आतंकी नेटवर्क में नाम आने के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी अलर्ट मोड पर, क्या अब बिना पुलिस जांच नहीं मिलेगा एडमिशन?

दिल्ली के लाल किला विस्फोट से जुड़े आतंकी नेटवर्क में नाम आने के बाद फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने अपनी प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब हर छात्र और कर्मचारी को संस्थान से जुड़ने से पहले अनिवार्य रूप से पुलिस सत्यापन से गुजरना होगा।

 

तीन पुलिस टीमें कर रही निगरानी

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए पुलिस ने तीन विशेष टीमों का गठन किया है। ये टीमें यूनिवर्सिटी में नियुक्त होने वाले स्टाफ सदस्यों और प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर नजर रख रही हैं।

 

डीसीपी एनआईटी मकसूद अहमद ने बताया, “यूनिवर्सिटी की प्रवेश प्रक्रिया और कर्मचारी भर्ती को लेकर इस बार पुलिस पूर्णतया सतर्क है। हमारी तीन टीमें इस संपूर्ण कार्यवाही पर नजर बनाए हुए हैं। दाखिला लेने से पूर्व विद्यार्थी की संपूर्ण जानकारी एकत्र की जाएगी और संबंधित थाने से भी पूरा विवरण प्राप्त किया जाएगा।”

Al-Falah University on alert

10 नवंबर के विस्फोट से जुड़ा मामला

याद रहे कि इसी यूनिवर्सिटी से संबद्ध डॉ. उमर नबी ने 10 नवंबर को आत्मघाती हमलावर बनकर दिल्ली के लाल किले के बाहर विस्फोट को अंजाम दिया था, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने यूनिवर्सिटी के दो चिकित्सकों शाहीन सईद और डॉ. मुजम्मिल को हिरासत में लिया था।

 

प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव

 

ऑनलाइन पंजीकरण की निगरानी: यूनिवर्सिटी में बीएससी सहित विभिन्न डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। विद्यार्थियों को पहले यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा, फिर उन्हें कॉल करके बुलाया जाएगा। जो भी विद्यार्थी प्रवेश के लिए आ रहा है, उसकी पूरी जानकारी यूनिवर्सिटी के साथ-साथ पुलिस भी अपने पास रख रही है।

 

अनिवार्य सत्यापन: दाखिला लेने वाले प्रत्येक छात्र को पुलिस सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य होगा। अन्य राज्यों से आने वाले विद्यार्थियों के मामले में संबंधित राज्य की पुलिस से भी सहायता ली जाएगी।

 

कर्मचारी भर्ती में भी सख्ती

यूनिवर्सिटी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि दिल्ली विस्फोट के बाद आतंकी नेटवर्क में शामिल चिकित्सकों की गिरफ्तारी के पश्चात जांच एजेंसियों ने लगातार स्टाफ से पूछताछ की। इससे परेशान होकर मेडिकल और अन्य विभागों के कुछ कर्मचारी इस्तीफा दे चुके हैं। कर्मचारियों की कमी पूरी करने के लिए नई भर्ती की योजना है, लेकिन नए स्टाफ को भी पुलिस सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा।

 

प्रवेश के लिए संघर्ष

सूत्रों ने यह भी खुलासा किया कि आतंकवादी मॉड्यूल में नाम आने से यूनिवर्सिटी की छवि खराब हुई है। नए प्रवेश लाने के लिए प्रबंधन को काफी प्रयास करने पड़ रहे हैं। प्रवेश के लिए सहायक प्रोफेसरों और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को भी ड्यूटी दी गई है। उन्हें लोगों तक पहुंचकर यूनिवर्सिटी की छवि सुधारने के प्रयास करने को कहा गया है।

 

एमबीबीएस फाइनल वर्ष के छात्र शोभित ने कहा, “पहले जिस तरह से विद्यार्थी यहां आवेदन करने में रुचि दिखाते थे, इस बार वैसा नहीं है। दिल्ली विस्फोट के बाद सभी इस यूनिवर्सिटी का नाम अपने साथ जोड़ने से डरते हैं। जब हम यहां से अन्य जगह जाएंगे तो हमें भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।”

 

अल्पसंख्यक दर्जे पर सुनवाई

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) में यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक कोटे को लेकर 28 जनवरी को सुनवाई होनी है। इससे पूर्व 4 दिसंबर को NCMEI के दिल्ली मुख्यालय में सुनवाई हुई थी।

 

यह सुनवाई आयोग द्वारा 24 नवंबर को यूनिवर्सिटी को जारी नोटिस पर आधारित थी। नोटिस में प्रश्न किया गया था कि जब इसके चिकित्सकों की 10 नवंबर को हुए विस्फोट में भूमिका को लेकर जांच चल रही है, जिसमें 15 लोग मारे गए, तो इसका अल्पसंख्यक दर्जा क्यों न रद्द कर दिया जाए।

 

4 दिसंबर की सुनवाई में यूनिवर्सिटी की ओर से वकील मोहम्मद आरिफ उपस्थित हुए थे। हरियाणा विभाग के प्रमुख सचिव नहीं पहुंचे थे, जिसके कारण आयोग ने अगली सुनवाई तक या उससे पहले जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस जारी किया है।

 

भविष्य की चुनौतियां

यूनिवर्सिटी के सामने अब दोहरी चुनौती है – एक ओर अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पाना और दूसरी ओर सुरक्षा एजेंसियों के सख्त नियमों का पालन करना। यह देखना होगा कि क्या ये नए उपाय संस्थान की विश्वसनीयता बहाल करने में सफल होंगे।