US ने भारत को वेनेजुएला क्रूड खरीदने की मंजूरी दी, वाशिंगटन-कंट्रोल्ड सिस्टम में, रूसी तेल कटौती के बीच नया विकल्प

ट्रम्प प्रशासन ने एक अहम फैसला लेते हुए भारत को वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने की इजाजत देने का संकेत दिया है। हालांकि यह खरीदारी अमेरिकी सरकार की देखरेख में होगी। इस कदम से अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते बंद हुआ व्यापार फिर से शुरू हो सकता है।

 

भारत की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए फैसला

ट्रम्प प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत की विशाल और लगातार बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए वेनेजुएला से पेट्रोलियम की खरीद पुनः शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है। अधिकारी ने कहा कि अन्य विवरणों पर अभी काम जारी है।

 

भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी 88-89% तेल आवश्यकता आयात के माध्यम से पूरी करता है। 2025 में भारत का तेल उपभोग लगभग 5.74 मिलियन बैरल प्रतिदिन है, जो 2026 में 5.99 मिलियन बैरल तक पहुंचने का अनुमान है।

US allows India to buy Venezuelan crude in Washington-controlled system

अमेरिकी नियंत्रण में होगी बिक्री

अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस्टोफर राइट ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि वेनेजुएला का तेल लगभग सभी देशों को बेचा जा सकता है, परंतु यह पूरी तरह अमेरिकी सरकार के नियंत्रण में रहेगा। फॉक्स बिजनेस को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “हम तेल को पुनः वैश्विक बाजार के लिए खोल रहे हैं, लेकिन इसे अमेरिकी सरकार बेचेगी और मुनाफा अमेरिकी सरकार के खाते में जाएगा।”

 

ट्रम्प ने तेल दिग्गजों से की बैठक

राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस में विश्व की प्रमुख तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में एक्सॉन मोबिल, कोनोकोफिलिप्स और शेवरॉन जैसी दिग्गज अमेरिकी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। ट्रम्प ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में करीब 9 लाख करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा।

 

ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि अमेरिका यह तय करेगा कि कौन सी कंपनियां वेनेजुएला में जाकर निवेश करेंगी। शेवरॉन के उपाध्यक्ष मार्क नेल्सन ने वेनेजुएला में निवेश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई और बताया कि कंपनी वहां अभी भी सक्रिय है।

 

मुनाफे का बंटवारा तीनों के बीच

राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा, “कंपनियों को निवेश करना होगा और उनका धन शीघ्र वापस मिलना चाहिए। फिर लाभ को वेनेजुएला, अमेरिका और कंपनियों के बीच विभाजित किया जाएगा। मुझे लगता है यह सरल है और मेरे पास इसका फॉर्मूला है।” इस योजना पर वार्ता जारी है।

 

हालांकि, एक्सॉन मोबिल के सीईओ डैरेन वुड्स ने कहा कि फिलहाल वेनेजुएला “निवेश योग्य नहीं” है क्योंकि कंपनी की संपत्तियां वहां दो बार जब्त की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और वेनेजुएला सरकार के साथ मिलकर बड़े परिवर्तन लाने पर ही कंपनी वापसी पर विचार करेगी।

 

वेनेजुएला देगा 3-5 करोड़ बैरल तेल

ट्रम्प ने पहले बताया था कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति अमेरिका को 3 से 5 करोड़ बैरल प्रतिबंधित तेल सौंपेंगी। यह तेल बाजार मूल्य पर बेचा जाएगा और मिलने वाली राशि पर ट्रम्प का नियंत्रण रहेगा। वर्तमान में 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल की कीमत करीब 25 हजार करोड़ रुपये है।

 

ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने ऊर्जा मंत्री को इस योजना को तत्काल लागू करने का निर्देश दिया है। तेल को स्टोरेज जहाजों के माध्यम से सीधे अमेरिकी बंदरगाहों तक लाया जाएगा।

 

विश्व का सबसे बड़ा भंडार, फिर भी केवल 1% आपूर्ति

वेनेजुएला पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) का सदस्य है और उसके पास विश्व का सबसे विशाल तेल भंडार है। फिर भी वह वैश्विक आपूर्ति का मात्र 1% हिस्सा देता है। 1970 के दशक में वहां उत्पादन 35 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जो वर्तमान स्तर से तीन गुना अधिक है।

 

2019 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों का लक्ष्य वेनेजुएला की तेल कंपनी पीडीवीएसए थी, जिससे तेल निर्यात लगभग ठप हो गया। अमेरिका ने द्वितीयक प्रतिबंध भी लगाए, यानी कोई भी देश या कंपनी वेनेजुएला से तेल खरीदती है तो उसे अमेरिकी बाजार में व्यापार करने या बैंकिंग सुविधाओं से वंचित किया जा सकता था।

 

भारत पर प्रतिबंधों का प्रभाव

द्वितीयक प्रतिबंधों के कारण भारत के लिए वेनेजुएला से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदना अत्यंत कठिन हो गया। 2010 के दशक में भारत वेनेजुएला का प्रमुख ग्राहक था। उस समय भारत रोजाना लाखों बैरल वेनेजुएला का हेवी क्रूड खरीदता था, जो रिलायंस और अन्य भारतीय रिफाइनरियों के लिए उपयुक्त था।

 

2018 में वेनेजुएला भारत के कुल क्रूड आयात का लगभग 6.7% हिस्सा था और शीर्ष 6 आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। लेकिन 2019 के बाद प्रतिबंधों के कारण आयात तेजी से घटा। 2021 में यह हिस्सा केवल 1.1% रह गया और 2022-2023 में लगभग शून्य हो गया।

 

रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों ने खरीदारी रोक दी क्योंकि अनुपालन जोखिम, भुगतान की समस्याएं, शिपिंग की कठिनाइयां और अमेरिकी दंड का खतरा अत्यधिक बढ़ गया था।

 

2023-2024 में अमेरिका ने आंशिक रूप से प्रतिबंध ढीले किए, जिससे भारत ने पुनः थोड़ा तेल खरीदा। 2024 में यह औसतन 63,000 से 100,000 बैरल प्रतिदिन तक पहुंचा और 2025 में आयात बढ़कर 1.41 बिलियन डॉलर तक पहुंचा। लेकिन 2025 के मध्य में फिर सख्ती आने से आयात रुक गया। 2025 के अंत और 2026 की शुरुआत में वेनेजुएला से भारत का क्रूड आयात मात्र 0.3% रह गया।

 

राष्ट्रीयकरण का विवाद

ट्रम्प का दावा है कि वेनेजुएला ने अमेरिकी कंपनियों के तेल अधिकार अवैध रूप से छीन लिए थे। वास्तव में 1976 में राष्ट्रपति कार्लोस आंद्रेस पेरेज के समय वेनेजुएला ने संपूर्ण तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था।

 

इसका अर्थ था कि विदेशी तेल कंपनियां (अधिकांश अमेरिकी, जैसे एक्सॉन, गल्फ ऑयल, मोबिल आदि) जो दशकों से वहां तेल निकाल रही थीं, उनके सभी संचालन और संपत्तियां वेनेजुएला की नई सरकारी कंपनी पीडीवीएसए के पास चली गईं। यह राष्ट्रीयकरण कानूनी तरीके से हुआ और कंपनियों को मुआवजा भी दिया गया, हालांकि कुछ कंपनियां इससे संतुष्ट नहीं थीं।

 

अब भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तेल के वैकल्पिक स्रोत तलाश रहा है। अमेरिकी निगरानी में वेनेजुएला से तेल खरीदने की यह नई व्यवस्था भारत के लिए राहत साबित हो सकती है।