यमन संकट: सऊदी हमले में 20 अलगाववादी मारे गए, UAE से बिगड़े संबंध, वायु हमले में भारी नुकसान

यमन में सऊदी अरब की हवाई कार्रवाई में 20 अलगाववादी लड़ाके मारे गए हैं। यह घटना शुक्रवार को दक्षिणी प्रांत हद्रामौत में घटित हुई, जहां अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के एक ठिकाने को निशाना बनाया गया। इस हमले में 20 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।

 

इस बीच यमन सरकार ने दावा किया है कि उसने सैन्य अभियान चलाकर अलगाववादी गुट से महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे वापस अपने नियंत्रण में ले लिए हैं। हद्रामौत के राज्यपाल सालेम अल-खानबाशी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बल केवल STC के कब्जे से सैन्य ठिकानों को पुनः प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।

Yemen crisis

UAE की सेना की वापसी

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब दो दिन पूर्व ही संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने यमन से अपनी सेना वापस बुलाने की घोषणा की थी। इससे पहले सऊदी अरब ने UAE को देश से बाहर निकलने के लिए 24 घंटे की अल्टीमेटम दी थी।

 

UAE ने घोषणा की है कि उसने तनाव को कम करने का प्रयास किया है और उसकी अंतिम सैन्य टुकड़ी यमन से निकल चुकी है। यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर मंगलवार को सऊदी अरब के हमले के पश्चात UAE ने सेना वापस बुलाने की घोषणा की थी।

 

STC कौन है?

सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) यमन का एक सशस्त्र अलगाववादी संगठन है, जिसे UAE का समर्थन प्राप्त है। यह संगठन यमन के दक्षिणी हिस्से को स्वतंत्र कराने के लिए संघर्ष कर रहा है। STC का उद्देश्य यमन को उत्तर और दक्षिण में विभाजित करना और दक्षिणी यमन में अलग सरकार स्थापित करना है।

यमन 1990 से पूर्व दो भागों – उत्तरी और दक्षिणी यमन – में विभाजित था। दोनों के एकीकरण के बावजूद दक्षिण में अलगाव की भावना बनी हुई है।

 

मुकल्ला बंदरगाह पर हमला

मंगलवार सुबह सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर बमबारी की थी। सऊदी अरब ने आरोप लगाया कि UAE के फुजैरा बंदरगाह से आए दो जहाजों से वहां हथियार और सैन्य वाहन उतारे जा रहे थे। इन जहाजों के ट्रैकिंग सिस्टम बंद थे।

 

सऊदी अरब का कहना है कि ये हथियार सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल को दिए जा रहे थे, जो शांति और स्थिरता के लिए खतरा बन सकते थे। इसलिए वायुसेना ने सीमित हवाई हमला कर हथियारों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाया।

 

इस बमबारी में UAE से आई एक शिपमेंट को लक्षित किया गया था, जिसमें हथियार होने का दावा किया गया। UAE ने इन आरोपों को खारिज कर दिया और बताया कि शिपमेंट में वाहन थे, किसी प्रकार के हथियार नहीं।

 

यमन के कड़े फैसले

मुकल्ला पर हुए हवाई हमले के बाद यमन सरकार ने UAE के साथ किया गया रक्षा समझौता रद्द कर दिया है।

 

इसके साथ ही सरकार ने परिस्थिति पर नियंत्रण के लिए:

  • 72 घंटे की हवाई, थल और समुद्री नाकाबंदी लागू करने
  • 90 दिनों के लिए आपातकाल घोषित करने का निर्णय लिया है

 

STC का सैन्य विस्तार

पिछले एक माह में STC ने यमन में व्यापक सैन्य अभियान चलाए थे। STC की सेनाओं ने हद्रामौत और अल-मह्रा जैसे तेल और गैस संपन्न क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया। इस कारण यमन सरकार के सुरक्षा बलों और स्थानीय कबीलों को पीछे हटना पड़ा। कई इलाकों में हिंसा और मौतों की सूचनाएं मिलीं।

 

दिसंबर के मध्य तक STC ने अनेक महत्वपूर्ण तेल और गैस क्षेत्रों पर नियंत्रण का दावा किया। दक्षिणी अबयान प्रांत में नए सैन्य अभियान की घोषणा की। 15 दिसंबर को STC ने अबयान के पर्वतीय क्षेत्रों में बड़ा हमला किया।

 

