रूस में 146 साल का रिकॉर्ड टूटा! मॉस्को-कामचटका में भीषण बर्फबारी, कामचटका में महीनों की स्नो कुछ दिनों में – जलवायु परिवर्तन का चेतावनी संकेत

संदर्भ :

रूस इस समय अपनी आधुनिक जलवायु इतिहास की सबसे भीषण सर्दियों में से एक का सामना कर रहा है। देश के राष्ट्रीय मौसम विभाग के अनुसार, इस वर्ष हुई बर्फबारी ने 146 वर्षों का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। राजधानी मॉस्को सहित कई क्षेत्रों में मोटी बर्फ की परत जम चुकी है। विशेष रूप से रूस के सुदूर पूर्व में स्थित कामचटका प्रायद्वीप में स्थिति असाधारण बनी हुई है, जहाँ कुछ ही दिनों में कई महीनों के बराबर बर्फ गिर चुकी है।

 

यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक जलवायु पैटर्न और चरम मौसम की बढ़ती प्रवृत्ति का संकेत देती है।

Heavy snowfall in Moscow and Kamchatka

कामचटका और रूस के अन्य हिस्सों में स्थिति कितनी गंभीर है?

कामचटका प्रायद्वीप अपनी सक्रिय ज्वालामुखियों, कठोर मौसम और लंबी सर्दियों के लिए जाना जाता है। यहाँ के लोग भारी बर्फबारी के आदी हैं, लेकिन इस बार हालात सामान्य से कहीं अधिक गंभीर हैं।

 

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कई शहरों और कस्बों में घरों के दरवाजे पूरी तरह बर्फ से ढक गए हैं। सड़कों पर खड़े वाहन लगभग पूरी तरह बर्फ में दब चुके हैं। लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने के लिए बर्फ में सुरंगें खोदनी पड़ रही हैं।

 

रूस के अन्य हिस्सों, विशेषकर मॉस्को और उसके आसपास के क्षेत्रों में भी लगातार और घनी बर्फबारी देखी गई है। यातायात बाधित हुआ है, उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं और रेल व सड़क परिवहन पर भारी असर पड़ा है।

 

बर्फबारी के पीछे मुख्य कारण क्या हैं?

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस असामान्य बर्फबारी के पीछे कई प्राकृतिक और भौगोलिक कारण एक साथ सक्रिय हुए हैं।

 

सबसे प्रमुख कारण प्रशांत महासागर के ऊपर लगातार बन रहे चक्रवाती तंत्र हैं। ये चक्रवात बड़ी मात्रा में नमी अपने साथ लाते हैं। जब यह नमी कामचटका जैसे अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों की हवाओं से टकराती है, तो वह भारी बर्फ में बदल जाती है।

 

इसके अलावा, कामचटका की भौगोलिक स्थिति भी इस स्थिति को और गंभीर बनाती है। यह क्षेत्र प्रशांत महासागर और ओखोत्स्क सागर के बीच स्थित है। यहाँ की पर्वत श्रृंखलाएँ नम हवाओं को तेजी से ऊपर उठने के लिए मजबूर करती हैं, जिससे ओरोग्राफिक प्रभाव के कारण बर्फबारी और तेज हो जाती है।

 

इस सर्दी में तूफानों के बीच अंतर बहुत कम रहा। एक तूफान के जाते ही दूसरा आ गया, जिससे पहले गिरी बर्फ के पिघलने या बैठने का समय ही नहीं मिला।

 

जनजीवन पर गहरा असर

रिकॉर्ड बर्फबारी ने आम लोगों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई इलाकों में कस्बों और गांवों को जोड़ने वाली सड़कें बंद कर दी गई हैं। हवाई सेवाएँ बार-बार बाधित हुई हैं और सार्वजनिक परिवहन को कुछ स्थानों पर पूरी तरह रोकना पड़ा है।

 

आपातकालीन सेवाएँ लगातार घरों की छतों से बर्फ हटाने में लगी हैं ताकि इमारतों को ढहने से बचाया जा सके। तेज हवाओं के साथ भारी बर्फ गिरने से बिजली लाइनों को नुकसान पहुँचा है, जिससे कई क्षेत्रों में बिजली गुल हो गई।

 

स्कूलों और सरकारी कार्यालयों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने और घरों में सुरक्षित रहने की अपील की है।

 

क्या जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार है?

