NATO के महासचिव मार्क रुट ने सोमवार को ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए एक कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि यूरोप अमेरिका के बिना स्वयं की रक्षा करने में सक्षम नहीं है। यदि यूरोपीय देश वास्तव में स्वतंत्र रूप से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो उन्हें अपने रक्षा बजट को 10% तक बढ़ाना होगा और अपनी परमाणु क्षमता का निर्माण करना होगा।
यूरोप का योगदान मात्र 30%
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, रुट ने स्पष्ट किया कि यदि यूरोपीय देश वास्तव में अकेले ही यह करना चाहते हैं, तो उन्हें अरबों यूरो की लागत वाली परमाणु क्षमता विकसित करनी होगी। वर्तमान में NATO के कुल रक्षा खर्च में यूरोपीय देशों का योगदान केवल 30% है, जो उनकी GDP का औसतन मात्र 2% है।
रुट ने कहा कि 70 वर्ष बाद भी यूरोप अमेरिकी सैन्य शक्ति पर निर्भर है। मजबूत रक्षा के लिए यूरोप को बहुत अधिक खर्च करना होगा, यहां तक कि अपना परमाणु हथियार भी बनाना पड़ेगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “2035 तक 5% GDP रक्षा खर्च पर्याप्त नहीं है, इसे 10% तक ले जाना होगा। उस स्थिति में आप हमारी स्वतंत्रता के अंतिम गारंटर यानी अमेरिकी परमाणु सुरक्षा कवच को खो देंगे। यदि यूरोप अकेले चल सके तो मेरी ओर से शुभकामनाएं।”
ट्रम्प के आर्कटिक रणनीति का समर्थन
रुट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आर्कटिक क्षेत्र और ग्रीनलैंड की मजबूत रक्षा की रणनीति का समर्थन किया। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने ट्रम्प को उनकी बढ़ती धमकियों से पीछे हटने के लिए मनाया और ग्रीनलैंड को लेकर समझौते की दिशा में ले जाने का प्रयास किया।
रुट ने ट्रम्प की बात दोहराते हुए कहा कि चीन और रूस आर्कटिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। उन्होंने कहा, “ट्रम्प बहुत अच्छा काम कर रहे हैं, मुझे पता है कि इससे कई लोग चिढ़ रहे हैं।” आर्कटिक रक्षा को लेकर उन्होंने साफ कहा कि “ट्रम्प सही हैं।”
डेनमार्क और ग्रीनलैंड की नाराजगी
ट्रम्प ने 21 जनवरी को दावोस में रुट के साथ ग्रीनलैंड को लेकर बातचीत की थी। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेता इस बात से नाराज हो गए कि ट्रम्प और रुट उनकी जानकारी के बिना ग्रीनलैंड के भविष्य पर चर्चा कर रहे हैं।
यूरोपीय संसद के कई सदस्यों ने रुट से पूछा कि उन्होंने ट्रम्प से ठीक क्या चर्चा की और इसका डेनमार्क व ग्रीनलैंड पर क्या प्रभाव होगा। ट्रम्प ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि ग्रीनलैंड के भविष्य को लेकर NATO के साथ एक समझौते का ढांचा तैयार हो गया है, जिससे यूरोप में कुछ राहत मिली, हालांकि कई लोग चिंतित हैं कि ट्रम्प अपना मन बदल सकते हैं।
ग्रीनलैंड के लिए दो फ्रेमवर्क
रुट ने ग्रीनलैंड मुद्दे के संबंध में दो फ्रेमवर्क प्रस्तुत किए, जो ट्रम्प से मुलाकात के दौरान तय किए गए थे:
पहली योजना: NATO का आर्कटिक की रक्षा के लिए अधिक सामूहिक जिम्मेदारी लेना शामिल होगा, ताकि रूस और चीन को सैन्य और आर्थिक दोनों तरीके से इस क्षेत्र तक पहुंचने से रोका जा सके।