इसके प्रत्युत्तर में सऊदी अरब ने हद्रामौत के वादी नहाब क्षेत्र में चेतावनी के रूप में हवाई हमले किए। सऊदी ने स्पष्ट किया कि यदि STC पीछे नहीं हटा, तो आगे और कठोर कार्रवाई होगी। मुकल्ला बंदरगाह पर हमला उसी चेतावनी की अगली कड़ी माना जा रहा है।

 

यमन में विभिन्न सशस्त्र गुट

 

हूती विद्रोही: ये खुद को अंसार अल्लाह अर्थात अल्लाह के सहायक कहते हैं। इन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है।

 

यमनी नेशनल रेजिस्टेंस

फोर्सेज: यह बल हूती विद्रोहियों के विरुद्ध लड़ता है और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थक माना जाता है। इसे सऊदी अरब व UAE का समर्थन हासिल है।

 

हद्रामी एलीट फोर्सेज: इस बल को UAE का समर्थन प्राप्त है और इसका लक्ष्य अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करना रहा है।

 

सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल: यह संगठन दक्षिणी यमन की स्वतंत्रता की मांग करता है। इसे UAE का समर्थन मिलता है।

 

सऊदी-UAE संबंधों में खटास क्यों?

यमन युद्ध के प्रारंभिक चरण में सऊदी अरब और UAE एक साथ थे। 2014 में हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना पर अधिकार कर लिया था। हूती विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए 2015 में सऊदी के नेतृत्व में सैन्य गठबंधन बनाया गया था। UAE भी इस गठबंधन का सदस्य था।

 

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ समय पश्चात UAE ने यमन में सऊदी से भिन्न अपनी नीति अपनानी आरंभ कर दी। विशेषज्ञों का मानना है कि UAE की रुचि यमन के बंदरगाहों, समुद्री मार्गों और रणनीतिक तटीय क्षेत्रों में है। संघर्ष इन्हीं पर नियंत्रण को लेकर हो रहा है।

 

कतर की हमद बिन खलीफा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर सुल्तान बरकत के अनुसार, “UAE बंदरगाहों का विकास नहीं चाहता, बल्कि यह चाहता है कि जेबेल अली बंदरगाह संपूर्ण क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह बना रहे। ताकि क्षेत्र में UAE का प्रभुत्व बरकरार रहे।”

 

सऊदी अरब और UAE पिछले 10 वर्षों से यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ रहे हैं लेकिन वे वहां भिन्न-भिन्न गुटों का समर्थन करते हैं।

 

गृह युद्ध की पृष्ठभूमि

यमन में 2014 में गृह युद्ध प्रारंभ हुआ था। हूती विद्रोहियों ने 2014 में सऊदी के समर्थन वाली सरकार को पदच्युत कर दिया था। इसके पश्चात 2015 में सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने ईरान समर्थित हूतियों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। इस युद्ध में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो गई। इसके बाद यमन की 80% जनसंख्या मानवीय सहायता पर निर्भर हो गई।

 

यमन में गृह युद्ध की मुख्य वजह शिया और सुन्नी विवाद था। वास्तव में यमन की कुल जनसंख्या में 35% हिस्सेदारी शिया समुदाय की है जबकि 65% सुन्नी समुदाय के लोग निवास करते हैं। कार्नेगी मिडल ईस्ट सेंटर की रिपोर्ट के अनुसार दोनों समुदायों में सदैव विवाद रहा था जो 2011 में अरब क्रांति की शुरुआत के साथ गृह युद्ध में परिवर्तित हो गया।

 

शीघ्र ही हूती के नाम से प्रसिद्ध विद्रोहियों ने देश के एक विशाल हिस्से पर अधिकार कर लिया। 2015 में परिस्थिति ऐसी हो गई थी कि विद्रोहियों ने संपूर्ण सरकार को निर्वासन में जाने पर बाध्य कर दिया था।

 

वर्तमान संकट

वर्तमान में यमन में जटिल परिस्थिति है जहां:

  • सऊदी अरब और UAE, जो पहले सहयोगी थे, अब विरोधी गुटों का समर्थन कर रहे हैं
  • STC का तेल और गैस क्षेत्रों पर नियंत्रण बढ़ रहा है
  • यमन सरकार अपने क्षेत्र पुनः प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रही है
  • क्षेत्रीय शक्तियां अपने-अपने हितों के लिए विभिन्न गुटों का समर्थन कर रही हैं

 

यह संकट न केवल यमन के लिए बल्कि संपूर्ण मध्य पूर्व की स्थिरता के लिए चुनौती बनता जा रहा है।