इंदौर में प्रदूषित जल से 12 मौतें, 162 अस्पताल में भर्ती, मंत्री विजयवर्गीय मीडियाकर्मी पर झल्लाए, अपशब्द कहे

देश के सर्वाधिक स्वच्छ शहर के रूप में जाने जाने वाले इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से एक बड़ी त्रासदी सामने आई है। अब तक 12 लोगों की मृत्यु की सूचना मिली है, जिनमें से 11 के नाम उनके परिजनों द्वारा पुष्ट किए जा चुके हैं। वर्तमान में 162 लोग विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। यह घटना स्वच्छता के दावों और वास्तविकता के बीच की खाई को उजागर करती है।

 

बुधवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर पहुंचे। उन्होंने विभिन्न अस्पतालों में जाकर बीमार लोगों से मुलाकात की और उनकी हालत जानी। इसके पश्चात उन्होंने अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।

12 deaths due to contaminated water in Indore

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

सीएम ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि ऐसी कष्टदायक परिस्थिति भविष्य में कभी उत्पन्न न हो, इसके लिए व्यापक प्रबंधन करने में सभी को जुट जाना चाहिए। जिम्मेदार बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 

मुख्यमंत्री ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि भागीरथपुरा में अब तक 40 हजार से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई है। इनमें से 2,456 लोगों में संदिग्ध लक्षण पाए गए। 212 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 50 मरीजों को डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 162 अभी भी उपचाराधीन हैं।

 

उन्होंने स्वीकार किया कि मामले में लापरवाही हुई थी। सरकार किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी। जहां भी पानी से संबंधित शिकायतें हैं, वहां गहन जांच की जाएगी।

 

मंत्री विजयवर्गीय का विवादास्पद व्यवहार

बैठक से बाहर निकलने के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मीडिया ने कुछ सवाल किए। एक पत्रकार ने जानकारी दी कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को उपचार में खर्च हुई धनराशि का रिफंड अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है।

 

इस पर मंत्री विजयवर्गीय ने कहा, “अरे छोड़ो यार, तुम फोकट सवाल मत पूछो।”

 

पत्रकार ने स्पष्ट किया कि यह फालतू सवाल नहीं है और वे स्वयं वहां जाकर आए हैं। इसके जवाब में मंत्री विजयवर्गीय ने क्रोधित होकर अपशब्द कह दिए। हालांकि, कुछ समय पश्चात उन्होंने X (ट्विटर) पर ट्वीट करके अपने शब्दों पर खेद व्यक्त किया।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री को टैग करते हुए X पर लिखा, “@drmohanyadav51 जी, यह क्या तमाशा कर रही है आपकी सरकार और आपके मंत्री। न पीड़ितों को निःशुल्क उपचार मिल रहा है, न संवेदना, ऊपर से आपके अहंकारी मंत्री अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। थोड़ी सी भी शर्म शेष है तो ऐसे बदतमीज मंत्रियों से नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा लीजिए।”

 

कांग्रेस ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, जयवर्धन सिंह, बदनावर विधायक भंवर सिंह शेखावत, तराना विधायक महेश परमार और सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल शामिल हैं।

 

उच्च न्यायालय में सुनवाई

भागीरथपुरा में प्रदूषित जल से मौतों के मामले में उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। पहली याचिका इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इंसानी ने तथा दूसरी भागीरथपुरा निवासी राहुल गायकवाड ने प्रस्तुत की है।

 

हाईकोर्ट ने बुधवार को दोनों याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई की। दोनों याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव धनोत्कर और ऋषि कुमार चौकसे ने पक्ष रखा। उन्होंने न्यायालय के समक्ष बताया कि क्षेत्र में परिस्थितियां काफी गंभीर हो रही हैं। अनेक मरीज अस्पताल में भर्ती हैं और मृत्यु का आंकड़ा निरंतर बढ़ रहा है।

 

सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने कहा कि इंदौर के 10 अस्पतालों में भागीरथपुरा के समस्त मरीजों का निःशुल्क उपचार किया जा रहा है।

 

इस पर न्यायालय ने टिप्पणी की, “यह तो करना ही पड़ेगा। इस संपूर्ण मामले की विस्तृत रिपोर्ट 2 जनवरी को प्रस्तुत करें कि कितने मरीजों का उपचार किया गया और कितनी मृत्यु हुई हैं।”

 

