18 वर्षों के इंतजार के बाद भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता: एक ऐतिहासिक उपलब्धि, ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्यों कहा जा रहा?

मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब भारत और यूरोपीय यूनियन ने लगभग दो दशकों की लंबी वार्ता के बाद मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर अंतिम सहमति की घोषणा की। 16वें भारत-यूरोपीय यूनियन शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने संयुक्त रूप से इस महत्वाकांक्षी समझौते की घोषणा की।

India-EU Free Trade Agreement

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ क्यों कहा जा रहा?

यूरोपीय आयोग की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे “अब तक का सबसे बड़ा समझौता” बताते हुए कहा, “पीएम मोदी, हमने कर दिखाया। हमने ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ डिलीवर की है।” उनका यह बयान केवल एक राजनयिक उपलब्धि नहीं, बल्कि आर्थिक वास्तविकता को दर्शाता है।

 

यह समझौता विश्व की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है – भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और यूरोपीय संघ दूसरी सबसे बड़ी। साथ मिलकर ये वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 25% और विश्व व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं। इस समझौते से दो अरब लोगों का एक विशाल मुक्त व्यापार क्षेत्र बनेगा।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह समझौता 2027 में लागू होने की संभावना है, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच व्यापार में क्रांतिकारी बदलाव आएगा।

 

समझौते की मुख्य विशेषताएं और लाभ

 

भारतीय निर्यातकों के लिए सुनहरा अवसर

भारत के 99% से अधिक उत्पाद अब यूरोपीय देशों में न्यूनतम या शून्य कर के साथ बेचे जा सकेंगे। यह भारतीय निर्यात के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा। विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा, मछली और आभूषण क्षेत्रों को 33 अरब डॉलर के निर्यात में सीधा लाभ मिलेगा।

 

वर्तमान में इन उत्पादों पर 10% आयात शुल्क लगता है, जो समझौता लागू होते ही समाप्त हो जाएगा। भारतीय गारमेंट, चमड़े के उत्पाद, जूते और हस्तशिल्प जैसे श्रम-आधारित क्षेत्रों को विशेष लाभ होगा क्योंकि यूरोपीय बाजार में इनकी मांग काफी अधिक है।

 

सेवा क्षेत्र में व्यापक अवसर

भारतीय आईटी, पेशेवर और शिक्षा सेवाओं को यूरोपीय संघ में विशाल बाजार मिलेगा। भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को यूरोपीय संघ के 144 सेवा क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिलेगा, जबकि यूरोपीय संघ को भारत के 102 सेवा क्षेत्रों में प्रवेश मिलेगा।

 

भारतीय पेशेवरों के लिए यूरोपीय संघ में काम और व्यवसाय के लिए जाना अब बहुत आसान होगा। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाएं और नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा मिलेगा।

 

किसानों के हितों की सुरक्षा

भारत ने अपने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए दूध, अनाज, पोल्ट्री और फल-सब्जियों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस मुक्त व्यापार समझौते से बाहर रखा है। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यूरोपीय कृषि उत्पादों पर भारी सब्सिडी मिलती है और उनके सस्ते दामों से भारतीय किसानों को नुकसान हो सकता था।

 

डेयरी क्षेत्र को भी समझौते से पूरी तरह बाहर रखा गया है, जो भारत की चिंताओं को दर्शाता है कि यूरोपीय डेयरी उत्पादों से देश के किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

 

ऑटोमोबाइल क्षेत्र में संतुलित दृष्टिकोण

भारत में यूरोपीय कारों जैसे बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज और पोर्श पर लगने वाले कर को 110% से घटाकर धीरे-धीरे 10% तक लाया जाएगा। हालांकि, यह प्रक्रिया चरणबद्ध होगी ताकि भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों को नुकसान न हो।

 

भारत ने हर साल 2.5 लाख यूरोपीय कारों का कोटा निर्धारित किया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है, लेकिन विदेशी कार कंपनियों की हिस्सेदारी यहां अभी 4% से भी कम है। कर में कमी के बाद यूरोपीय कंपनियां अधिक मॉडल लॉन्च कर सकेंगी और संभावित रूप से भारत में निवेश बढ़ाएंगी।

 

शराब और पेय पदार्थों पर राहत

यूरोपीय देशों की शराब पर वर्तमान में 150% टैरिफ लगता है, जिसे घटाकर 20-30% किया जाएगा। बीयर पर शुल्क 110% से घटकर 50% हो जाएगा और स्पिरिट पर कर 40% होगा। जैतून का तेल, मार्जरीन और अन्य वनस्पति तेलों पर शून्य कर लगेगा।

 

औद्योगिक और चिकित्सा क्षेत्र में लाभ

रसायनों, विमानन, अंतरिक्ष उपकरण और चिकित्सा मशीनों पर भारी कर समाप्त या बहुत कम किए जाएंगे। चिकित्सा और शल्य चिकित्सा उपकरणों के लगभग 90% सामान अब कर-मुक्त होंगे।

