ईरान में बढ़ती महंगाई और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के विरुद्ध प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी है। इनमें अब तक 6 आम नागरिकों और 1 सुरक्षा बल के जवान की मृत्यु हो चुकी है।
मारे गए प्रदर्शनकारियों के अंतिम संस्कार में लोगों ने ‘डेथ टू खामेनेई’ यानी खामेनेई मुर्दाबाद के नारे लगाए। प्रदर्शन अब ईरान के पवित्र शहर कोम तक फैल गए हैं। कोम शिया धर्मगुरुओं का एक प्रमुख गढ़ है।
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने राजशाही के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुईं। 1 जनवरी को 5 लोगों की जान गई। इससे पूर्व 31 दिसंबर को भी एक व्यक्ति की प्रदर्शन के दौरान गोलीबारी में मृत्यु हुई थी।
प्रदर्शन की शुरुआत
ईरान में प्रदर्शन की शुरुआत 28 दिसंबर को हुई थी। तब राजधानी तेहरान में व्यापारियों ने इसका आरंभ किया था। अब इसमें हजारों GenZ युवा भी सम्मिलित हो चुके हैं।
तेहरान में विश्वविद्यालय और व्यावसायिक क्षेत्रों में शुरू हुए ये प्रदर्शन अब अनेक शहरों में फैल चुके हैं। कई स्थानों पर बाजार बंद रहे और व्यापारी सड़कों पर उतर आए हैं।
ट्रम्प की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को ईरान को सख्त चेतावनी दी। ट्रम्प ने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या की गई तो अमेरिका कार्रवाई करने के लिए पूर्णतः तैयार है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रम्प ने लिखा, “अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाता है या उन्हें बेरहमी से मारता है, तो अमेरिका उनकी सहायता के लिए आगे आएगा। हम पूरी तरह से तैयार हैं।”
खामेनेई के सलाहकार का करारा जवाब
ट्रम्प की सैन्य हस्तक्षेप की धमकी के कुछ ही क्षणों बाद अयातुल्लाह अली खामेनेई के सलाहकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ईरानी अमेरिका के इराक, अफगानिस्तान और गाजा में “बचाव अभियानों” से भलीभांति परिचित हैं।
अयातुल्लाह के वरिष्ठ सहायक अली शमखानी ने ट्रम्प को अमेरिका की अफगानिस्तान और इराक से जल्दबाजी में वापसी की याद दिलाई।
शमखानी 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की तीव्र वापसी का उल्लेख कर रहे थे, जब दो दशकों तक मजबूत पकड़ बनाए रखने के बाद वाशिंगटन द्वारा वित्तपोषित दस लाख हथियार और सैन्य उपकरण तालिबान के लिए छोड़ दिए गए थे।
दूसरा उदाहरण शमखानी ने पिछले दशक के अंत में इराक से अमेरिकी वापसी का दिया, जिसने अंततः ISIS के उदय और 2013 से 2017 के बीच देश को तबाह करने वाले चार साल के रक्तरंजित युद्ध में योगदान दिया।
शमखानी ने ट्रम्प पर “साहसिकता” में संलग्न होने का आरोप लगाते हुए अमेरिकियों से कहा कि वे “अपने सैनिकों पर नजर रखें।”
X पर पोस्ट करते हुए खामेनेई के सलाहकार ने चेतावनी दी कि ईरान की सुरक्षा के उद्देश्य से किसी भी हस्तक्षेप का त्वरित और “पछतावे वाली” प्रतिक्रिया से सामना होगा, इससे पहले कि वह साकार हो सके।
उन्होंने कहा, “ईरानी अमेरिका के ‘बचाव’ रिकॉर्ड को अच्छी तरह जानते हैं, इराक और अफगानिस्तान से लेकर गाजा तक। बहानों पर ईरान की सुरक्षा के निकट आने वाला कोई भी हस्तक्षेप करने वाला हाथ पछतावे वाली प्रतिक्रिया के साथ काट दिया जाएगा। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा एक लाल रेखा है, साहसिक ट्वीट के लिए सामग्री नहीं।”
ईरान की संसद की धमकी
इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी की ओर से किसी भी हमले की स्थिति में उसके सैन्य अड्डों को निशाना बनाने की धमकी दी है। ईरान की संसद के अध्यक्ष ने शुक्रवार को कहा है कि यदि अमेरिका आक्रामक कदम उठाता है तो उसके सैन्य ठिकानों को वैध निशाना माना जाएगा।
इससे पहले अमेरिका, ईरान के सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं पर हमले कर चुका है। जून 2025 में ईरान-इजराइल के बीच 12 दिनों तक युद्ध हुआ था, जिसमें अमेरिका भी शामिल हो गया था।
AI का उपयोग करने का आरोप
जैसे ही ईरान के सर्वोच्च नेता की मृत्यु की मांग करने और निर्वासित नेता को अमेरिका से वापसी की मांग करने वाले नारों की रिपोर्टें प्रसारित होने लगीं, सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के ईरान के रज़वी खोरासान प्रांत में प्रतिनिधि अहमद अलामोलहोदा ने इन घटनाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके गढ़ा गया बताते हुए खारिज कर दिया।
