भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक अहम मोड़ आने वाला है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की दिशा में बड़ी राहत मिल सकती है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने संकेत दिए हैं कि नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी करने का काम अंतिम चरण में है और यह प्रक्रिया चालू महीने में ही पूरी हो सकती है।
शनिवार को चेन्नई में मीडिया से बातचीत करते हुए पांडे ने कहा कि रेगुलेटर एनओसी देने के काफी एडवांस स्टेज पर पहुंच चुका है। हालांकि, उन्होंने कोई निश्चित समयसीमा बताने से परहेज किया। यह मंजूरी मिलते ही एक्सचेंज अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को दाखिल करने की औपचारिकताएं शुरू कर सकेगा।
2016 से अटकी हुई है IPO की प्रक्रिया
NSE ने सबसे पहले दिसंबर 2016 में अपने पब्लिक इश्यू के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज सेबी के पास जमा किए थे। उस समय एक्सचेंज लगभग 10,000 करोड़ रुपए की पूंजी जुटाने की योजना बना रहा था। लेकिन इसी बीच ‘को-लोकेशन’ नामक एक बड़ा विवाद सामने आ गया, जिसने पूरी प्रक्रिया को ठप कर दिया।
को-लोकेशन घोटाले में आरोप लगे थे कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को NSE के एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म तक विशेष पहुंच दी गई थी। इससे उन्हें अन्य निवेशकों की तुलना में तेज गति से ट्रेड करने का अनुचित लाभ मिला, जिसके जरिए उन्होंने करोड़ों रुपए का गलत मुनाफा कमाया।
इस गंभीर आरोप और उसके बाद चली लंबी कानूनी कार्रवाई के चलते सेबी ने IPO पर रोक लगा दी थी। पिछले साल अगस्त 2024 में NSE ने एक बार फिर से नए सिरे से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया।
643 करोड़ की पेनल्टी चुकाकर सुलझाया विवाद
अपने IPO की राह को साफ करने के लिए NSE ने पिछले कुछ महीनों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अक्टूबर 2024 में एक्सचेंज ने ‘ट्रेडिंग एक्सेस पॉइंट’ (TAP) आर्किटेक्चर और नेटवर्क कनेक्टिविटी से संबंधित मामले का निपटारा करने के लिए सेबी को 643 करोड़ रुपए का जुर्माना अदा किया।
यह केस उन कमियों से जुड़ा था जहां कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स सिस्टम एक्सेस का दुरुपयोग कर रहे थे। इसके अलावा, को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े पुराने मामलों के समाधान के लिए एक्सचेंज ने अलग से करीब 1,300 करोड़ रुपए का प्रावधान भी रखा है।
प्रबंधन और बोर्ड में किए गए व्यापक बदलाव
सेबी चेयरमैन पांडे ने बताया कि NSE ने रेगुलेटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कई सुधारात्मक उपाय किए हैं। इनमें वरिष्ठ प्रबंधन में बदलाव, बोर्ड का पुनर्गठन, अनुपालन ढांचे को मजबूत करना और पुराने नियामकीय मामलों का निपटारा शामिल है। इन सभी कदमों ने सेबी के विश्वास को मजबूत किया है।
अगले संवत तक लिस्टिंग की संभावना
NSE के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने हाल ही में अपनी आशा व्यक्त की थी कि नए संवत 2082 तक एक्सचेंज दलाल स्ट्रीट पर सूचीबद्ध हो जाएगा। सेबी से एनओसी मिलने के उपरांत NSE को नया ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस तैयार करके फाइल करना होगा।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि NSE का IPO भारत के अब तक के सबसे विशाल सार्वजनिक निर्गमों में से एक साबित हो सकता है। एक्सचेंज की विशाल मार्केट वैल्यूएशन को देखते हुए यह इश्यू काफी चर्चा में रहेगा।
विश्व का सर्वाधिक सक्रिय डेरिवेटिव एक्सचेंज
NSE केवल भारत का सबसे विशाल स्टॉक एक्सचेंज ही नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक सक्रिय डेरिवेटिव एक्सचेंज भी है। पिछले कुछ वर्षों में देश के शेयर बाजार में खुदरा निवेशकों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है, जिसका सीधा लाभ NSE के राजस्व और लाभ में परिलक्षित हुआ है। वित्त वर्ष 2026 की प्रथम छमाही में NSE का शुद्ध लाभ लगभग 6,320 करोड़ रुपए रहा है।
सेबी की अन्य पहलें
पांडे ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सेबी के प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेगुलेटर सोशल मीडिया पर प्रतिभूति बाजार से संबंधित उल्लंघनों की सक्रिय निगरानी कर रहा है। जहां भी गलत जानकारी मिलती है, वहां प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट हटवाया जा रहा है। हाल के महीनों में 1 लाख से अधिक टेकडाउन किए जा चुके हैं।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ‘AI सुदर्शन’ है – यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल है जो ऑनलाइन भ्रामक या अवैध बाजार संबंधी सामग्री की पहचान करता है और त्वरित कार्रवाई में मदद करता है।
निवेशक सुरक्षा के लिए ‘सेबीचेक’ टूल
सेबी के नाम और लोगो के दुरुपयोग से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि को देखते हुए, पांडे ने बताया कि रेगुलेटर ने राज्यों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया है। सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को पत्र लिखकर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का अनुरोध किया गया है।
निवेशक संरक्षण के उपायों के तहत सेबी ने ‘सेबीचेक’ नामक सत्यापन टूल भी लॉन्च किया है। यह निवेशकों को 30 सेकंड के भीतर यह जांचने की सुविधा देता है कि कोई बैंक खाता, UPI हैंडल या QR कोड प्रतिभूति बाजार लेनदेन के लिए अधिकृत है या नहीं। यह टूल 1 अक्टूबर 2025 से सेबी की मोबाइल एप्लिकेशन और वेबसाइट पर उपलब्ध है।
पांडे ने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि यदि धन धोखाधड़ी वाले खातों में भेजा जाता है, तो निवेशकों को कोई सुरक्षा नहीं मिलती। उन्होंने जोर देकर कहा कि जागरूकता बेहद जरूरी है और निवेशकों को पैसे ट्रांसफर करने से पहले सेबीचेक का उपयोग अवश्य करना चाहिए।