दूसरी योजना: अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच त्रिपक्षीय वार्ता जारी रखना शामिल होगा। रुट ने स्पष्ट किया कि वह इन वार्ताओं में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि उनके पास डेनमार्क की ओर से बातचीत करने का कोई अधिकार नहीं है और न ही वे ऐसा करेंगे, यह डेनमार्क का मामला है।
टैरिफ से पीछे हटे थे ट्रम्प
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने से पीछे हट गए थे। ये टैरिफ 1 फरवरी से लगने वाले थे। ट्रम्प ने रुट के साथ बातचीत के बाद यह निर्णय लिया था।
ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उनकी NATO चीफ के साथ ग्रीनलैंड को लेकर होने वाले समझौते की बुनियादी बातें तय हो गई हैं। यदि यह समझौता पूर्ण होता है, तो यह अमेरिका और NATO के सभी देशों के लिए लाभदायक होगा।
NATO का अनुच्छेद 5
NATO के अनुच्छेद 5 के अनुसार, यदि किसी NATO सदस्य देश पर हमला होता है, तो इसे सभी सदस्य देशों पर हमला समझा जाता है। फिर सभी सदस्य देश मिलकर उस हमले का जवाब देने के लिए सहमत होते हैं। हालांकि, यह युद्ध की गारंटी नहीं देता।
प्रत्येक देश अपनी संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर सकता है। यह अनुच्छेद मुख्य रूप से सोवियत संघ के खतरे के विरुद्ध बनाया गया था, ताकि कोई भी देश अकेला न रहे। इसका प्रसिद्ध नारा है – एक पर हमला, सभी पर हमला।
ट्रम्प की मांग: 5% रक्षा खर्च
पिछले वर्ष नीदरलैंड्स के द हेग शहर में हुई NATO समिट के बाद ट्रम्प ने यूरोपीय देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने को कहा था। ट्रम्प का मानना है कि अमेरिका NATO को बहुत पैसा देता है, लेकिन अन्य देश अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा रहे हैं।
ट्रम्प चाहते हैं कि सभी सदस्य देश अपने GDP का 5% रक्षा पर खर्च करें। वहीं, स्पेन ने साफ कर दिया है कि वह अपनी GDP का 5% रक्षा खर्च पर नहीं लगा सकता। स्पेन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि वह 2.1% से अधिक खर्च नहीं करेगा।
अन्य यूरोपीय देश इस खर्च को पूरा करने में अभी काफी पीछे हैं। कई देशों के लिए यह खर्च बहुत बड़ा है और वे संभवतः 2032 या 2035 तक भी इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएंगे।
NATO में विभिन्न देशों का योगदान
2024 के आंकड़ों के अनुसार:
- अमेरिका: 997 अरब डॉलर (66% योगदान)
- जर्मनी: 88.5 अरब डॉलर (6%)
- ब्रिटेन: 81.8 अरब डॉलर (5.4%)
- फ्रांस: 64.7 अरब डॉलर (4.3%)
- पोलैंड: 38 अरब डॉलर (2.5%)
- इटली: 36 अरब डॉलर (2.4%)
- कनाडा: 30.5 अरब डॉलर (2%)
यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि NATO के कुल रक्षा खर्च में अमेरिका का योगदान दो-तिहाई से अधिक है।
ट्रम्प का NATO से बाहर निकलने का इरादा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प NATO को लेकर कई बार नाराजगी जता चुके हैं। ट्रम्प ने बार-बार कहा है कि यूरोपीय देश अपनी सुरक्षा के लिए पर्याप्त खर्च नहीं कर रहे और सारा बोझ अमेरिका उठा रहा है। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि यूरोपीय देश 2% GDP रक्षा पर खर्च नहीं करते तो अमेरिका संगठन से हट भी सकता है।
ट्रम्प पिछले दो दशक से अमेरिका को NATO से बाहर निकालने की वकालत करते रहे हैं। 2016 में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में ट्रम्प ने कहा था कि यदि रूस बाल्टिक देशों पर हमला करता है, तो वे यह देखने के बाद ही मदद करेंगे कि उन्होंने अमेरिका के लिए अपना कर्तव्य पूरा किया है या नहीं।
