संदर्भ :
हाल ही में रूस ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि किसी भी देश ने तथाकथित “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” के तहत अपने सैनिक यूक्रेन भेजे, तो उन्हें वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा। यह बयान रूस की ओर से अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक है, जो पश्चिमी देशों की बढ़ती भागीदारी को सीधे चुनौती देता है।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यूरोप और अमेरिका में यह बहस तेज हो रही है कि क्या यूक्रेन को केवल हथियार और वित्तीय सहायता देना पर्याप्त है, या फिर ज़मीनी स्तर पर सैनिकों की तैनाती पर भी विचार किया जाना चाहिए। रूस का यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि वह किसी भी प्रत्यक्ष सैन्य हस्तक्षेप को युद्ध का विस्तार मानेगा।
‘कोएलिशन ऑफ द विलिंग’ का अर्थ और पृष्ठभूमि :
“कोएलिशन ऑफ द विलिंग” शब्द का प्रयोग उन देशों के समूह के लिए किया जाता है, जो औपचारिक गठबंधनों से बाहर रहकर किसी साझा उद्देश्य के लिए सैन्य या रणनीतिक सहयोग करते हैं। यूक्रेन के संदर्भ में इसका अर्थ ऐसे पश्चिमी देशों से है, जो नाटो के औपचारिक निर्णय के बिना भी यूक्रेन में सैनिक भेजने पर विचार कर सकते हैं।
अब तक पश्चिमी देशों ने यूक्रेन को हथियार, प्रशिक्षण, खुफिया जानकारी और आर्थिक सहायता दी है, लेकिन सीधे सैनिक भेजने से बचते रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह रहा है कि रूस के साथ प्रत्यक्ष टकराव की स्थिति में युद्ध यूरोप से बाहर फैल सकता है। रूस की ताज़ा चेतावनी इसी आशंका को और गहरा करती है।
रूस का कहना है कि यदि कोई विदेशी सैनिक यूक्रेन की ज़मीन पर तैनात होता है, तो वह उसकी दृष्टि में “शांतिरक्षक” या “सहयोगी” नहीं, बल्कि युद्ध में शामिल पक्ष होगा। ऐसे में रूस उन्हें निशाना बनाने से नहीं हिचकेगा।
रूस की रणनीतिक सोच और चेतावनी का संदेश :
रूस की यह चेतावनी केवल सैन्य बयान नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी रणनीतिक सोच छिपी है। पहला उद्देश्य पश्चिमी देशों को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखना है, ताकि वे किसी भी तरह की प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी से पहले सौ बार सोचें। दूसरा, यह रूस के घरेलू दर्शकों के लिए भी एक संदेश है कि मॉस्को अपने सुरक्षा हितों से समझौता नहीं करेगा।
रूसी नेतृत्व का तर्क है कि यूक्रेन में विदेशी सैनिकों की तैनाती रूस की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा होगी। रूस लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि पश्चिम यूक्रेन को मोहरे की तरह इस्तेमाल कर रहा है। ऐसे में यह चेतावनी पश्चिम के लिए एक “रेड लाइन” खींचने जैसा कदम है।
इसके साथ ही, यह बयान परमाणु शक्ति संतुलन के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। रूस अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दे रहा है कि यदि संघर्ष बहुत अधिक बढ़ा, तो इसके परिणाम केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेंगे। हालांकि रूस ने सीधे परमाणु हथियारों का उल्लेख नहीं किया, लेकिन उसकी भाषा में निहित गंभीरता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
पश्चिमी देशों की दुविधा और वैश्विक असर :
रूस की चेतावनी के बाद पश्चिमी देशों के सामने एक कठिन दुविधा खड़ी हो गई है। एक ओर वे यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करते हैं, दूसरी ओर वे रूस के साथ सीधे युद्ध में उलझने से बचना चाहते हैं।
यदि कोई देश अपने सैनिक भेजता है, तो यह युद्ध को एक नए चरण में ले जा सकता है, जहां संघर्ष केवल यूक्रेन तक सीमित न रहकर पूरे यूरोप को प्रभावित कर सकता है। ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पहले से ही इस युद्ध से प्रभावित हैं। सैनिकों की तैनाती इन समस्याओं को और गंभीर बना सकती है।
विकासशील देशों के लिए भी इसका असर कम नहीं होगा। तेल और गैस की कीमतें, खाद्यान्न आपूर्ति और वैश्विक वित्तीय अस्थिरता जैसे मुद्दे सीधे तौर पर आम जनता को प्रभावित करेंगे। यही कारण है कि कई देश खुले तौर पर किसी भी सैन्य विस्तार के खिलाफ हैं और कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं।
यूक्रेन की स्थिति और सीमित विकल्प :
यूक्रेन के लिए यह स्थिति अत्यंत जटिल है। एक ओर उसे रूस के खिलाफ सैन्य सहायता की आवश्यकता है, दूसरी ओर वह नहीं चाहता कि उसका देश एक बड़े वैश्विक युद्ध का केंद्र बन जाए। यूक्रेन नेतृत्व बार-बार यह कह चुका है कि उसे अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन चाहिए, लेकिन वह यह भी समझता है कि विदेशी सैनिकों की तैनाती संघर्ष को और खतरनाक बना सकती है।
निष्कर्ष :
रूस द्वारा “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” के तहत यूक्रेन भेजे गए किसी भी विदेशी सैनिक को निशाना बनाने की चेतावनी यूक्रेन युद्ध में एक निर्णायक मोड़ का संकेत है। यह बयान बताता है कि संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक शक्ति राजनीति का केंद्र बन चुका है।
भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि पश्चिमी देश इस चेतावनी को किस हद तक गंभीरता से लेते हैं और कूटनीति को कितना अवसर दिया जाता है। यदि संयम और संवाद का रास्ता नहीं अपनाया गया, तो यह युद्ध न केवल यूरोप, बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता और शांति के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।
प्रश्न :
रूस–यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में हाल ही में चर्चा में रहे “Coalition of the Willing” के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह उन देशों के समूह को दर्शाता है जो किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन के बाहर रहकर साझा सैन्य उद्देश्य के लिए कार्य करते हैं।
- यूक्रेन के संदर्भ में यह शब्द उन पश्चिमी देशों के लिए प्रयुक्त हुआ है जो नाटो की औपचारिक मंजूरी के बिना भी यूक्रेन में सैनिक भेजने पर विचार कर सकते हैं।
- रूस ने कहा है कि ऐसे किसी भी विदेशी सैनिक को यूक्रेन में वैध सैन्य लक्ष्य माना जाएगा।
- “Coalition of the Willing” संयुक्त राष्ट्र द्वारा अधिकृत शांति मिशन है।
उपरोक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
- केवल 1 और 2
- केवल 1, 2 और 3
- केवल 2 और 4
- 1, 2, 3 और 4
प्रश्न (GS-II – अंतरराष्ट्रीय संबंध)
यूक्रेन में “Coalition of the Willing” के तहत विदेशी सैनिकों की संभावित तैनाती पर रूस की चेतावनी दर्शाती है कि यह युद्ध अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है। इस कथन के आलोक में रूस–यूक्रेन युद्ध के वैश्विक प्रभाव, परमाणु शक्ति संतुलन और कूटनीति की सीमाओं पर चर्चा कीजिए। (250 शब्द