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव हसानी के अनुसार, भागीरथपुरा से संलग्न अन्य क्षेत्रों में भी संक्रमण फैलने की सूचना पर विभाग ने 21 टीमें तैयार की हैं। इनमें चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, एएनएम, आशा कार्यकर्ता सम्मिलित हैं। घर-घर जाकर उबला पानी पीने, बाहर का भोजन और कटे फल न खाने की समझाइश दी जा रही है।

 

क्षेत्र में 24 घंटे चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई है। 4 एम्बुलेंस तैनात की गई हैं। 14 चिकित्सक, 24 MPW और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ MY हॉस्पिटल के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर भी सहयोग कर रहे हैं।

 

हसानी ने बताया कि अब तक 7,992 घरों का सर्वेक्षण किया गया है। 39,854 लोगों की जांच की गई है। इनमें से 2,456 संदिग्ध मरीज पाए गए, जिन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया। अब तक अस्पतालों में 212 मरीज भर्ती किए गए, जिनमें से 50 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। 162 अभी भर्ती हैं, जिनमें से 26 ICU में हैं।

 

जिम्मेदार अधिकारियों की सूची

 

इस त्रासदी के लिए निम्नलिखित अधिकारियों को जिम्मेदार माना जा रहा है:

 

दिलीप यादव (निगमायुक्त): प्रदूषित पानी की शिकायतों को नजरअंदाज किया। पाइप लाइन की निविदा प्रक्रिया पर निगरानी नहीं रखी।

 

रोहित सिसोनिया (अपर आयुक्त): अगस्त में निविदाएं हुई थीं, उन्हें रोककर रखा। शिकायतों की अनदेखी की।

 

कमल वाघेला (पार्षद): चार महीने तक क्षेत्र की समस्या पर त्वरित निर्णय नहीं लिया।

 

पुष्यमित्र भार्गव (महापौर): पार्षद की लगातार शिकायतों पर कोई कदम नहीं उठाया।

 

बबलू शर्मा (जलकार्य प्रभारी): निरंतर दूषित पानी की आपूर्ति होने के बावजूद ध्यान नहीं दिया।

 

संजीव श्रीवास्तव (प्रभारी): प्रदूषित पानी की शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की, अब लीकेज खोजने निकले।

 

शुभम श्रीवास्तव (उपयंत्री जोन 4): दूषित जल का निराकरण करना था लेकिन नहीं किया।

 

योगेश जोशी (सहायक यंत्री): इंदौर 311 हेल्पलाइन पर आने वाली जल शिकायतों के अनुसार लीकेज की मरम्मत करना था। इन्होंने भी जिम्मेदारी नहीं निभाई।

 

तत्काल कार्रवाई

मामले में संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देर रात तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की। जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले और प्रभारी सहायक अभियंता (PHE) योगेश जोशी को निलंबित कर दिया गया है। प्रभारी उप अभियंता (PHE) शुभम श्रीवास्तव की सेवा समाप्त कर दी गई है।

 

तीन सदस्यों की जांच समिति गठित की गई है। इसके अध्यक्ष IAS नवजीवन पंवार होंगे। समिति में अधीक्षण अभियंता प्रदीप निगम और मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेश राय को भी शामिल किया गया है।

 

सीएम ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा भी की है।

 

लीकेज की खोज

मंगलवार को महत्वपूर्ण खोज हुई। नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज की वजह से क्षेत्र में बीमारी फैली। यह लीकेज पानी की टंकी के समीप बने बगीचे के सुविधाघर (शौचालय) के नीचे से गुजर रही मुख्य लाइन में था। जेसीबी से सुविधाघर तोड़ने पर मुख्य लाइन में लीकेज मिला। इसके पश्चात मरम्मत की गई।

आशंका है कि इसी लीकेज के कारण मलजल पेयजल लाइन में मिश्रित हो गया, जिससे यह त्रासदी हुई।

 

निविदा में देरी

क्षेत्र में नई पानी की लाइन के लिए चार महीने पूर्व ही निविदा जारी हो चुकी थी। शिकायत के आधार पर अगस्त में हुई इस निविदा में चार एजेंसियों ने भाग लिया था। 2.40 करोड़ में नई लाइन डालनी थी। जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक निविदा ही नहीं खोली। निविदा में प्रदूषित पानी की शिकायतों का उल्लेख विशेष रूप से किया गया था।

 

अब अधिकारियों ने तत्परता से निविदा खोली है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

 

दूषित जल से मृत्यु की प्रक्रिया

दूषित पानी पीने से शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस या विषाक्त पदार्थ प्रवेश कर जाते हैं। इससे निम्नलिखित प्रक्रिया में मृत्यु की स्थिति निर्मित हो सकती है:

 

गंभीर डायरिया: प्रदूषित जल से आंतों में संक्रमण होता है। निरंतर उल्टी-दस्त से शरीर में जल और नमक तेजी से कम हो जाता है।

 

निर्जलीकरण और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन: सोडियम-पोटेशियम की कमी से रक्तचाप गिरता है। हृदय की धड़कन अनियमित हो जाती है।

 

कार्डियक अरेस्ट का खतरा: वृद्ध लोगों, हृदय रोग या उच्च रक्तचाप के रोगियों में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन से हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट हो सकता है।

 

सेप्सिस (रक्त में संक्रमण): संक्रमण बढ़ने पर बैक्टीरिया रक्त में फैल जाते हैं, जिससे अंग निष्क्रिय होने लगते हैं। उपचार में विलंब होने पर मृत्यु हो सकती है।

 

पूर्व रोगियों में अधिक जोखिम: मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले रोगियों में जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

 

भोपाल में भी सतर्कता

इंदौर में हुई इस त्रासदी के बाद भोपाल नगर निगम भी सतर्क हो गया है। महापौर मालती राय ने समस्त अभियंताओं को निरीक्षण करने के आदेश दिए हैं ताकि पता चल सके कि कहीं दूषित पानी की आपूर्ति तो नहीं की जा रही है।

 

महापौर ने उप अभियंता, सहायक अभियंता और पर्यवेक्षकों को निरीक्षण करने को कहा है। वहीं, अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री को निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

 

बुधवार को नगर निगम की टीम अवधपुरी पहुंची। पेयजल पाइप लाइन की जांच के लिए कुछ घरों से पानी के नमूने भी एकत्रित किए गए। आठ महीने पूर्व अवधपुरी में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की आपूर्ति अचानक बंद हो गई थी। जांच में सामने आया कि एक निजी विक्रेता द्वारा नाले से जुड़ी खुदाई कार्य के दौरान भूमिगत PNG पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी।

 

नियंत्रण कक्ष की स्थापना

इंदौर नगर निगम ने शहर में नर्मदा जल आपूर्ति व्यवस्था से संबंधित शिकायतों के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। लोग इसके मोबाइल नंबर 7440443500 और 7440440511 पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

 

इस नियंत्रण कक्ष का प्रभारी उपयंत्री शलभ शर्मा को नियुक्त किया गया है। नियंत्रण कक्ष में 4 कर्मचारी रोटेशन पर तैनात रहेंगे।

 

एक्सपायर्ड दवाई का विवाद

भागीरथपुरा निवासी शुभम पाठक ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर गंभीर आरोप लगाया। उनका कहना है कि चिकित्सक ने जो दवाई लिखी है, वह एक्सपायर हो चुकी है। वहीं, चिकित्सक का तर्क है कि यह दवाई नहीं, बल्कि विटामिन है और इसकी समाप्ति तिथि दिसंबर 2025 है।

 

शुभम का कहना है कि 31 दिसंबर समाप्ति की अंतिम तिथि है और चिकित्सक ने यह दवाई 5 दिन तक देने को कहा था। यदि वे इसे जारी रखते तो उनकी बच्ची को खतरा हो सकता था।

 

निष्कर्ष और चिंताएं

यह त्रासदी देश के सबसे स्वच्छ शहर में हुई है, जो गंभीर चिंता का विषय है। यह दर्शाता है कि बुनियादी ढांचे की उचित निगरानी और रखरखाव में कितनी लापरवाही बरती जा रही है।

 

चार महीने से शिकायतें आ रही थीं, लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। निविदाएं जारी हो चुकी थीं लेकिन खोली नहीं गईं। पाइपलाइन में लीकेज था लेकिन मरम्मत नहीं की गई। यह प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी का स्पष्ट उदाहरण है।

 

अब जबकि 12 लोगों की जानें जा चुकी हैं और सैकड़ों बीमार हैं, तब प्रशासन सक्रिय हुआ है। यह बहुत देर से की गई कार्रवाई है। आवश्यकता इस बात की है कि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए एक सशक्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

 

सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच समिति गठित की है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई केवल दिखावे के लिए है या वास्तव में दोषियों को सजा मिलेगी और व्यवस्था में सुधार होगा। समय ही बताएगा कि क्या यह त्रासदी व्यवस्था में वास्तविक बदलाव ला पाएगी या यह भी अन्य घटनाओं की तरह धीरे-धीरे भुला दी जाएगी।