भारत–ईरान संबंधों के 75 वर्ष: कूटनीति, संस्कृति और रणनीतिक साझेदारी

संदर्भ :

भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंधों को 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इस अवसर को विशेष और सार्थक बनाने के लिए भारत और ईरान ने वर्षभर चलने वाले एक संयुक्त “कूटनीतिक कैलेंडर” की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। यह पहल केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं है, बल्कि दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नए सिरे से मजबूती देने का प्रयास है।

 

भारत और ईरान के संबंध आधुनिक कूटनीति से कहीं पुराने हैं। प्राचीन काल से ही व्यापार, संस्कृति, भाषा और सभ्यता के स्तर पर दोनों क्षेत्रों के बीच गहरा संपर्क रहा है। फारसी भाषा और संस्कृति का भारतीय उपमहाद्वीप पर प्रभाव, सूफी परंपरा और ऐतिहासिक व्यापार मार्ग इन संबंधों की जड़ों को दर्शाते हैं। 75वीं वर्षगांठ इसी साझा विरासत और बदलते वैश्विक परिदृश्य में सहयोग की निरंतरता का प्रतीक है।

75 Years of India-Iran Relations

कूटनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा

कूटनीतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा के अंतर्गत दोनों देशों में वर्षभर सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक आदान-प्रदान, कला प्रदर्शनियां, साहित्यिक आयोजन और नीति-स्तरीय संवाद आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि भविष्य के लिए विश्वास और सहयोग की मजबूत नींव तैयार करना है।

 

ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया और वैश्विक राजनीति अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, भारत और ईरान का यह कदम संवाद और सहयोग के महत्व को रेखांकित करता है। भारत की “रणनीतिक स्वायत्तता” की नीति और ईरान की क्षेत्रीय भूमिका, दोनों को जोड़ते हुए यह पहल एक संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।

 

सांस्कृतिक स्तर पर यह कैलेंडर लोगों से लोगों के संपर्क को बढ़ावा देगा। विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और सांस्कृतिक संगठनों के बीच सहयोग से दोनों समाजों को एक-दूसरे को बेहतर समझने का अवसर मिलेगा। यह विशेष रूप से युवाओं के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि वे संबंधों को केवल राजनीति के चश्मे से नहीं, बल्कि साझा इतिहास और भविष्य की संभावनाओं के रूप में देखें।

 

रणनीतिक और आर्थिक आयाम :

भारत–ईरान संबंधों का एक अहम पक्ष रणनीतिक सहयोग रहा है। ईरान भौगोलिक दृष्टि से भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मध्य एशिया, अफगानिस्तान और यूरोप तक पहुँच का मार्ग प्रदान करता है। इसी संदर्भ में

 

चाबहार बंदरगाह परियोजना भारत–ईरान सहयोग का प्रतीक मानी जाती है। यह परियोजना भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुँच प्रदान करती है और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करती है।

 

आर्थिक रूप से भी दोनों देशों के संबंध संभावनाओं से भरे हुए हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में ईरान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भागीदार रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के कारण हाल के वर्षों में यह सहयोग सीमित हुआ, फिर भी दोनों देशों ने संवाद के रास्ते खुले रखे हैं। 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुरू किया गया यह कैलेंडर संकेत देता है कि दोनों देश आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नए ढांचे में आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं।

 

भारत के लिए ईरान के साथ संबंध केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि बहुपक्षीय महत्व भी रखते हैं। रूस, मध्य एशिया और पश्चिम एशिया से जुड़ी कनेक्टिविटी योजनाओं में ईरान की भूमिका अहम है। वहीं ईरान भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखता है, जो दबाव की राजनीति से इतर संवाद और सहयोग में विश्वास रखता है।

 

वैश्विक परिप्रेक्ष्य और भारत की संतुलन नीति :

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत एक संतुलनकारी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। एक ओर उसके अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ गहरे संबंध हैं, वहीं दूसरी ओर वह ईरान जैसे देशों के साथ भी संवाद बनाए रखना चाहता है। यह डिप्लोमैटिक कैलेंडर इसी संतुलन नीति का प्रतिबिंब है।
ईरान के साथ संबंध बनाए रखना भारत के लिए इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और संपर्क परियोजनाओं से सीधे जुड़ा हुआ है। साथ ही, भारत यह संदेश भी देना चाहता है कि वह अपने ऐतिहासिक मित्रों के साथ संबंधों को केवल वैश्विक दबावों के आधार पर नहीं तौलता।

 

निष्कर्ष :

भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष केवल एक ऐतिहासिक पड़ाव नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का अवसर हैं। कूटनीतिक कैलेंडर के माध्यम से दोनों देश यह स्पष्ट कर रहे हैं कि वे अतीत की विरासत को सम्मान देते हुए, बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सहयोग के नए रास्ते तलाशना चाहते हैं।


यह पहल दर्शाती है कि भारत–ईरान संबंध केवल रणनीति या व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और आपसी सम्मान पर आधारित हैं। आने वाले वर्षों में यदि यह सहयोग निरंतर और व्यावहारिक रूप से आगे बढ़ता है, तो यह न केवल दोनों देशों के हितों को साधेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।

 

 

प्रश्न : भारत और ईरान द्वारा अपने द्विपक्षीय संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुरू किए गए कूटनीतिक कैलेंडर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. डिप्लोमैटिक कैलेंडर का उद्देश्य वर्षभर नियोजित कूटनीतिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियाँ आयोजित करना है।
  2. भारत–ईरान संबंधों में चाबहार बंदरगाह परियोजना रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
  3. यह पहल भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और संतुलित पश्चिम एशिया नीति को दर्शाती है।
  4. भारत ने ईरान के साथ ऊर्जा और निवेश संबंधों पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया है।

उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 1, 2 और 3

(c) केवल 2 और 4

(d) 1, 2, 3 और 4

 

प्रश्न (GS-II : अंतरराष्ट्रीय संबंध)

भारत और ईरान द्वारा द्विपक्षीय संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर ‘कूटनीतिक कैलेंडर’ की शुरुआत प्रतीकात्मक उत्सव से आगे बढ़कर दीर्घकालिक कूटनीतिक साझेदारी को दर्शाती है। इस कथन के आलोक में भारत–ईरान संबंधों के सांस्कृतिक, रणनीतिक और भू राजनीतिक महत्व का विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द)