मछुआरों के बच्चों ने कर दिखाया कमाल? कन्याकुमारी के 48 गांव प्लास्टिक-मुक्त, जानिए दुनिया के प्लास्टिक-मुक्त 6 देश

समुद्र किनारे फैला प्लास्टिक, जालों में उलझा कचरा और तूफान के बाद तट पर जमा मलबा-यह तस्वीर देश के कई तटीय इलाकों में आम है। लेकिन कन्याकुमारी जिला के 48 मछुआरा गांवों ने इस तस्वीर को बदल दिया है। यहां बच्चों और युवाओं ने मिलकर ऐसा अभियान चलाया कि 15 किलोमीटर लंबे तटीय इलाके को प्लास्टिक-मुक्त बना दिया। खास बात यह है कि यह काम बिना किसी एनजीओ और बिना सरकारी फंड के किया गया।

 

आज इन गांवों के छह बीच साफ-सुथरे हैं और यहां रोज 250 से 300 पर्यटक पहुंच रहे हैं। जो जगह पहले सिर्फ मछली पकड़ने के लिए जानी जाती थी, अब वह साफ तट और जागरूक लोगों की मिसाल बन चुकी है।

Kanyakumari plastic free villages

बच्चों की टीम ने बदली तट की तस्वीर

इन गांवों में ‘नेगिजी इल्ला नेथल पडई’ यानी प्लास्टिक-मुक्त तटीय ब्रिगेड नाम की टीम काम कर रही है। इसमें 850 स्कूली बच्चे और 500 कॉलेज से पढ़ाई पूरी कर चुके युवा शामिल हैं। सभी सदस्य इन्हीं गांवों के रहने वाले हैं।

 

हर वीकेंड ये बच्चे और युवा समूह बनाकर गांवों और समुद्र किनारे की सफाई करते हैं। वे प्लास्टिक की बोतलें, पैकेट, मछली पकड़ने के जाल के टुकड़े और दूसरे कचरे को इकट्ठा करते हैं। धीरे-धीरे लोगों की आदतें भी बदलीं और समुद्र में कचरा फेंकना कम हुआ।

 

एक दुखद घटना से शुरू हुआ अभियान

इस मुहिम की शुरुआत इंजीनियर मेलबिन रॉबिन ने की थी। साल 2017 में आए चक्रवात ओखी में उन्होंने अपने दो भाइयों को खो दिया था। तूफान के बाद उन्होंने देखा कि समुद्र किनारे जमा प्लास्टिक और मलबे ने तबाही को और बढ़ाया।

 

इसी के बाद 2019 में उन्होंने दो दोस्तों के साथ तट की सफाई शुरू की। धीरे-धीरे गांव के बच्चे और युवा भी साथ जुड़ते गए। देखते ही देखते यह एक बड़ा अभियान बन गया।

 

बिना फंडिंग, खुद के दम पर काम

यह टीम किसी से चंदा या फंड नहीं लेती। जो प्लास्टिक कचरा इकट्ठा होता है, उसे बेच दिया जाता है। उसी पैसे से दस्ताने, जूते और सफाई के औजार खरीदे जाते हैं।

 

टीम ने मछुआरों से भी बात की और उन्हें समझाया कि वे समुद्र में इस्तेमाल किया गया प्लास्टिक वापस किनारे पर लाएं। अब मछुआरे समुद्र में कचरा फेंकने के बजाय उसे जमा करते हैं।

 

अब तक इस ब्रिगेड ने 7,400 किलो से ज्यादा प्लास्टिक हटाया है। इसके अलावा तूफान से प्रभावित इलाकों में 1,200 से ज्यादा नारियल और जामुन के पेड़ भी लगाए गए हैं।

 

अनोखा तरीका: कचरा दो, साइकिल लो

सिर्फ सफाई ही नहीं, यह टीम लोगों की सोच भी बदल रही है। उन्होंने घर-घर जाकर दूध के खाली पैकेट इकट्ठा करने की शुरुआत की। पिछले साल तीन गांवों से 5 लाख से ज्यादा दूध के पैकेट जमा कर रीसाइकिल के लिए भेजे गए।

 

जो परिवार सबसे ज्यादा प्लास्टिक रीसाइकिल करता है, उसे साइकिल या जरूरत का सामान इनाम में दिया जाता है। इससे बच्चों में भी उत्साह बढ़ा है।

 

वन विभाग भी है हैरान

जिला वन अधिकारी इल्लैयाराजा के मुताबिक, यह समूह तटीय क्षेत्र के करीब 80% हिस्से को साफ कर चुका है। वन विभाग भी इतना काम नहीं कर पाया था।

 

छात्र मैक्सवेल, जो अभी छठी कक्षा में हैं, बताते हैं कि वे चौथी कक्षा से ही सफाई में हिस्सा ले रहे हैं। कई बार वे पूरा दिन समुद्र किनारे से प्लास्टिक हटाने में बिताते हैं।

