हार्वर्ड प्रोफेसर गीता गोपीनाथ का बड़ा बयान: टैरिफ से ज्यादा खतरनाक है भारत के लिए प्रदूषण, जानिए क्या है पूरा मामला?

हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर गीता गोपीनाथ ने प्रदूषण को भारत के लिए टैरिफ से भी बड़ा खतरा बताया है। यह बयान उन्होंने बुधवार को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 के दौरान दावोस में भारतीय मीडिया से बात करते हुए दिया।

 

व्यापार चर्चा में प्रदूषण को नहीं मिलता महत्व

प्रोफेसर गोपीनाथ ने कहा, “जब नए व्यवसायों और आर्थिक विकास की बात आती है, तो चर्चाएं ज्यादातर व्यापार, टैरिफ और नियमों तक सीमित रहती हैं, जबकि प्रदूषण को उतना महत्व नहीं दिया जाता।”

 

उन्होंने बताया कि प्रदूषण भारत में एक प्रमुख चुनौती है और इसका प्रभाव अब तक लगाए गए किसी भी टैरिफ से कहीं अधिक विनाशकारी है। विश्व बैंक की 2022 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में हर साल प्रदूषण के कारण लगभग 17 लाख लोगों की मौत होती है। यह देश में होने वाली कुल मौतों का लगभग 18% है।

देश के दीर्घकालिक विकास को पहुंचाता है नुकसान

प्रोफेसर गोपीनाथ ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मौतें परिवारों को प्रभावित करती हैं, काम करने वाले लोगों की संख्या कम करती हैं और देश के दीर्घकालिक विकास को नुकसान पहुंचाती हैं।

 

उन्होंने समझाया कि प्रदूषण के कारण लोगों की कार्य क्षमता घटती है, इलाज पर खर्च बढ़ता है और यह देश की आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इससे विकास की गति धीमी हो जाती है।

 

गीता गोपीनाथ ने कहा कि प्रदूषण केवल भारत की आंतरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह उन विदेशी निवेशकों के लिए भी चिंता का विषय है जो भारत में निवेश करने पर विचार कर रहे हैं।

 

विदेशी निवेशक भी देखते हैं पर्यावरण

गीता गोपीनाथ का तर्क है कि प्रदूषण भारत के लिए एक प्रमुख आर्थिक बाधा है। वे जोर देकर कहती हैं कि खराब वायु गुणवत्ता और रहने की स्थिति विदेशी निवेशकों को हतोत्साहित करती है और स्थानीय नागरिकों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे तत्काल नीतिगत सुधार आवश्यक हो जाता है।

 

वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने के लिए, भारत को पर्यावरणीय स्वास्थ्य को जीवन बचाने, विकास को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के साधन के रूप में मानना चाहिए।

 

लैंसेट रिपोर्ट: भयावह आंकड़े

अक्टूबर 2025 की लैंसेट काउंटडाउन रिपोर्ट से पता चलता है कि वायु प्रदूषण अब भारत के स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा है।

मौतों के आंकड़े: 2022 में PM 2.5 से जुड़ी 17 लाख से अधिक मौतें हुईं – यह 2010 से 38% की वृद्धि है। इनमें से 44% मौतें जीवाश्म ईंधन के प्रभाव से हुईं।

 

कोयला और पेट्रोल का असर: केवल कोयले से 3,94,000 मौतें हुईं, जो मुख्य रूप से थर्मल पावर प्लांट्स के कारण हुईं, जबकि वाहनों से निकलने वाला पेट्रोल उत्सर्जन एक प्रमुख योगदानकर्ता बना हुआ है।

 

यह रिपोर्ट 71 शैक्षणिक संस्थानों और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों से जुड़े 128 विशेषज्ञों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई है। रिपोर्ट की मुख्य लेखक मारियाना रोमानेलो ने कहा कि भारत के लिए एक अलग रिपोर्ट तैयार की गई है क्योंकि देश जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण से भारी रूप से प्रभावित है।

 

2022 में 30 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 2022 में बाहरी वायु प्रदूषण के कारण होने वाली असमय मौतों से आर्थिक नुकसान लगभग 339 बिलियन डॉलर (करीब ₹30 लाख करोड़) था। यह भारत की कुल अर्थव्यवस्था का लगभग 9.5% है।

 

घरेलू प्रदूषण भी एक बड़ी समस्या बन गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लकड़ी, कोयला और अन्य गंदे ईंधन से होने वाले घरेलू प्रदूषण के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक मौतें हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति एक लाख लोगों पर 125 मौतें दर्ज की गईं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 99 था।

 

दस साल में डेंगू के मामले दोगुने

अन्य स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का उल्लेख करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले दस वर्षों में भारत में डेंगू के मामले लगभग दोगुने हो गए हैं। इसके अतिरिक्त, देश में लगभग 1.8 करोड़ लोग समुद्र तल से एक मीटर से कम की ऊंचाई पर रहते हैं, जिससे बढ़ते समुद्र स्तर से उन्हें खतरा है।

