राष्ट्रपति शासन के करीब एक साल बाद मणिपुर में एक बार फिर निर्वाचित सरकार बनने जा रही है। भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को इस दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया है। पार्टी के संसदीय बोर्ड ने तरुण चुग को केंद्रीय पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी सौंपी है, जो विधायक दल के नेता के चुनाव की प्रक्रिया को देखेंगे। तरुण चुग BJP के राष्ट्रीय महासचिव हैं।
दिल्ली में जुटने लगे विधायक
मंगलवार को NDA विधायकों की अहम बैठक होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि बैठक का स्थान अभी निश्चित नहीं हुआ है। विधायकों का एक बड़ा समूह पहले ही राजधानी पहुंच चुका है। रविवार की देर रात करीब 20 NDA विधायक मणिपुर से दिल्ली आ गए थे। सोमवार को केंद्रीय नेतृत्व के आदेश पर और भी विधायक राजधानी में पहुंचे।
दिल्ली पहुंचने वालों में कुछ प्रमुख चेहरे शामिल हैं – पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह, विधानसभा स्पीकर सत्यव्रत सिंह, भूतपूर्व मंत्री वाई. खेमचंद सिंह और प्रदेश BJP अध्यक्ष ए. शारदा देवी। इन सभी की मौजूदगी बताती है कि पार्टी सरकार गठन को लेकर गंभीर है।
मंगलवार दोपहर हो सकता है बड़ा ऐलान
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर 3 बजे विधायक दल के नेता की घोषणा की जा सकती है। इसके तुरंत बाद राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा प्रस्तुत किया जाएगा। पार्टी के आंतरिक सूत्रों ने एक दिलचस्प जानकारी दी है – कुकी-जो समुदाय को संतुष्ट रखने के लिए 10 कुकी विधायकों में से किसी एक को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। यह कदम राज्य में शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
कैसे लगा था राष्ट्रपति शासन?
फरवरी 2025 में मणिपुर की राजनीतिक स्थिति बदल गई थी। 9 फरवरी 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अपना इस्तीफा सौंप दिया था। यह निर्णय राज्य में लगातार दो वर्षों तक चली हिंसा को रोकने में विफलता के बाद आया था।
60 सदस्यीय विधानसभा को तुरंत निलंबित कर दिया गया। बीरेन सिंह के पद छोड़ने के महज चार दिन बाद, 13 फरवरी 2025 से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया। अब 12 फरवरी 2026 राष्ट्रपति शासन की समाप्ति की अंतिम तिथि है, इसलिए भाजपा तेजी से सरकार बनाने की कोशिश में जुटी है।
मणिपुर विधानसभा में BJP की मजबूत स्थिति
वर्तमान में मणिपुर विधानसभा में भाजपा के 37 विधायक मौजूद हैं, जो बहुमत के लिए काफी है। 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी को 32 सीटें मिली थीं, लेकिन बाद में जनता दल (यूनाइटेड) के 5 विधायक भाजपा में शामिल हो गए, जिससे संख्या बढ़कर 37 हो गई।
विधानसभा में अन्य दलों की स्थिति देखें तो नेशनल पीपल्स पार्टी के 5 विधायक हैं, कांग्रेस के भी 5 विधायक हैं, कुकी पीपल्स अलायंस के 2, JD(U) का 1 विधायक और 3 निर्दलीय विधायक हैं। एक सीट खाली है क्योंकि वहां के विधायक का निधन हो गया था। भाजपा की सरकार का कार्यकाल 2027 तक है, इसलिए पार्टी जल्द से जल्द सत्ता में वापसी चाहती है।
2023 से जारी हिंसा की त्रासदी
मई 2023 से मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई हिंसा ने राज्य को झकझोर कर रख दिया है। अब तक इस हिंसा में 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, 1500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं और लगभग 70,000 लोग विस्थापित हो गए हैं।