वैज्ञानिक अब इस बात पर सहमत होते जा रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन ने इस असामान्य बर्फबारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण महासागर पहले से अधिक गर्म हो रहे हैं। गर्म महासागर अधिक नमी को अपने भीतर समाहित कर सकते हैं। जब यह नमी ठंडे क्षेत्रों तक पहुँचती है, तो वह अत्यधिक वर्षा या बर्फबारी का रूप ले लेती है।

 

इसका अर्थ यह है कि जलवायु परिवर्तन केवल गर्मी और सूखे की घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अत्यधिक सर्दी, भारी बर्फबारी और तीव्र तूफानों को भी जन्म दे रहा है।

 

कामचटका जैसे क्षेत्रों में, जहाँ पहले से ही अत्यधिक ठंड होती है, बढ़ी हुई नमी ने बर्फबारी को और अधिक तीव्र बना दिया है।

 

वैश्विक संदर्भ में रूस की बर्फबारी

रूस में हो रही यह रिकॉर्ड बर्फबारी दुनिया के अन्य हिस्सों में दिख रहे चरम मौसम के अनुरूप है। कहीं रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, कहीं सूखा और कहीं अभूतपूर्व बर्फबारी-ये सभी घटनाएँ इस बात का संकेत हैं कि वैश्विक मौसम प्रणाली अस्थिर हो रही है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ अधिक बार और अधिक तीव्रता के साथ देखने को मिल सकती हैं। इससे बुनियादी ढाँचे, अर्थव्यवस्था और मानव सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

 

प्रशासन और आपदा प्रबंधन की भूमिका

रूसी प्रशासन ने आपातकालीन सेवाओं को चौबीसों घंटे सक्रिय कर दिया है। बर्फ हटाने के लिए भारी मशीनरी तैनात की गई है और प्राथमिकता के आधार पर अस्पतालों, स्कूलों और आवश्यक सेवाओं को जोड़ा जा रहा है।

 

हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं होगी। दीर्घकालिक योजना, मजबूत बुनियादी ढाँचा और जलवायु अनुकूल नीतियाँ आवश्यक होंगी।

 

स्थानीय लोगों के लिए सबक

कामचटका के निवासियों के लिए यह सर्दी एक चेतावनी की तरह है कि मौसम अब पहले जितना अनुमानित नहीं रहा। पीढ़ियों से कठोर सर्दियों में रहने के आदी लोग भी इस बार की बर्फबारी से चकित हैं।

 

यह स्थिति दिखाती है कि प्राकृतिक आपदाएँ केवल विकासशील देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विकसित और संसाधन-संपन्न देश भी इनके सामने असहाय हो सकते हैं।

 

निष्कर्ष :

रूस में 146 साल का रिकॉर्ड तोड़ने वाली यह बर्फबारी केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक जलवायु तंत्र का स्पष्ट संकेत है। कामचटका प्रायद्वीप में देखी गई अत्यधिक बर्फबारी यह दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव बहुआयामी हैं-वे गर्मी ही नहीं, बल्कि अत्यधिक सर्दी और भारी हिमपात के रूप में भी सामने आ सकते हैं।

 

भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए वैज्ञानिक समझ, प्रभावी प्रशासन और वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के ठोस प्रयास अनिवार्य होंगे।

 

 प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न:

रूस में हाल की रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत महासागर और ओखोत्स्क सागर के बीच स्थित है।
  2. भारी बर्फबारी का एक कारण गर्म महासागरों द्वारा अधिक नमी का धारण करना है।
  3. जलवायु परिवर्तन केवल गर्मी और सूखे की घटनाओं को प्रभावित करता है।

सही कथनों का चयन कीजिए:

(a) केवल 1 और 2

(b) केवल 2 और 3

(c) केवल 1 और 3

(d) 1, 2 और 3

सही उत्तर : (a)

UPSC मुख्य परीक्षा प्रश्न (सामान्य अध्ययन – I / III)

प्रश्न :
रूस में हाल की रिकॉर्ड तोड़ बर्फबारी ने चरम मौसम की बढ़ती घटनाओं को उजागर किया है।  इस संदर्भ में भारी बर्फबारी के भौगोलिक कारणों और जलवायु परिवर्तन की भूमिका की व्याख्या कीजिए।