 

रिपोर्ट के अनुसार, 2001 और 2023 के बीच भारत में 23 लाख हेक्टेयर से अधिक वृक्ष आवरण नष्ट हो गया, इनमें से बड़ी संख्या में नुकसान 2023 में ही हुआ। शहरों में हरित आवरण भी लगातार घट रहा है।

 

भारत के प्रमुख शहरों में शहरी हरियाली की स्थिति अत्यंत खराब है। 5 लाख से अधिक आबादी वाले 189 शहरों में से अधिकांश में बहुत कम हरियाली है। पश्चिम बंगाल का तामलुक एकमात्र शहर था जहां शहरी हरियाली अच्छी पाई गई।

 

47 भारतीय शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित में

पिछले महीने, दुनिया के 50 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 47 भारतीय शहर शामिल थे। दिल्ली-एनसीआर के लगभग सभी क्षेत्रों में AQI 400 से ऊपर था। यह खतरनाक श्रेणी में आता है।

उस समय, दिल्ली में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने भारत को प्रदूषण कम करने में मदद करने की पेशकश की थी। उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले, चीन की राजधानी बीजिंग भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में थी, लेकिन अब इसका AQI ज्यादातर 100 से नीचे रहता है।

 

यू जिंग ने सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें साझा की थीं। उनमें से एक में चीन का AQI 68 दिखाया गया था और दूसरे में भारत का AQI 447 था। जिंग ने लिखा था कि यह अंतर पिछले दशक में चीन के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

 

चीनी प्रवक्ता ने बताए 3 उपाय

 

पहला कदम – वाहन प्रदूषण में कमी:

  • वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए चीन के 6NI और यूरोप के यूरो 6 जैसे सख्त नियम लागू किए जाने चाहिए
  • पुराने और अधिक उत्सर्जन वाले वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए
  • कारों की संख्या कम करने के लिए लाइसेंस प्लेट लॉटरी सिस्टम और ऑड/ईवन नियम लागू किए जाने चाहिए
  • दुनिया का सबसे बड़ा मेट्रो और बस नेटवर्क बनाया जाना चाहिए
  • इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बदलाव किया जाना चाहिए

 

दूसरा कदम – औद्योगिक प्रदूषण में कमी:

  • भारी उद्योगों को कम या हटाया जाना चाहिए
  • खाली कारखानों की जगह पार्क, वाणिज्यिक क्षेत्र या सांस्कृतिक केंद्र बनाए जाने चाहिए
  • थोक बाजारों और लॉजिस्टिक हब जैसी चीजें, जो राजधानी के लिए आवश्यक नहीं हैं, हटाई जानी चाहिए

 

तीसरा कदम – कोयले के उपयोग में कमी:

  • कोयले की जगह बिजली और गैस का उपयोग किया जाना चाहिए
  • कोयला आधारित पावर प्लांट्स को प्राकृतिक गैस पर चलाया जाए या बंद किया जाए

 

केंद्र ने माना था 40% प्रदूषण परिवहन क्षेत्र से

केंद्र सरकार ने पिछले दिसंबर में स्वीकार किया था कि दिल्ली में लगभग 40% प्रदूषण वाहनों से आता है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि इसका मुख्य कारण पेट्रोल और डीजल पर चलने वाले वाहन हैं। उन्होंने बताया कि अब कम प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन अपनाने की आवश्यकता है।

 

इस बीच, सरकार ने संसद में कहा था कि वर्तमान में ऐसा कोई निर्णायक सबूत नहीं है जो स्पष्ट रूप से साबित करे कि प्रदूषण सीधे फेफड़ों की बीमारियों का कारण बनता है। हालांकि, सरकार ने यह माना कि प्रदूषित हवा श्वसन संबंधी बीमारियों को बढ़ा सकती है।

 

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में दिल्ली में श्वसन संबंधी बीमारियों के दो लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से लगभग 30 हजार लोगों को गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।

 

दिल्ली में क्या किया जा रहा है?

दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी GRAP के चरण IV को लागू किया है। इसके तहत:

  • आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले ट्रकों, गैस या इलेक्ट्रिक वाहनों और BS-6 ट्रकों को छोड़कर सभी ट्रकों के प्रवेश पर रोक
  • वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र के बिना वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा
  • ईंट भट्टों और हॉट मिक्स प्लांट जैसे प्रदूषणकारी उद्योगों पर अस्थायी प्रतिबंध
  • कचरा जलाने पर सख्त दंड
  • पूरे एनसीआर में निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर प्रतिबंध

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण से संबंधित मौतें हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर, मधुमेह और मनोभ्रंश जैसी बीमारियों से जुड़ी हैं। यह स्थिति विशेष रूप से भारत की बुजुर्ग आबादी के लिए चिंताजनक है।