वर्ष 2025 भारत के आर्थिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है। इस साल हमने जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे विशाल अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल किया। दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि दर बढ़कर 8.2% तक पहुंच गई, जो देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।
वर्तमान में भारत की GDP का कुल मूल्यांकन 4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹350 लाख करोड़) हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 2.5 से 3 वर्षों में भारत जर्मनी को भी पीछे छोड़ देगा। वर्ष 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर (₹655 लाख करोड़) की अर्थव्यवस्था के साथ हम विश्व में तीसरे स्थान पर पहुंच जाएंगे।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वृद्धि के रुझान को देखते हुए पूरे वर्ष के लिए अनुमान को 6.8% से बढ़ाकर 7.3% कर दिया है।
वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति
विश्व की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में भारत अब चौथे पायदान पर है:
- पहला स्थान: अमेरिका – 6 ट्रिलियन डॉलर
- दूसरा स्थान: चीन – 4 ट्रिलियन डॉलर
- तीसरा स्थान: जर्मनी – 5 ट्रिलियन डॉलर
- चौथा स्थान: भारत – 18 ट्रिलियन डॉलर
- पांचवां स्थान: जापान – 1 ट्रिलियन डॉलर
मुद्रास्फीति में भारी गिरावट
आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ी राहत मुद्रास्फीति के मोर्चे पर मिली है। वर्ष 2025 की शुरुआत में खुदरा मुद्रास्फीति (CPI) 4.26% थी, जो नवंबर में घटकर मात्र 0.71% रह गई। यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में कमी के कारण संभव हुई।
मासिक मुद्रास्फीति का विवरण:
- अप्रैल: 3.16%
- मई: 2.82%
- जून: 2.10%
- जुलाई: 1.61%
- अगस्त: 2.07%
- सितंबर: 1.44%
- अक्टूबर: 0.25%
- नवंबर: 0.71%
इस सकारात्मक परिस्थिति को देखते हुए आरबीआई ने अपनी ब्याज दरों में 0.25% की कमी की है, जिससे अब यह 5.25% पर आ गई है। इसका सीधा फायदा आवास ऋण और वाहन ऋण लेने वालों को मिलेगा, क्योंकि ये सस्ते होने की संभावना है।
उच्च विकास दर और न्यून मुद्रास्फीति के इस संयोजन को अर्थशास्त्र में ‘गोल्डिलॉक्स पीरियड’ कहा जाता है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए सर्वोत्तम स्थिति मानी जाती है।
रोजगार के क्षेत्र में सुधार
रोजगार के मामले में नवंबर का महीना उत्साहवर्धक रहा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (PLFS) के आंकड़े बताते हैं कि देश की कुल बेरोजगारी दर अक्टूबर के 5.2% से घटकर नवंबर में 4.7% पर आ गई है। यह अप्रैल 2025 के बाद का सबसे निम्न स्तर है।
विभिन्न क्षेत्रों में बेरोजगारी:
- ग्रामीण क्षेत्रों में यह घटकर 3.9% रह गई
- शहरी महिलाओं में 9.7% से कम होकर 9.3% हुई
- ग्रामीण महिलाओं में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई – 4.0% से घटकर 3.4%
विशेष रूप से महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि उत्साहजनक है, जो समावेशी विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
निर्यात में उछाल
वैश्विक चुनौतियों और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ लगाने के बावजूद भारत का निर्यात बढ़ा है। नवंबर 2025 में वस्तु निर्यात 38.13 बिलियन डॉलर रहा, जबकि साल की शुरुआत में यह 36.43 बिलियन डॉलर था।
प्रमुख निर्यात वृद्धि:
- काजू: 64% की वृद्धि
- समुद्री उत्पाद: 62% की वृद्धि
- इंजीनियरिंग सामान: 17% की वृद्धि
सेवा क्षेत्र का निर्यात भी 8.65% बढ़कर 270 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में है और 686.2 बिलियन डॉलर (₹61 लाख करोड़) पर है, जो 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है।
अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की सकारात्मक रेटिंग
विश्व की प्रमुख रेटिंग एजेंसियों ने भारत के विकास अनुमान को ऊपर की ओर संशोधित किया है:
- फिच: वित्त वर्ष 2026 के लिए 7.4% वृद्धि का अनुमान
- एशियन डेवलपमेंट बैंक: 2025 के लिए 7.2% का अनुमान
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF): 2025 के लिए 6.6% वृद्धि का दावा
- मूडीज: भारत को G20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बताया
2047 का लक्ष्य
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत वर्ष 2047 तक उच्च मध्यम-आय वाले देश के रूप में स्थापित होने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आर्थिक वृद्धि, संरचनात्मक सुधारों और सामाजिक प्रगति को आधार बनाया जा रहा है।
सरकारी बयान में कहा गया कि मुद्रास्फीति अभी नियंत्रण में है और निर्धारित सीमा से नीचे है। बेरोजगारी धीरे-धीरे घट रही है और देश के निर्यात में निरंतर सुधार हो रहा है। कारोबारियों को बैंकों से सुगमता से ऋण मिल रहा है। बाजार में मांग बनी हुई है और शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च बढ़ने से व्यापार को सहायता मिल रही है।
GDP क्या हैं?
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अर्थव्यवस्था के स्वास्थ्य को मापने का मुख्य पैमाना है। यह एक निश्चित अवधि में देश की सीमाओं के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य को दर्शाती है। इसमें देश में कार्यरत विदेशी कंपनियों का उत्पादन भी शामिल होता है।
GDP के प्रकार:
रियल GDP: इसमें वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य की गणना आधार वर्ष के मूल्य पर की जाती है। वर्तमान में आधार वर्ष 2011-12 है।
नॉमिनल GDP: इसकी गणना वर्तमान कीमतों पर की जाती है।
GDP की गणना का सूत्र: GDP = C + G + I + NX
यहां:
- C = निजी उपभोग
- G = सरकारी खर्च
- I = निवेश
- NX = शुद्ध निर्यात
GDP को प्रभावित करने वाले कारक
GDP की वृद्धि या कमी के लिए चार मुख्य घटक जिम्मेदार होते हैं:
पहला – व्यक्तिगत उपभोग: आप और हम जो खर्च करते हैं, वह अर्थव्यवस्था में योगदान देता है।
दूसरा – निजी क्षेत्र की व्यावसायिक वृद्धि: यह GDP में 32% का योगदान देती है।
तीसरा – सरकारी व्यय: वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में सरकार का खर्च। इसका GDP में 11% योगदान है।
चौथा – शुद्ध मांग: कुल निर्यात में से कुल आयात घटाया जाता है। चूंकि भारत में आयात अधिक है, इसलिए इसका GDP पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
निष्कर्ष:
वर्ष 2025 भारत के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत सफल रहा है। जापान को पीछे छोड़कर चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना, मुद्रास्फीति में भारी गिरावट, बेरोजगारी में कमी और निर्यात में वृद्धि – ये सभी संकेतक देश की मजबूत आर्थिक नींव को दर्शाते हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का सकारात्मक रुख और सरकार के दीर्घकालिक लक्ष्य यह संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक यात्रा और भी उज्ज्वल होगी।