ट्रम्प का मानना है कि यूरोपीय देश अमेरिका के खर्च पर NATO की सुविधाएं भोग रहे हैं। 2024 में एक साक्षात्कार में ट्रम्प ने साफ कह दिया था कि जो देश अपने रक्षा बजट पर 2% से कम खर्च कर रहे हैं, यदि उन पर रूस हमला करता है तो अमेरिका उनकी सहायता के लिए नहीं आएगा। उल्टे वे रूस को हमला करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कमजोर हुआ यूरोप
द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45) के बाद यूरोप आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर हो गया था। दूसरी ओर जापान पर परमाणु बम गिराने के बाद अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरा।
अमेरिका के पास विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना और परमाणु हथियार थे। उसने यूरोपीय देशों को परमाणु सुरक्षा प्रदान की। इससे यूरोपीय देशों को अपने परमाणु हथियार विकसित करने की आवश्यकता नहीं रही।
अमेरिका विशेष रूप से रूस से परमाणु हमलों के विरुद्ध यूरोपीय देशों को परमाणु सुरक्षा की गारंटी देता है। इससे यूरोपीय देशों का सैन्य खर्च कम होता है।
यूरोप में अमेरिका की मजबूत सैन्य उपस्थिति है। जर्मनी, पोलैंड और ब्रिटेन में 10 लाख से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। अमेरिका ने यहां सैन्य अड्डे बनाए हैं और मिसाइल रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं।
यदि अमेरिका NATO छोड़ दे तो क्या होगा?
यूरोप की सैन्य शक्ति सीमित है। अधिकांश यूरोपीय देश अमेरिका की तुलना में रक्षा पर कम खर्च करते हैं। यूरोपीय संघ (EU) के पास NATO जैसी संगठित सेना नहीं है। यहां तक कि जर्मनी और फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश भी खुफिया जानकारी और तकनीक के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं।
यदि अमेरिका गठबंधन छोड़ देता है तो यूरोप को अपनी योजनाओं को पूर्ण करने के लिए और अधिक खर्च करना होगा। उन्हें गोला-बारूद, परिवहन, ईंधन भरने वाले विमान, कमांड और नियंत्रण प्रणाली, उपग्रह, ड्रोन इत्यादि की कमी को पूरा करना होगा, जो वर्तमान में अमेरिका द्वारा प्रदान किए जाते हैं।
यूके और फ्रांस जैसे NATO सदस्य-देशों के पास लगभग 500 परमाणु हथियार हैं, जबकि अकेले रूस के पास 6,000 हैं। यदि अमेरिका NATO से बाहर चला गया तो गठबंधन को अपनी परमाणु नीति को नए सिरे से आकार देना होगा।
ग्रीनलैंड: क्यों महत्वपूर्ण है यह द्वीप?
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। इसका कुल क्षेत्रफल 21.6 लाख वर्ग किलोमीटर है और इसका 80% हिस्सा बर्फ से ढंका है। यहां की जनसंख्या मात्र 57 हजार के आसपास है, जो इसे विश्व के सबसे कम घनत्व वाले क्षेत्रों में से एक बनाती है।
ग्रीनलैंड 1721 से डेनमार्क का उपनिवेश रहा है, लेकिन 1953 में यह डेनमार्क का हिस्सा बना। 1979 में ग्रीनलैंड को होमरूल (स्वशासन) मिला।
पिछले 30 वर्षों में यहां बड़ा प्राकृतिक परिवर्तन देखा जा रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण यहां की बर्फ की चादरें तेजी से पिघल रही हैं और कई इलाकों में हरियाली पनप रही है।
रुट का बयान यूरोप के लिए एक कड़ी चेतावनी है कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी लेनी होगी और अमेरिका पर निर्भरता कम करनी होगी।
