रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ने पुष्टि की कि भारत और रूस अगले महीने 15 से 25 फरवरी 2026 तक हिंद महासागर के बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास करने जा रहे हैं। यह अभ्यास भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित मिलन-2026 बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास का हिस्सा होगा। रूस की ओर से पैसिफिक फ्लीट का युद्धपोत ‘मार्शल शापोशनिकोव’ इसमें भाग लेगा, जो ओमान के मस्कट बंदरगाह से रवाना होकर भारत पहुंचेगा। अभ्यास के बाद यह पोत विशाखापत्तनम बंदरगाह पर औपचारिक दौरा भी करेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में सामरिक प्रतिस्पर्धा, समुद्री सुरक्षा और बहुपक्षीय नौसैनिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। भारत द्वारा आयोजित मिलन अभ्यास अब केवल सैन्य ड्रिल नहीं, बल्कि एक व्यापक समुद्री कूटनीति मंच बन चुका है।
मिलन-2026 और भारत की समुद्री कूटनीति
मिलन अभ्यास भारतीय नौसेना की एक प्रमुख पहल है, जिसकी शुरुआत 1995 में हुई थी। इसका उद्देश्य मित्र देशों की नौसेनाओं के बीच आपसी समन्वय (interoperability), विश्वास और सहयोग को बढ़ाना है। मिलन-2026 का दायरा पहले से कहीं अधिक बड़ा है, जिसमें 50 से अधिक देशों की नौसेनाओं के भाग लेने की संभावना है। इसके साथ ही इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और इंडियन ओशन नेवल सिम्पोज़ियम (IONS) – कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स का आयोजन भी किया जाएगा।
इस आयोजन में अमेरिका और रूस जैसे बड़े सैन्य शक्ति संपन्न देशों की भागीदारी भारत की रणनीतिक संतुलन नीति को दर्शाती है। वहीं पाकिस्तान, चीन और तुर्किये को आमंत्रण न मिलना यह संकेत देता है कि भारत समुद्री सहयोग में विश्वसनीय और नियम-आधारित साझेदारों को प्राथमिकता दे रहा है।
बंगाल की खाड़ी और भारत-रूस नौसैनिक सहयोग का महत्व
बंगाल की खाड़ी भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यह क्षेत्र न केवल भारत के पूर्वी तट की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया से व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति मार्गों और मानवीय सहायता अभियानों के लिए भी अहम है। प्राकृतिक आपदाओं, विशेषकर चक्रवातों की दृष्टि से भी यह इलाका संवेदनशील माना जाता है।
रूस के लिए इस क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि वह यूरोप और प्रशांत महासागर तक सीमित न रहकर हिंद महासागर क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहता है। ‘मार्शल शापोशनिकोव’ जैसे आधुनिकीकृत युद्धपोत की तैनाती रूस की एंटी-सबमरीन और सतही युद्ध क्षमताओं को प्रदर्शित करती है।
भारत और रूस के बीच नौसैनिक सहयोग नया नहीं है। इंद्र (INDRA) जैसे द्विपक्षीय अभ्यास पहले से होते रहे हैं, लेकिन मिलन जैसे बहुपक्षीय मंच पर रूस की सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि दोनों देश बदलते वैश्विक हालात में भी रणनीतिक साझेदारी को बनाए हुए हैं।
भारत के लिए रणनीतिक लाभ और व्यापक संदेश
भारत के लिए मिलन-2026 कई स्तरों पर लाभकारी है। पहला, यह भारत की उस छवि को मजबूत करता है जिसमें वह हिंद महासागर क्षेत्र में ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ की भूमिका निभा रहा है। दूसरा, ऐसे अभ्यास भारतीय नौसेना की ब्लू-वॉटर क्षमता, समुद्री निगरानी और बहुपक्षीय संचालन कौशल को बेहतर बनाते हैं।
विशाखापत्तनम जैसे प्रमुख नौसैनिक अड्डे पर विदेशी युद्धपोतों का आगमन सॉफ्ट पावर और जन-स्तरीय कूटनीति को भी बढ़ावा देता है। साथ ही, यह भारत के आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat) दृष्टिकोण के अनुरूप है, जहां भारत विदेशी साझेदारी के साथ-साथ स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म्स को भी आगे बढ़ा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह अभ्यास एक स्पष्ट संदेश देता है कि भारत बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संतुलन साधते हुए, किसी एक गुट में बंधे बिना, अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार साझेदारी करता है।
निष्कर्ष:
भारत-रूस की भागीदारी के साथ मिलन-2026 केवल एक सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि समुद्री कूटनीति, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक संतुलन का प्रतीक है। यह आयोजन भारत की बढ़ती नौसैनिक क्षमता, वैश्विक स्वीकार्यता और हिंद महासागर क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करता है। आने वाले वर्षों में ऐसे अभ्यास भारत को न केवल सुरक्षा के क्षेत्र में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विश्वास निर्माण में भी मजबूत बनाएंगे।
प्रीलिम्स प्रश्न
मिलन-2026 नौसैनिक अभ्यास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह अभ्यास भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित एक बहुराष्ट्रीय नौसैनिक पहल है।
- इसका आयोजन बंगाल की खाड़ी और विशाखापत्तनम के आसपास किया जाता है।
- इसका उद्देश्य केवल द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को बढ़ाना है।
सही कथन चुनिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
मेंस प्रश्न (GS Paper II / III)
“मिलन जैसे बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास भारत की समुद्री कूटनीति और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी भूमिका को सुदृढ़ करते हैं।” इस कथन के आलोक में भारत-रूस नौसैनिक सहयोग का विश्लेषण कीजिए।