 

स्थानीय पंचायत की पूर्व अध्यक्ष लैला के अनुसार, अब गांव के हर घर में दो डस्टबिन रखे जाते हैं। लगातार कोशिशों की वजह से समुद्र का पानी और तट पहले से ज्यादा साफ दिखने लगा है।

 

दुनिया के 6 प्लास्टिक-मुक्त पर्यटन स्थल

सिर्फ कन्याकुमारी ही नहीं, दुनिया के कई देश और इलाके भी प्लास्टिक कम करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यहां ऐसे छह स्थानों की जानकारी दी जा रही है जहां प्लास्टिक पर सख्ती से रोक लगाई गई है।

 

  1. Sweden

स्वीडन को दुनिया के सबसे पर्यावरण-सचेत देशों में गिना जाता है। यहां रीसाइक्लिंग की मजबूत व्यवस्था है। राजधानी Stockholm और Gothenburg जैसे शहरों में सार्वजनिक जगहों पर प्लास्टिक कम करने के नियम लागू हैं।

 

कई होटल और रेस्टोरेंट सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करते। कुछ सुपरमार्केट पैकेजिंग-फ्री सेक्शन भी चला रहे हैं। देश की एयरलाइन Scandinavian Airlines ने भी कई उड़ानों में प्लास्टिक कटलरी हटाई है।

 

यहां साफ पानी सीधे नल से पीने लायक होता है, इसलिए बोतलबंद पानी की जरूरत कम पड़ती है।

 

  1. Palau

यह छोटा द्वीपीय देश पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सख्त नियमों के लिए जाना जाता है। पलाऊ दुनिया का पहला देश है जिसने नुकसानदायक सनस्क्रीन पर रोक लगाई।

 

2020 से यहां आने वाले पर्यटकों को एक पर्यावरण शपथ पर हस्ताक्षर करना होता है। 2021 में पलाऊ ने जिम्मेदार पर्यटन नीति लागू की, जिसमें सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बैग, बोतल और स्ट्रॉ को हतोत्साहित किया गया।

 

यहां अधिकतर होटल और टूर ऑपरेटर प्लास्टिक-मुक्त व्यवस्था अपनाते हैं।

 

  1. Rwanda

रवांडा ने 2008 में प्लास्टिक बैग पर सख्त प्रतिबंध लगाया था। राजधानी Kigali को अफ्रीका के सबसे साफ शहरों में गिना जाता है।

 

हर महीने यहां सामुदायिक सफाई अभियान ‘उमुगांडा’ होता है। देश में प्लास्टिक बैग लाना भी मना है। यहां होटल और लॉज भी प्लास्टिक के बजाय दोबारा इस्तेमाल होने वाली चीजों को बढ़ावा देते हैं।

 

  1. California, अमेरिका

कैलिफोर्निया ने 2016 में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक बैग पर रोक लगाने वाला पहला अमेरिकी राज्य बनने का रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद प्लास्टिक स्ट्रॉ और छोटे होटल टॉयलेटरी पैक पर भी नियम बने।

 

San Francisco और Santa Monica जैसे शहरों में प्लास्टिक कम करने के लिए अलग-अलग पहल की जा रही है। बीच और एयरपोर्ट पर पानी भरने के स्टेशन लगाए गए हैं।

 

  1. Iceland

आइसलैंड ने 2020 में प्लास्टिक कचरा कम करने की राष्ट्रीय योजना शुरू की। राजधानी Reykjavik में कई कैफे ग्राहकों को अपना कप लाने के लिए प्रेरित करते हैं।

 

यहां का पानी बेहद साफ होता है, इसलिए प्लास्टिक बोतलों की जरूरत कम पड़ती है। टूर ऑपरेटर भी पर्यटकों को दोबारा इस्तेमाल होने वाली बोतलें देते हैं।

 

  1. Sikkim, भारत

पूर्वोत्तर भारत का छोटा राज्य सिक्किम 1998 में प्लास्टिक बैग पर रोक लगाने वाला पहला भारतीय राज्य बना। बाद में स्टायरोफोम और पैकेज्ड पानी पर भी नियम लागू किए गए।

 

राजधानी Gangtok साफ-सुथरे शहरों में गिनी जाती है। यहां ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा दिया जाता है और कई होमस्टे प्लास्टिक-मुक्त व्यवस्था अपनाते हैं।

 

क्या यह मॉडल बाकी जगहों पर लागू हो सकता है?

कन्याकुमारी के गांवों ने दिखा दिया है कि अगर स्थानीय लोग मिलकर ठान लें तो बड़ा बदलाव संभव है। बच्चों की भागीदारी, बिना फंडिंग के काम और इनाम जैसी पहल से लोगों की सोच बदली जा सकती है।

 

दुनिया के इन देशों और राज्यों की तरह अगर हर क्षेत्र अपने स्तर पर कदम उठाए, तो प्लास्टिक की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।