 

मशीनरी पर लगने वाला 44% तक का कर और रसायनों पर 22% कर लगभग समाप्त हो जाएगा। विमानन और अंतरिक्ष से संबंधित लगभग सभी उत्पाद अब बिना टैरिफ के आएंगे, जिससे भारत के एविएशन क्षेत्र को बड़ा फायदा होगा।

 

भारत में खुलेगा यूरोपीय संघ का पहला कानूनी गेटवे कार्यालय

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने घोषणा की कि भारत में यूरोपीय संघ का पहला कानूनी गेटवे कार्यालय खोला जा रहा है। यह कार्यालय उन भारतीय युवाओं और पेशेवरों की सहायता करेगा जो यूरोप जाकर पढ़ना, काम करना या बसना चाहते हैं।

 

यहां यूरोप जाने से संबंधित सभी कानूनी जानकारी और परामर्श एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी, जो भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ी सुविधा होगी।

 

प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रिया

 

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

पीएम मोदी ने कहा, “कल एक ऐतिहासिक क्षण था जब यूरोपीय यूनियन के नेताओं ने पहली बार भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लिया। आज एक और ऐसा ही क्षण है, जब दो प्रमुख लोकतांत्रिक शक्तियां अपने संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ रही हैं।”

 

उन्होंने कहा कि 27 जनवरी को भारत ने यूरोप के 27 देशों के साथ यह समझौता किया है – यह संख्याओं का एक दिलचस्प मेल है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि यह केवल एक व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि का रोडमैप है।

 

मोदी ने कपड़ा, आभूषण, चमड़ा और जूते जैसे क्षेत्रों से जुड़े युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि यह समझौता उनके लिए बहुत लाभकारी साबित होगा। उन्होंने कहा, “यह मुक्त व्यापार समझौता दुनिया भर के हर व्यवसाय और निवेशक के लिए भारत में विश्वास को मजबूत करेगा।”

 

यूरोपीय संघ के नेताओं की खुशी

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भावुक होकर कहा, “मैं यूरोपीय परिषद का अध्यक्ष हूं, लेकिन साथ ही मैं एक प्रवासी भारतीय नागरिक भी हूं। मुझे अपनी गोवा से जुड़ी पहचान पर बहुत गर्व है, जहां से मेरे पिता का परिवार आया है।” उन्होंने अपना ओवरसीज कार्ड भी दिखाया।

 

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा, “जब दो प्रमुख लोकतांत्रिक देश एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो वह मजबूत रक्षा प्रणाली बनाते हैं।”

 

उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मकर संक्रांति के संदर्भ में कहा, “यह उत्तरायण की शुरुआत है, जब सूर्य उत्तर दिशा की यात्रा करता है। इसका मतलब है अंधेरे से रोशनी की ओर, स्थिरता से विकास की ओर बढ़ना। यूरोपीय यूनियन और भारत की दोस्ती की नई शुरुआत का यह सही समय है।”

 

18 वर्षों की लंबी यात्रा: कैसे पहुंचे यहां?

 

2007-2013: पहला प्रयास और रुकावट

भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन 2013 में कई विवादास्पद मुद्दों पर असहमति के कारण रुक गई। मुख्य रुकावटें थीं:

 

कृषि और डेयरी विवाद: यूरोपीय संघ चाहता था कि भारत अपना डेयरी बाजार खोले, लेकिन भारत को भय था कि यूरोप के भारी सब्सिडी वाले सस्ते डेयरी उत्पादों से भारतीय किसान बर्बाद हो जाएंगे।

 

शराब और कार पर कर: यूरोपीय संघ शराब और कारों पर आयात शुल्क कम करने की मांग कर रहा था, जिस पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया था।

 

दवाइयों का मूल्य निर्धारण: यूरोपीय संघ चाहता था कि भारत बौद्धिक संपदा अधिकार नियमों को सख्त करे। भारत को डर था कि इससे जीवन रक्षक दवाइयां महंगी हो जाएंगी।

 

पेशेवर वीजा: भारत चाहता था कि यूरोपीय संघ उसे डेटा-सुरक्षित देश माने, पेशेवरों को काम के लिए आसानी से आने-जाने दे और अल्पकालिक व्यवसाय वीजा आसान करे। यूरोप इसके लिए तैयार नहीं था।

 

घरेलू मामलों में हस्तक्षेप: यूरोपीय संघ ने व्यापार के साथ-साथ मानवाधिकार, श्रम और पर्यावरण जैसे मुद्दों को भी जोड़ा, जिसे भारत ने अपनी घरेलू नीतियों में हस्तक्षेप माना।

 

2021-2026: नई शुरुआत और सफलता

जून-जुलाई 2021 में दोनों पक्षों ने बातचीत फिर से शुरू की। तब से अक्टूबर 2025 तक 14 दौर की वार्ता हुई। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने पिछले सप्ताह बताया कि 24 अध्यायों में से 20 पर सहमति बन चुकी है।

 

