हाल ही में, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने स्वदेशी रूप से विकसित प्रलय मिसाइल की सामूहिक प्रक्षेपण क्षमता का सफल परीक्षण किया है। यह उपलब्धि भारत के उन्नत मिसाइल तंत्र में इस प्रणाली की परिचालन विश्वसनीयता और बढ़ती क्षमता को दर्शाती है।
भारत की स्वदेशी ‘प्रलय’ मिसाइल
- प्रलय मिसाइल भारत द्वारा विकसित एक उन्नत स्वदेशी सामरिक मिसाइल प्रणाली है, जो पारंपरिक युद्ध परिदृश्य में सटीक और तीव्र प्रहार के लिए तैयार की गई है।
- प्रलय एक क्वासी-बैलिस्टिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह कम ऊंचाई की उड़ान भरते हुए लक्ष्य तक पहुंचे और रास्ते में अपनी दिशा बदल सके।
- इसकी आधुनिक मार्गदर्शन प्रणाली इसे पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में अधिक लचीला और प्रभावी बनाती है।
- इस मिसाइल का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा किया गया है। परियोजना का नेतृत्व रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) ने किया, जिसमें डीआरडीओ की कई प्रयोगशालाओं का सहयोग रहा।
- प्रलय परियोजना को वर्ष 2015 में मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य पारंपरिक युद्ध में भारत की मध्यम दूरी की सटीक प्रहार क्षमता को मजबूत करना था। यह मिसाइल पहले से मौजूद प्रहार (Prahaar) जैसी परियोजनाओं के अनुभव पर आधारित है, लेकिन प्रलय की मारक क्षमता, दूरी और पेलोड कहीं अधिक उन्नत है।
- प्रलय मिसाइल की मारक दूरी 150 से 500 किलोमीटर के बीच है, जो इसके वारहेड के वजन पर निर्भर करती है। यह मिसाइल 350 से 1,000 किलोग्राम तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है। इसमें उच्च-विस्फोटक और पैठ बनाने वाले वारहेड शामिल हैं, जो मजबूत संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
- प्रलय में ठोस ईंधन रॉकेट मोटर का उपयोग किया गया है, जो इसे तेज प्रतिक्रिया और लंबी शेल्फ लाइफ प्रदान करता है। यह एक रोड-मोबाइल प्रणाली है, जिसे ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर (TEL) से दागा जाता है। इससे इसे युद्धक्षेत्र में जल्दी तैनात किया जा सकता है। इसका CEP (सर्कुलर एरर प्रॉबेबलिटी) बहुत कम है, जो इसकी अत्यधिक सटीकता को दर्शाता है।
- प्रलय की उड़ान प्रणाली क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर आधारित है। इसमें बैलिस्टिक और नियंत्रित उड़ान दोनों के गुण शामिल हैं। इसके अंतिम चरण में मिसाइल की गति हाइपरसोनिक स्तर तक पहुंच जाती है, जिससे इसे रोक पाना अत्यंत कठिन हो जाता है।
- मिसाइल में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और उपग्रह आधारित नेविगेशन का संयोजन किया गया है। इसके साथ ही, टर्मिनल गाइडेंस सिस्टम इसे उड़ान के दौरान दिशा सुधारने की क्षमता देता है। इससे दुश्मन के रडार, कमांड पोस्ट और सैन्य अड्डों जैसे उच्च-मूल्य लक्ष्यों पर सटीक प्रहार संभव होता है।
- प्रलय विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद ले जा सकती है, जिनमें हाई एक्सप्लोसिव प्री-फॉर्म्ड फ्रैगमेंटेशन, पैठ और विस्फोट संयोजन (PCB) तथा रनवे डिनायल पेनिट्रेशन सबम्यूनिशन (RDPS) शामिल हैं।
- प्रलय का पहला उड़ान परीक्षण 22 दिसंबर 2021 को ओडिशा तट के पास किया गया था, जिसमें सभी लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरे हुए। 2025 में डीआरडीओ ने इसकी न्यूनतम और अधिकतम दूरी क्षमताओं को प्रमाणित करने के लिए कई सफल परीक्षण किए।
- 31 दिसंबर 2025 को डीआरडीओ ने एक ही लॉन्चर से दो प्रलय मिसाइलों का त्वरित सल्वो प्रक्षेपण सफलतापूर्वक किया। इससे इसकी तेज पुनः-फायर क्षमता से स्पष्ट हुआ कि प्रलय युद्ध के दौरान लगातार और प्रभावी प्रहार करने में सक्षम है।
प्रलय मिसाइल का सामरिक महत्व
- अब तक भारत के पास पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट सिस्टम और लंबी दूरी की अग्नि श्रेणी की मिसाइलों है। इसमें पिनाका सीमित दूरी के लिए उपयोगी है, जबकि अग्नि मिसाइलें मुख्य रूप से परमाणु प्रतिरोध की भूमिका निभाती हैं। प्रलय मिसाइल इनके बीच के रिक्त स्थान को पूरा करने में सक्षम है। यह भारत को लंबी दूरी की पारंपरिक (गैर-परमाणु) सतह से सतह पर मार करने वाली क्षमता प्रदान करती है।
- भारत प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स (IRF) के माध्यम से अपनी पारंपरिक मिसाइल क्षमताओं को एकीकृत करना चाहता है। यह एक त्रि-सेवा कमान होगी, जिसमें सेना, वायुसेना और नौसेना की पारंपरिक मिसाइल संपत्तियां शामिल होंगी। प्रलय और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलें इस बल की ताकत बनेंगी। इससे पारंपरिक मिसाइलों को स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड से अलग रखा जा सकेगा, जो मुख्य रूप से परमाणु हथियारों पर केंद्रित है।
- भारत की सुरक्षा चुनौतियां जिसमें लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) और लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) दोनों पर खतरे बने रहते हैं। प्रलय को विशेष रूप से इन क्षेत्रों में तैनाती के लिए डिजाइन किया गया है। यह चीन की डोंग फेंग-12 (DF-12) और पाकिस्तान की नसर जैसी सामरिक मिसाइल प्रणालियों के लिए सटीक जवाब है। 500 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता भारत की दंडात्मक प्रतिरोध (Punitive Deterrence) नीति को मजबूती देती है।
- प्रलय की सबसे बड़ी विशेषता इसकी क्वासी-बैलिस्टिक उड़ान प्रणाली है। यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है और अंतिम चरण में अपनी दिशा बदल सकती है। इस कारण आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों, जैसे चीन की HQ-9, के लिए इसे समय रहते पहचानना और रोकना बेहद कठिन हो जाता है। इसके अंतिम चरण की अत्यधिक गति इसे मजबूत और सुरक्षित लक्ष्यों के खिलाफ भी सफल बनाती है।
- आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत विकसित प्रलय मिसाइल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण है। इसमें उपयोग की गई ठोस ईंधन मोटर, उन्नत मार्गदर्शन प्रणाली और स्वदेशी तकनीकें विदेशी निर्भरता को कम करती हैं। विशेष रूप से, इसमें प्रयुक्त भारतीय GIS प्लेटफॉर्म (INDIGIS) ट्रैजेक्टरी प्लानिंग के लिए विदेशी सैटेलाइट डेटा पर निर्भरता समाप्त करता है। इससे भारत को रणनीतिक स्वायत्तता मिलती है।
