बजट सत्र 2026: सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने उठाए कई मुद्दे, 1 फरवरी को पेश होगा बजट

संसद का बजट सत्र शुरू होने से ठीक पहले केंद्र सरकार ने मंगलवार को सभी राजनीतिक दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित इस सर्वदलीय बैठक में 35 से अधिक पार्टियों के सांसदों ने हिस्सा लिया। मुख्य एजेंडा बजट सत्र को सकारात्मक माहौल में और सुचारू रूप से संचालित करने पर केंद्रित था।

 

28 जनवरी से शुरू होने वाला यह बजट सत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करने के साथ आरंभ होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट प्रस्तुत करेंगी, जो रविवार का दिन है।

विपक्ष के मुद्दे

बैठक के बाद कई विपक्षी सांसदों ने अपनी चिंताएं सार्वजनिक कीं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत ने बताया कि प्रत्येक दल ने अपने-अपने राज्यों की विशिष्ट मांगें रखीं। प्रदूषण, मतदाता सूची में हेरफेर (एसआईआर), बेरोजगारी में वृद्धि जैसे अनेक राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे चर्चा में रहे।

 

समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव ने आलोचनात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि आगामी बजट से आम लोगों को कुछ नहीं मिलने वाला। उनका दावा था कि यह बजट केवल उन्हीं के लिए है जिनके पास पहले से संपत्ति है।

 

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने विदेश नीति पर सरकार की विफलता का मुद्दा उठाया। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और अमेरिका द्वारा प्रधानमंत्री के प्रति कथित अपमानजनक व्यवहार पर सवाल उठाए। सिंह ने प्रयागराज में शंकराचार्य के साथ हुई कथित घटना और मतदाता सूची से वोटों के हटाए जाने के आरोप भी शामिल किए।

 

सरकार का पक्ष: किरेन रिजिजू का जवाब

बैठक के उपरांत केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। विधायी एजेंडा साझा न करने के आरोप पर उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद ही सरकार अपना एजेंडा सार्वजनिक करती है। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष को बोलने की पूरी आजादी है, लेकिन सुनना भी आवश्यक है।

 

मनरेगा की जगह लाए गए वीबी-जी रैम-जी कानून पर चर्चा की मांग को उन्होंने खारिज कर दिया।

 

विपक्ष की प्रमुख मांगें

बैठक में विपक्षी दलों ने कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की:

  • भारत-यूरोपीय संघ व्यापार समझौता: हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते पर संसद में विस्तृत चर्चा हो
  • ओडिशा का कृषि संकट: भाजपा शासित राज्य में किसानों की समस्याएं और कानून-व्यवस्था की स्थिति
  • सोशल मीडिया नियमन: 16 वर्ष से कम आयु के लोगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का विधेयक

 

कांग्रेस की रणनीति बैठक

सर्वदलीय बैठक से पहले कांग्रेस ने भी अपनी संसदीय रणनीति तय करने के लिए बैठक आयोजित की। यह बैठक मंगलवार को संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी के निवास पर हुई। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने बताया कि वोट चोरी, मतदाता सूची में गड़बड़ी, किसानों के धान की खरीद, मनरेगा को वापस लाने जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।

 

बजट सत्र की रूपरेखा

 

समय-सारणी और महत्वपूर्ण तिथियां

बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान कुल 30 बैठकें निर्धारित हैं। सत्र दो चरणों में विभाजित है:

 

पहला चरण: 28 जनवरी से 13 फरवरी तक दूसरा चरण: 9 मार्च से 2 अप्रैल तक

इन दोनों चरणों के बीच अंतर-सत्र अवकाश रहेगा। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के लिए 2 से 4 फरवरी तक तीन दिन अस्थायी रूप से आवंटित किए गए हैं। विशेष बात यह है कि 28 जनवरी और 1 फरवरी को कोई शून्यकाल नहीं होगा।

 

लंबित विधेयक

वर्तमान में लोकसभा में 9 विधेयक लंबित हैं। इनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025, प्रतिभूति बाजार संहिता 2025 और संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 प्रमुख हैं। ये सभी विधेयक संसदीय स्थायी या प्रवर समितियों की जांच के अधीन हैं।

 

बजट 2026-27: निर्मला सीतारमण का नौवां बजट

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना लगातार नौवां बजट पेश करेंगी। यह मोदी 3.0 सरकार का तीसरा पूर्ण बजट होगा। वित्त मंत्री को 7.4% की विकास दर और अनिश्चित भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच बजट प्रस्तुत करना होगा।

 

बजट निर्माण की टीम

बजट तैयार करने में कई प्रमुख अधिकारी शामिल हैं:

 

अनुराधा ठाकुर (आर्थिक मामलों की सचिव): बजट की मुख्य योजनाकार। 2026-27 में सरकारी खर्च का पूरा ढांचा तैयार करती हैं। यह उनका पहला बजट है।

 

अरविंद श्रीवास्तव (राजस्व सचिव): कर से संबंधित सभी घोषणाओं के लिए जिम्मेदार। आयकर, कॉर्पोरेट कर और जीएसटी जैसे मामलों की देखरेख करते हैं।

 

वुमलनमांग वुअलनाम (व्यय सचिव): सरकारी धन के खर्च की निगरानी करते हैं। बजट घाटा नियंत्रण में रखने के लिए राजकोषीय अनुशासन लागू करना इनकी प्राथमिकता है।

 

एम नागराजू (वित्तीय सेवा सचिव): जन-धन, बीमा, पेंशन जैसी योजनाओं की देखरेख और सरकारी बैंकों की आर्थिक स्थिति पर नज़र रखते हैं।

 

अरुणिश चावला (DIPAM सचिव): सरकारी विनिवेश और निजीकरण की रणनीति संभालते हैं।

 

वी अनंत नागेश्वरन (मुख्य आर्थिक सलाहकार): बजट का आर्थिक आधार तैयार करते हैं और विकास दर, उद्योग प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हैं।

 

बजट से अपेक्षाएं और संभावित घोषणाएं

 

कर सुधार और व्यापार सुविधा

विशेषज्ञों को उम्मीद है कि टीडीएस श्रेणियों में कमी और दरों में तर्कसंगतता लाई जाएगी। सीमा शुल्क व्यवस्था में बदलाव के साथ दरें कम की जा सकती हैं। विवादों में फंसे 1.53 लाख करोड़ रुपये को मुक्त करने के लिए माफी योजना की घोषणा हो सकती है।

 

राजकोषीय अनुशासन और रक्षा

वित्तीय वर्ष 2026-27 से ऋण-जीडीपी अनुपात को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। वैश्विक तनाव को देखते हुए रक्षा खर्च में वृद्धि की संभावना है।

 

वेतन आयोग और राज्यों को हस्तांतरण

8वें वेतन आयोग के लिए प्रावधान की उम्मीद है, जो 1 जनवरी 2026 से लागू हो सकता है। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को करों का हस्तांतरण किया जाएगा।

 

उद्योग और खनिज क्षेत्र

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए प्रोत्साहन योजनाएं बढ़ाई जा सकती हैं। रत्न और आभूषण, रेडीमेड वस्त्र और चमड़ा जैसे टैरिफ संवेदनशील क्षेत्रों को विशेष सहायता मिल सकती है।

 

लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी चुंबक जैसे खनिजों की खोज और प्रसंस्करण के लिए फंडिंग की घोषणा संभावित है।

 

पूंजीगत व्यय में वृद्धि

भारतीय स्टेट बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 10% की वृद्धि होगी।

 

रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल पूंजीगत खर्च वित्त वर्ष 2015-16 में 2.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये हो गया है।