इस बार सफलता के पीछे कई कारक थे:

  • दोनों पक्षों ने संवेदनशील क्षेत्रों पर लचीलापन दिखाया
  • 90% से अधिक वस्तुओं पर टैरिफ खत्म करने की योजना बनाई गई, जो 5-10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू होगी
  • कृषि, डेयरी, ऑटो और शराब जैसे क्षेत्रों पर कोटा या धीरे-धीरे टैरिफ में कटौती का निर्णय लिया गया

 

वर्तमान व्यापार और भविष्य की संभावनाएं

 

मौजूदा व्यापार आंकड़े

2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग 136 अरब डॉलर (12.4 लाख करोड़ रुपये) का व्यापार हुआ। यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार भागीदार है।

 

भारत से यूरोपीय संघ को निर्यात: 6.9 लाख करोड़ रुपये (डीजल, एविएशन ईंधन, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े, रसायन, दवाइयां, लोहा, स्टील, हीरे, आभूषण)

यूरोपीय संघ से भारत आयात: 5.5 लाख करोड़ रुपये (उच्च-स्तरीय मशीनरी, औद्योगिक उपकरण, टर्बोजेट इंजन, मोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक चिप्स, विमान, चिकित्सा उपकरण)

 

भविष्य के अनुमान

विशेषज्ञों का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार दोगुना हो सकता है। यह भारत को यूरोप का 22वां मुक्त व्यापार भागीदार बनाता है।

 

रक्षा और सुरक्षा सहयोग

व्यापार समझौते के साथ-साथ भारत और यूरोपीय संघ ने रक्षा और सुरक्षा साझेदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यूरोपीय संघ की उच्च प्रतिनिधि काजा कलास से मुलाकात के बाद कहा कि दोनों पक्ष मिलकर भरोसेमंद रक्षा ढांचा तैयार करना चाहते हैं।

 

फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय संघ के देश भारत में रक्षा कारखाने लगा सकते हैं। इससे भारतीय हथियार कंपनियों को यूरोपीय संघ के रक्षा फंड तक पहुंच मिल सकती है।

 

संभावित चुनौतियां

 

भारत के लिए चुनौतियां

  1. घरेलू उद्योग पर दबाव: शराब और लग्जरी कारों पर कर कम होने से घरेलू कंपनियों को विदेशी ब्रांडों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।
  2. अनुपालन लागत: यूरोप के सख्त पर्यावरण, श्रम और कार्बन कर नियम मानने से भारतीय कंपनियों का खर्च बढ़ सकता है।
  3. पेटेंट नियम: यदि दवाइयों के पेटेंट नियम सख्त हुए तो कुछ आवश्यक दवाइयां महंगी हो सकती हैं।
  4. छोटे उद्योग: छोटे उद्योगों को बड़ी यूरोपीय कंपनियों से प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो सकता है।

 

यूरोपीय संघ के लिए चुनौतियां

  1. स्थानीय उद्योग: भारत में सस्ते और बड़े पैमाने पर बने उत्पादों से यूरोप की कुछ स्थानीय उद्योगें कमजोर पड़ सकती हैं।
  2. अनुकूलन लागत: यूरोपीय कंपनियों को भारत के नियमों के अनुसार ढलना पड़ेगा, जिससे लागत बढ़ेगी।
  3. रोजगार चिंताएं: वीजा और सेवा क्षेत्र पर अधिक छूट से घरेलू रोजगारों को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

 

वैश्विक संदर्भ और महत्व

यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब भारत और यूरोपीय संघ दोनों ही अमेरिका के साथ आर्थिक और भू-राजनीतिक दबाव का सामना कर रहे हैं। दोनों पक्ष दुनिया के अन्य हिस्सों के साथ अपने रणनीतिक और व्यापारिक संबंध मजबूत करना चाहते हैं।

 

बीबीसी ने इसे “ऐतिहासिक समझौता” बताया है। यह समझौता चीन के विकल्प के रूप में भारत को एक बड़ा विनिर्माण केंद्र बनाने में मदद कर सकता है।

 

निष्कर्ष: नई शुरुआत की ओर

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता केवल एक व्यापारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि दो महान लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है। 18 वर्षों के धैर्यपूर्ण प्रयास, 14 दौर की गहन वार्ता और असंख्य चुनौतियों को पार करने के बाद यह समझौता साकार हुआ है।

 

2027 में जब यह समझौता लागू होगा, तो यह न केवल दो अरब लोगों के लिए नए अवसर खोलेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार के नक्शे को भी बदल देगा। भारतीय निर्यातकों, पेशेवरों, युवाओं और उद्यमियों के लिए यूरोप का विशाल बाजार खुल जाएगा, जबकि यूरोपीय कंपनियों को भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में प्रवेश मिलेगा।

 

जैसा कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा, “एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर, सुरक्षित और समृद्ध बनाता है।” यह समझौता उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है – अंधकार से प्रकाश की ओर, स्थिरता से विकास की ओर, और अतीत से भविष्य की ओर।