भारतीय शेयर बाजार ने आज यानी 27 नवंबर को जबरदस्त तेजी दिखाई और अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया, जिससे निवेशकों में उत्साह और विश्वास दोनों बढ़ा है। कारोबार के दौरान निफ्टी 26,310 और सेंसेक्स 86,055 के स्तर तक चढ़े। इससे पहले 27 सितंबर 2024 को सेंसेक्स ने 85,978 और निफ्टी ने 26,277 का रिकॉर्ड बनाया था।
हालांकि शुरुआती बढ़त के बाद बाजार में हल्की गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स मामूली फिसलकर 85,580 पर आ गया है। निफ्टी भी करीब 40 अंक टूटकर 26,170 के आसपास कारोबार कर रहा है।
पिछले एक साल में निफ्टी की तेजी में योगदान देने वाले शीर्ष स्टॉक:
- बजाज फाइनेंस (54%): पिछले एक साल में सबसे ज्यादा बढ़त। आज 7% चढ़कर ₹1038.50 तक पहुंचा। 52-सप्ताह के निचले स्तर से काफी ऊपर और 5 साल में 112% रिटर्न दिया।
- मारुति सुजुकी (45%): दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता। हालांकि आज हल्की गिरावट दिखी। 5 साल में 129% रिटर्न दिया।
- आयशर मोटर्स (44%): पिछले एक साल में मजबूत तेजी, लेकिन आज 2% नीचे। 5 साल में 179% की शानदार बढ़त।
- श्रीराम फाइनेंस (43%): आज ₹868.85 के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा। 1 साल में 43% और 5 साल में 305% रिटर्न दिया।
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स – BEL (35%): एक साल में अच्छी बढ़त, हालांकि आज लगभग स्थिर। 5 वर्षों में 1000% से ज्यादा रिटर्न देकर मल्टीबैगर साबित हुआ।
बाज़ार के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँचने के कारण:
भारतीय शेयर बाजार सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया है, जिसका कारण कई कारकों का संयोजन है। निवेशकों ने अमेरिका और भारत में जल्द ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद के चलते अधिक सक्रियता दिखाई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से महंगाई और कंपनियों की लागत कम हुई, जिससे बाजार में सकारात्मकता आई।
विदेशी और घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी ने निवेश के प्रवाह को बढ़ाया और बाजार को मजबूती प्रदान की। बड़ी कंपनियों की मजबूत कमाई ने शेयरों की मांग को बढ़ाया, वहीं बैंक, ऑटो और रियल एस्टेट जैसे प्रमुख सेक्टरों का बेहतर प्रदर्शन भी बाजार को सहारा देने वाला रहा।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान का भी असर:
शेयर बाजार की तेजी के पीछे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का बयान भी एक बड़ी वजह है। 24 नवंबर को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में आगे कटौती की गुंजाइश मौजूद है। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 2025 की पिछली MPC बैठक में भी यह बात साफ कही गई थी। इस उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और बाजार में तेजी देखने को मिली।
वैश्विक बाजारों का सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर:
हाल ही में वैश्विक बाजारों में भी मजबूती देखने को मिली, जिसका सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। एशियाई बाजारों में कोरिया का कोस्पी 0.85% बढ़कर 3,994 तक पहुंच गया, जबकि जापान का निक्केई 1.30% की बढ़त के साथ 50,203 पर कारोबार कर रहा है।
वहीं, 26 नवंबर को अमेरिकी बाजार भी हरे निशान में बंद हुए- डाउ जोन्स 0.67% बढ़कर 47,427 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक में 0.82% और S&P 500 में 0.69% की तेजी दर्ज की गई। इन मजबूत वैश्विक संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को और बढ़ाया और भारतीय बाजार की तेजी को समर्थन दिया।
सर्वकालिक उच्च स्तर पहुंचने के मायने:
निफ्टी का नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचना यह दिखाता है कि बाजार में भरोसा मजबूत है और अर्थव्यवस्था स्थिर रफ्तार से आगे बढ़ रही है। ऐसे बड़े पड़ाव यह बताते हैं कि बाजार लंबे समय के रुझानों, सही आंकड़ों और धैर्य पर चलता है, न कि छोटे-मोटे उतार–चढ़ाव पर। कोटक सिक्योरिटीज़ के श्रीकांत चौहान के अनुसार, इस उपलब्धि का श्रेय सरकार, नीति बनाने वालों और खुदरा निवेशकों को जाता है, जिन्होंने मुश्किल समय में भी अर्थव्यवस्था और बाजार का भरोसा बनाए रखा।
भारतीय शेयर बाजार के बारे में:
भारतीय शेयर बाजार वह जगह है जहाँ शेयर, बॉन्ड, फ्यूचर्स और डेरिवेटिव जैसे कई तरह के वित्तीय साधनों में निवेश किया जाता है। भारत में ज़्यादातर ट्रेडिंग दो बड़े स्टॉक एक्सचेंजों पर होती है; BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) और NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज)। BSE 1875 से काम कर रहा है, जबकि NSE 1992 में बना और 1994 से ट्रेडिंग शुरू हुई।
दोनों एक्सचेंजों में ट्रेडिंग का तरीका, ट्रेडिंग के समय और निपटान की प्रक्रिया लगभग एक जैसी होती है। भारत की लगभग सभी बड़ी और महत्वपूर्ण कंपनियाँ BSE और NSE दोनों पर सूचीबद्ध हैं।
भारतीय बाजार को नियंत्रित करने वाले कानून:
- SCRA, 1956 (प्रतिभूति अनुबंध विनियमन अधिनियम)
- सेबी अधिनियम, 1992 (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम)
- डिपॉजिटरी अधिनियम, 1996
- कंपनी अधिनियम, 2013
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) क्या है ?
सेबी (SEBI) एक सरकारी संस्था है, जिसे 1992 में भारत सरकार ने बनाया। सेबी अधिनियम, 1992 के तहत इसे कानूनी अधिकार दिए गए, ताकि यह बाजार को नियंत्रित कर सके। साथ ही, निवेशकों के हितों की रक्षा भी कर सके।
सेबी की मुख्य शक्तियाँ:
- अर्ध-न्यायिक शक्ति: सेबी बाजार में होने वाली धोखाधड़ी और अनैतिक कामों पर फैसला दे सकता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
- अर्ध-कार्यकारी शक्ति: सेबी रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर सकता है, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कर सकता है, और स्टॉक एक्सचेंजों को मान्यता देने या रद्द करने का अधिकार रखता है।
- अर्ध-विधायी शक्ति: सेबी निवेशकों की सुरक्षा के लिए नियम और विनियम बनाता है जैसे; लिस्टिंग नियम, इनसाइडर ट्रेडिंग रोकने के नियम और जरूरी खुलासा संबंधी नियम।
निष्कर्ष:
भारतीय शेयर बाजार का सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँचना निवेशकों के भरोसे, मजबूत आर्थिक नींव और सकारात्मक बाजार माहौल का संकेत है। निफ्टी और सेंसेक्स के नए रिकॉर्ड यह दर्शाते हैं कि बेहतर कॉर्पोरेट आय, नीतिगत समर्थन और अनुकूल वैश्विक परिस्थितियाँ बाजार की तेजी में अहम भूमिका निभा रही हैं और आने वाले समय में स्थिर वृद्धि की संभावना को मजबूत करती हैं।
