क्या UAE ने भारत के कारण पाकिस्तान से बनाई दूरी? इस्लामाबाद एयरपोर्ट डील पर उठे बड़े सवाल, जानिए क्या है मामला?

जनवरी 2026 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन से जुड़ी प्रस्तावित डील से पीछे हटने की खबरें सामने आईं। यद्यपि पाकिस्तान सरकार ने औपचारिक रूप से यह दावा किया कि ऐसी कोई अंतिम डील कभी हुई ही नहीं थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कूटनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को पाकिस्तान-UAE संबंधों में आई ठंडक और भारत-UAE बढ़ती निकटता से जोड़कर देखा जा रहा है। यह मामला केवल एक एयरपोर्ट के प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाड़ी क्षेत्र, दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते शक्ति संतुलन को दर्शाता है।

 

इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और प्रस्तावित UAE भूमिका

इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पाकिस्तान का सबसे बड़ा और आधुनिक हवाई अड्डा है, जिसे 2018 में चालू किया गया था। यह न केवल पाकिस्तान की राजधानी का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार है, बल्कि देश की एविएशन रणनीति का भी केंद्रीय स्तंभ है। पाकिस्तान लंबे समय से अपने एविएशन सेक्टर को घाटे और कुप्रबंधन से निकालने के लिए विदेशी निवेश और तकनीकी साझेदारी की तलाश में रहा है।

 

अगस्त 2025 में खबरें आई थीं कि पाकिस्तान और UAE के बीच इस एयरपोर्ट के संचालन और प्रबंधन को लेकर प्रारंभिक बातचीत चल रही है। विचार यह था कि UAE की किसी अनुभवी एयरपोर्ट अथॉरिटी या कंपनी को संचालन सौंपकर सेवाओं में सुधार किया जाए और राजस्व बढ़ाया जाए। यह मॉडल दुनिया के कई देशों में अपनाया गया है, जहां खाड़ी देशों की कंपनियां एयरपोर्ट मैनेजमेंट में वैश्विक अनुभव रखती हैं।

डील पर सवाल और पाकिस्तान का खंडन

जनवरी 2026 में अचानक खबर आई कि UAE ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट ऑपरेशन डील को खत्म कर दिया है। इसके तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार ने सफाई दी कि ऐसी कोई औपचारिक या बाध्यकारी डील कभी अस्तित्व में ही नहीं थी। इस विरोधाभास ने अटकलों को और हवा दी।

 

कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही कोई अंतिम समझौता न हुआ हो, लेकिन शुरुआती स्तर की बातचीत का रुक जाना अपने-आप में एक संकेत है। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कई बार “डील का न होना” भी उतना ही महत्वपूर्ण संदेश देता है जितना डील का होना।

 

भारत-UAE संबंध और नाहयान की अचानक भारत यात्रा

इस पूरे घटनाक्रम को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की 19 जनवरी 2026 को हुई अचानक भारत यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है। यह यात्रा केवल कुछ घंटों की थी, लेकिन इसके दौरान भारत और UAE के बीच व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग से जुड़े कई अहम समझौते हुए।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खुद एयरपोर्ट जाकर नाहयान का स्वागत करना इस रिश्ते की विशेषता को दर्शाता है। भारत-UAE संबंध अब केवल ऊर्जा और प्रवासी श्रमिकों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि रक्षा उत्पादन, रणनीतिक निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा तक विस्तृत हो चुके हैं। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि UAE अपने रणनीतिक संसाधनों और निवेश प्राथमिकताओं को नए सिरे से परिभाषित करे।

 

पाकिस्तान-UAE रिश्तों में आई खटास के कारण

पाकिस्तान और UAE के रिश्ते दशकों से घनिष्ठ रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में इनमें कई तनाव उभरे हैं। इसका एक कारण पाकिस्तान का सऊदी अरब और तुर्किये के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग माना जा रहा है। सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते को UAE ने अपने हितों के खिलाफ माना।

 

इसके अलावा यमन गृहयुद्ध में सऊदी अरब और UAE द्वारा अलग-अलग गुटों का समर्थन करना भी दोनों खाड़ी देशों के बीच मतभेद का कारण रहा है। जब इन क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विताओं में पाकिस्तान किसी एक पक्ष के ज्यादा करीब जाता है, तो उसका असर उसके अन्य खाड़ी साझेदारों के साथ रिश्तों पर पड़ता है।

 

चीन का कारक और भारत की रणनीतिक चिंता

इस पूरे समीकरण में चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। चीन पहले ही पाकिस्तान का सबसे बड़ा रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। अब बांग्लादेश और पाकिस्तान में जल परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे में चीन की बढ़ती भूमिका भारत के लिए चिंता का विषय है। यदि UAE पाकिस्तान में अपनी भागीदारी कम करता है और चीन का प्रभाव बढ़ता है, तो यह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को और जटिल बना सकता है।

 

भारत के लिए UAE के साथ मजबूत होते संबंध केवल द्विपक्षीय लाभ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह चीन-पाकिस्तान धुरी को संतुलित करने का भी एक साधन हैं।

 

पाकिस्तान की आर्थिक मजबूरियां और निजीकरण की नीति

इस्लामाबाद एयरपोर्ट डील की पृष्ठभूमि में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को भी समझना जरूरी है। पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और अंतरराष्ट्रीय ऋण दबाव से जूझ रहा है। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) का निजीकरण इसी नीति का हिस्सा था, जिसके तहत सरकार घाटे वाले सार्वजनिक उपक्रमों से छुटकारा पाना चाहती है।

 

एयरपोर्ट ऑपरेशन में विदेशी भागीदारी भी इसी सोच का विस्तार थी। लेकिन यदि कूटनीतिक कारणों से ऐसे निवेश अटकते हैं, तो पाकिस्तान की आर्थिक सुधार प्रक्रिया और कठिन हो सकती है।

 

निष्कर्ष:

इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ा UAE-पाकिस्तान विवाद केवल एक तकनीकी या व्यावसायिक मुद्दा नहीं है। यह बदलती खाड़ी राजनीति, भारत-UAE की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी और पाकिस्तान की विदेश नीति की दुविधाओं को उजागर करता है। भारत के लिए यह घटनाक्रम कूटनीतिक अवसर भी है और सतर्कता का संकेत भी। आने वाले वर्षों में यह स्पष्ट होगा कि क्या पाकिस्तान अपने पारंपरिक खाड़ी साझेदारों के साथ संतुलन बना पाता है या क्षेत्रीय राजनीति में नई ध्रुवीकरण की रेखाएं और गहरी होंगी।

 

UPSC प्रीलिम्स प्रश्न (MCQ)

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संदर्भ में सही है?

  1. यह पाकिस्तान का सबसे पुराना अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है।
  2. इसका संचालन वर्ष 2018 में शुरू हुआ।
  3. इसे पुराने बेनजीर भुट्टो इंटरनेशनल एयरपोर्ट के स्थान पर विकसित किया गया।

नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
(a) केवल 2 और 3
(b) केवल 1 और 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3

 

UPSC मेन्स प्रश्न

भारत-UAE और पाकिस्तान-UAE संबंधों के संदर्भ में इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ा हालिया विवाद खाड़ी राजनीति और दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में किस प्रकार के बदलावों को दर्शाता है? विश्लेषण कीजिए।