपैठ, तस्करी, ड्रोन गतिविधि और अन्य सुरक्षा चुनौतियों पर प्रतिक्रिया का समय कम करने में मदद मिल सकती है।
किन Borders पर Integrated Command Centres स्थापित किए जाएंगे?
इस व्यवस्था को भारत की अलग-अलग जमीन से लगी सीमाओं की जरूरत के हिसाब से विकसित किया जा रहा है। इसका पायलट प्रोजेक्ट पाकिस्तान सीमा से शुरू करने की योजना बताई गई है। आगे Smart Border व्यवस्था को अन्य सीमाओं पर भी उनकी भौगोलिक और सुरक्षा जरूरतों के अनुसार लागू किया जाएगा।
Border Security में Integrated Surveillance का क्या महत्व है?
इससे अलग-अलग निगरानी साधनों से मिलने वाली जानकारी को एक जगह लाने में मदद मिलती है। इससे सुरक्षा एजेंसियों को सीमा पर हो रही गतिविधियों की ज्यादा व्यापक तस्वीर मिल सकती है और संभावित खतरे पर जल्दी कार्रवाई की जा सकती है।
क्या ये Centres अलग-अलग Security Agencies के बीच Coordination बढ़ाएंगे?
हां। प्रस्तावित व्यवस्था में सीमा सुरक्षा बलों के साथ राज्य और जिला प्रशासन, केंद्रीय एजेंसियों तथा स्थानीय स्तर के stakeholders को जोड़ने पर जोर है। इसी उद्देश्य से Quadrangular Security Grid विकसित की जा रही है, ताकि सीमा सुरक्षा को अलग-अलग एजेंसियों के बजाय एकीकृत व्यवस्था के रूप में संचालित किया जा सके।
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