अलामोलहोदा ने आरोप लगाया कि इजरायली मीडिया और जिसे उन्होंने “शत्रु से संबद्ध आउटलेट्स” कहा, ने भीड़ की फिल्मांकन की और फिर AI प्रौद्योगिकी का उपयोग करके दृश्यों पर सरकार विरोधी नारों को आरोपित किया।
उन्होंने कहा कि उद्देश्य यह आभास पैदा करना था कि ईरानी इस्लामिक क्रांति के विरुद्ध हो गए हैं और व्यवस्था को ध्वस्त करना चाहते हैं।
क्राउन प्रिंस की वापसी की मांग
प्रदर्शनकारी कट्टरपंथी धर्मगुरुओं के शासन की समाप्ति और राजशाही वापस लाने की मांग कर रहे हैं। इन नारों में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई पर निशाना साधा जा रहा था।
“मुल्लाओं को ईरान छोड़ना होगा” के नारों के साथ, प्रदर्शनकारियों ने “जाविद शाह” अर्थात “शाह लंबे समय तक जीवित रहें” का नारा भी लगाया।
कुछ वीडियो में लोग निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाते और उन्हें सत्ता सौंपने की मांग करते नजर आए। 47 वर्ष बाद अब वर्तमान आर्थिक विपन्नता और कठोर धार्मिक शासन से नाराज लोग परिवर्तन चाहते हैं।
65 वर्षीय क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग उठ रही है। प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मानते हैं। युवाओं और जेन जेड को लगता है कि पहलवी की वापसी से ईरान को आर्थिक स्थिरता, वैश्विक स्वीकार्यता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता मिल सकती है।
आर्थिक संकट की गंभीरता
देशभर में GenZ क्रोध में है। इसका कारण आर्थिक बदहाली रहा है। दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर लगभग 1.45 मिलियन प्रति अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई, जो अब तक का सबसे निम्न स्तर है।
वर्ष की शुरुआत से रियाल का मूल्य लगभग आधा हो चुका है। यहां महंगाई चरम पर पहुंच गई है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 72% और दवाओं की कीमतों में 50% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा 2026 के बजट में 62% कर बढ़ाने के प्रस्ताव ने आम लोगों में भारी नाराजगी उत्पन्न कर दी है।
राष्ट्रपति का आरोप
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने परिस्थिति संभालने के लिए मोर्चा संभाला है। उन्होंने इन प्रदर्शनों के लिए विदेशी हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया और देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विदेशी शक्तियां देश में फूट डालकर अपना लाभ निकालना चाहती हैं।
व्यापार घाटा और आर्थिक चुनौतियां
वर्ष 2024 में ईरान का कुल निर्यात लगभग 22.18 बिलियन डॉलर था, जिसमें तेल और पेट्रोकेमिकल्स का बड़ा हिस्सा था, जबकि आयात 34.65 बिलियन डॉलर रहा, जिससे व्यापार घाटा 12.47 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
2025 में तेल निर्यात में कमी और प्रतिबंध के कारण यह घाटा और बढ़कर 15 बिलियन डॉलर तक बढ़ा है। मुख्य व्यापारिक साझेदारों में चीन (35% निर्यात), तुर्की, UAE और इराक शामिल हैं। ईरान चीन को 90% तेल निर्यात करता है।
2025 में GDP वृद्धि केवल 0.3% रहने का अनुमान है। प्रतिबंध हटने या परमाणु समझौते की बहाली के बिना व्यापार और रियाल का मूल्य स्थिर करना कठिन रहेगा।
2022 के बाद सबसे बड़ा प्रदर्शन
ये प्रदर्शन 2022 के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं। उस समय 22 वर्ष की महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मृत्यु के बाद पूरे देश में आंदोलन भड़क गया था। उन्हें हिजाब ठीक से न पहनने के आरोप में नैतिकता पुलिस ने पकड़ा था।
इस्लामिक क्रांति
ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी सत्ता में आए। वे 1979 से 1989 तक 10 वर्ष सर्वोच्च नेता रहे। उनके बाद सर्वोच्च नेता बने अयातुल्लाह अली खामेनेई 1989 से अब तक 37 वर्षों से सत्ता में हैं।
ईरान आज आर्थिक संकट, भारी महंगाई, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, बेरोजगारी, मुद्रा गिरावट और निरंतर जन आंदोलनों जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है।
आने वाले दिनों में ये प्रदर्शन किस दिशा में जाते हैं, यह देखना होगा।