राज्य में लगभग 10 महीने तक इंटरनेट सेवाएं बंद रहीं, जो भारत में किसी भी राज्य में सबसे लंबी इंटरनेट बंदी का रिकॉर्ड है। हिंसा के दौरान भीड़ ने पुलिस से 6,020 हथियार लूट लिए। करीब 400 चर्चों और 132 मंदिरों पर हमले हुए, जो सांप्रदायिक तनाव की गंभीरता को दर्शाता है।
हिंसा की जड़ें: तीन प्रमुख कारण
अनुसूचित जनजाति का दर्जा विवाद
14 अप्रैल 2023 को मणिपुर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह मैतेई समुदाय के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने पर सिफारिश केंद्र को भेजे। इस निर्णय ने कुकी समुदाय में गुस्से की लहर पैदा कर दी और हिंसा भड़क उठी।
कुकी पहले से ही ST श्रेणी में आते हैं। उनकी चिंता यह है कि यदि मैतेई को भी यह दर्जा मिल गया, तो वे पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन खरीद सकेंगे। मणिपुर के सिर्फ 10% इलाके में इंफाल घाटी है जहां मैतेई बहुसंख्यक हैं। शेष 90% पहाड़ी इलाका कुकी और नगा समुदायों का है, जो आदिवासी भूमि के तहत सुरक्षित है। मैतेई वर्तमान में वहां जमीन नहीं खरीद सकते। कुकी का डर है कि ST दर्जा मिलने से उनका सांस्कृतिक, सामाजिक और भौगोलिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
अलग प्रशासन की मांग
कुकी समुदाय ‘कुकीलैंड’ या ‘जूमलैंड’ के नाम से अलग प्रशासनिक स्वायत्तता की मांग कर रहा है। मैतेई समुदाय और राज्य सरकार इस मांग को मणिपुर की अखंडता के लिए बड़ा खतरा मानते हैं। यह मुद्दा दोनों समुदायों के बीच गहरी खाई पैदा कर रहा है।
ड्रग्स तस्करी के आरोप
कुकी समुदाय पर म्यांमार से नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध अफीम की खेती का आरोप लगाया जाता रहा है। सरकार ने भी इस संबंध में कई बार कार्रवाई की है।
हालांकि, कुकी समुदाय का कहना है कि यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है। उनका आरोप है कि मणिपुर की पूर्व भाजपा सरकार मैतेई समुदाय का पक्ष लेती थी। वे सुरक्षा बलों और पुलिस पर भी एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हैं, जिससे उनका सरकार के प्रति अविश्वास लगातार बढ़ता गया।
जनसांख्यिकी का संवेदनशील समीकरण
मणिपुर की 38 लाख की आबादी में मैतेई समुदाय लगभग 53% है जो मुख्यतः इंफाल घाटी में रहता है। वहीं कुकी-नगा समुदाय करीब 40% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और पहाड़ी इलाकों में बसे हुए हैं। यह जनसांख्यिकीय विभाजन ही राज्य की राजनीति और सामाजिक गतिशीलता को प्रभावित करता है।
2022 के चुनाव परिणाम
2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया था। पार्टी को 32 सीटें मिली थीं, जबकि 2017 में सिर्फ 21 सीटें थीं। नेशनल पीपल्स पार्टी को 7 सीटें मिलीं (2017 में 4), जदयू को 6 सीटें मिलीं। कांग्रेस को भारी झटका लगा – उसकी सीटें 28 से घटकर सिर्फ 5 रह गईं। नगा पीपल्स फ्रंट को 5 सीटें मिलीं (2017 में 4) और अन्य दलों व निर्दलीयों को 5 सीटें मिलीं।
आगे की राह
अब सवाल यह है कि क्या नई सरकार राज्य में शांति और सद्भाव स्थापित कर पाएगी? क्या कुकी समुदाय को उपमुख्यमंत्री का पद देने से वास्तव में स्थिति सुधरेगी? क्या विधायक दल के नेता के रूप में फिर से बीरेन सिंह को चुना जाएगा या कोई नया चेहरा सामने आएगा?
ये सभी सवाल मंगलवार को होने वाली बैठक के बाद स्पष्ट होंगे। फिलहाल यह तय है कि भाजपा राष्ट्रपति शासन की समय सीमा खत्म होने से पहले सरकार बनाना चाहती है। राज्य की जनता को उम्मीद है कि नई सरकार हिंसा को पूरी तरह रोकने और दोनों समुदायों के बीच सामंजस्य स्थापित करने में सफल होगी। मणिपुर को शांति और विकास की सख्त जरूरत है, और यह जिम्मेदारी अब आने वाली नई सरकार की होगी।
