पूर्वी यूरोप में खालिस्तानी उग्रवादियों की बढ़ती गतिविधियों के बीच क्रोएशिया की राजधानी जाग्रेब स्थित भारतीय दूतावास पर हमले की घटना ने भारत सरकार को कड़ा रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है। बृहस्पतिवार को भारत ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया और क्रोएशियाई प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
घटना का विवरण
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारत विरोधी तत्वों ने जाग्रेब में भारतीय मिशन परिसर में अनधिकृत रूप से प्रवेश किया और तोड़फोड़ की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) से जुड़े असामाजिक तत्वों ने दूतावास की सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन किया।
मौके पर मौजूद अधिकारियों के अनुसार, उपद्रवियों ने दूतावास की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखे और भारतीय तिरंगे को हटाकर उसके स्थान पर तथाकथित खालिस्तानी झंडा लगाने का प्रयास किया। यह घटना 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस से ठीक पहले हुई, जब यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता भारत की यात्रा पर आने वाले हैं।
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय ने एक सख्त बयान जारी करते हुए कहा, “हम क्रोएशिया के जाग्रेब में हमारे दूतावास में भारत विरोधी तत्वों द्वारा अनधिकृत प्रवेश और तोड़फोड़ की घटना की कड़ी निंदा करते हैं।”
मंत्रालय ने इन कृत्यों को “निंदनीय और अवैध” बताया तथा क्रोएशियाई अधिकारियों से दोषियों को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया।
विएना संधि का उल्लंघन
भारत ने क्रोएशिया को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों की याद दिलाई और जोर देकर कहा कि राजनयिक परिसर ऐसे कृत्यों से संरक्षित हैं।
विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया, “विएना संधि के तहत राजनयिक परिसर अहस्तक्षेपणीय हैं और उनकी रक्षा की जानी चाहिए।” भारत ने नई दिल्ली और जाग्रेब दोनों जगह क्रोएशियाई अधिकारियों के समक्ष यह मामला “मजबूती से” उठाया है।
भारत ने मेजबान देश से कहा है कि वह इसमें शामिल लोगों की पहचान करे और राजनयिक मानदंडों के उल्लंघन के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराए।
उग्रवादी गतिविधियों पर व्यापक चेतावनी
मंत्रालय ने एक व्यापक चेतावनी जारी करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं अन्य स्थानों पर इसी तरह के कृत्यों में शामिल उग्रवादी समूहों के इरादे और स्वभाव को उजागर करती हैं।
बयान में कहा गया, “इस तरह की कार्रवाइयां इनके पीछे के लोगों के चरित्र और उद्देश्यों के बारे में भी बोलती हैं, और हर जगह के कानून प्रवर्तन अधिकारियों को इनका संज्ञान लेना चाहिए।”
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वे क्रोएशियाई प्रशासन से दूतावास के आसपास सुरक्षा बढ़ाने और किसी भी पुनरावृत्ति को रोकने की अपेक्षा करते हैं।
‘फाइव आईज’ से परे विस्तार
यह घटना विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि अब तक खालिस्तानी गतिविधियां मुख्यतः ‘फाइव आईज’ देशों – कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक सीमित थीं। क्रोएशिया जैसे यूरोपीय संघ के सदस्य देश में ऐसा हमला यह दर्शाता है कि ये आतंकवादी समूह नए ठिकानों पर अपना नेटवर्क फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
खुफिया एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार, SFJ के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत के विरुद्ध माहौल बनाने के लिए अपने समर्थकों को उकसाया है। यह रणनीतिक समय चुनना भारत के राष्ट्रीय पर्व को बदनाम करने का स्पष्ट प्रयास है।
क्रोएशिया: भौगोलिक और राजनीतिक परिचय
स्थान: क्रोएशिया (गणराज्य क्रोएशिया) मध्य और दक्षिण-पूर्व यूरोप के संगम पर एड्रियाटिक सागर के किनारे स्थित है।
सीमाएं: यह स्लोवेनिया, हंगरी, सर्बिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, मोंटेनेग्रो के साथ भूमि सीमा और इटली के साथ समुद्री सीमा साझा करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: ऐतिहासिक रूप से, क्रोएशिया 1991 में स्वतंत्रता प्राप्त करने तक यूगोस्लाविया का हिस्सा था, जिसके बाद पुनर्निर्माण और लोकतांत्रिक सुधार हुए।
भूगोल और जलवायु: इसमें उपजाऊ मैदान, पहाड़ी और पर्वतीय क्षेत्र (दिनारिक आल्प्स सहित दिनारा शिखर – 1,831 मीटर), और एक ऊबड़-खाबड़ तटीय क्षेत्र शामिल है। आंतरिक भाग में गर्म गर्मी और ठंडी सर्दियों के साथ महाद्वीपीय जलवायु है, जबकि तट पर हल्की सर्दियों और शुष्क गर्मियों के साथ भूमध्यसागरीय जलवायु है।
नदियां और झीलें: प्रमुख नदियों में डेन्यूब, सावा, द्रावा, क्रका, कुपा, उना और सेटिना शामिल हैं। प्रमुख झीलें प्लिटविस झीलें (यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल) और वराना झील हैं।
राजधानी: सावा नदी पर स्थित जाग्रेब प्रशासनिक और आर्थिक केंद्र है।
सदस्यता: क्रोएशिया यूरोपीय संघ और नाटो दोनों का सदस्य है।
वैश्विक चुनौती
खालिस्तानी उग्रवादियों का पूर्वी यूरोप में विस्तार भारत के लिए एक नई चुनौती प्रस्तुत करता है। कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बाद अब ये तत्व यूरोपीय संघ के देशों में भी सक्रिय हो रहे हैं। यह भारत की राजनयिक और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक गंभीर मामला है।
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेती है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दबाव बनाएगी। यह घटना यह भी दर्शाती है कि राजनयिक मिशनों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान सुनिश्चित करना कितना महत्वपूर्ण है।
भारत की यह दृढ़ प्रतिक्रिया एक संदेश है कि वह अपने राजनयिक परिसरों और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।
