लीबिया के तानाशाह रहे गद्दाफी के बेटे सैफ अल-इस्लाम की गोली मारकर हत्या, जानिए पूरा मामला

मंगलवार को लीबिया में पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के सुपुत्र सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया गया। यह खबर लीबियाई समाचार चैनल फवासेल ने प्रसारित की, जिसके अनुसार जिंटान नगर में उनके आवास पर चार हमलावरों ने धावा बोला और उनकी जान ले ली।

 

मौत की पुष्टि

सैफ के कानूनी सलाहकार खालिद अल-जैदी और राजनीतिक परामर्शदाता अब्दुल्ला ओथमान ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस दुखद समाचार की पुष्टि की। विडंबना यह है कि प्रारंभिक विवरणों में न तो हत्या के उद्देश्य का खुलासा हुआ और न ही हमलावरों की पहचान सामने आई।

 

दिलचस्प बात यह है कि सैफ की बहन ने इस घटना के बारे में भिन्न जानकारी दी है। बीबीसी ने लीबियाई टेलीविजन के हवाले से सूचना दी कि सैफ की मृत्यु लीबिया-अल्जीरिया की सरहद के आसपास हुई। 53 वर्षीय सैफ अल-इस्लाम को एक समय अपने पिता का संभावित उत्तराधिकारी समझा जाता था।

Saif al-Islam son of Libyan dictator Gaddafi shot dead

शक्तिशाली परिवार

25 जून 1972 को त्रिपोली में जन्मे सैफ अल-इस्लाम को दशकों तक अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी का राजनीतिक वारिस माना जाता रहा। गद्दाफी खानदान ने लीबिया पर लंबे समय तक शासन किया, और सैफ उस प्रभावशाली परिवार में सबसे शिक्षित और वैश्विक मंच पर पहचाने जाने वाले व्यक्ति थे।

 

उनकी शिक्षा-दीक्षा लीबिया की सीमाओं से परे हुई। उन्होंने प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अध्ययन किया। 2000 के दशक के दौरान, वे स्वयं को एक प्रगतिशील नेता के तौर पर प्रस्तुत करते थे। पश्चिमी राष्ट्रों के साथ संबंध मजबूत करना, आर्थिक विकास और कुछ मात्रा में राजनीतिक परिवर्तन उनके प्रमुख एजेंडे थे। इसी कारण अनेक अंतरराष्ट्रीय नेता और मीडिया उन्हें गद्दाफी सत्ता का उदार और समकालीन प्रतिनिधि मानने लगे थे।

 

अनौपचारिक लेकिन शक्तिशाली

यद्यपि सैफ ने कभी कोई औपचारिक सरकारी पद धारण नहीं किया, फिर भी लीबिया में अपने पिता के बाद वे सर्वाधिक प्रभावशाली व्यक्ति थे। 2000 के दशक में उन्होंने लीबिया और पश्चिमी देशों के बीच संबंधों को सुधारने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी छवि एक सेतु निर्माता की थी जो पुरानी और नई दुनिया को जोड़ सकते थे।

 

अरब स्प्रिंग और पतन की शुरुआत

2011 में जब अरब स्प्रिंग की लहर लीबिया तक पहुंची, तो गद्दाफी शासन के विरुद्ध जनविद्रोह भड़क उठा। इस निर्णायक मोड़ पर, सैफ ने अपने पिता का पक्ष लिया और विद्रोहियों को दबाने का प्रयास किया।

 

टेलीविजन पर आकर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी दी कि विरोध करने वालों को दंडित किया जाएगा। सैफ विद्रोहियों को तिरस्कारपूर्वक ‘चूहे’ कहते थे और घोषणा करते थे कि सरकार अंतिम गोली तक संघर्ष करेगी। उनका प्रसिद्ध कथन था, “हम लीबिया में लड़ेंगे, यहीं प्राण त्यागेंगे।”

 

यह उदार और सुधारवादी छवि से एकदम विपरीत रुख था, जो उन्होंने पहले बनाई थी। इस परिवर्तन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चौंका दिया।

 

गिरफ्तारी और मौत की सजा

क्रांति के दौरान उनके पिता मुअम्मर गद्दाफी मारे गए और सैफ भागने के प्रयास में असफल रहे। नवंबर 2011 में जिंटान शहर की मिलिशिया सेना ने उन्हें पकड़ लिया। 2015 में लीबियन न्यायालय ने उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई – वह भी बिना अदालत में उपस्थित किए।

 

अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) ने उन पर युद्ध अपराधों के गंभीर आरोप लगाए। आरोप था कि उन्होंने अपने पिता की सरकार के साथ मिलकर सामान्य नागरिकों के विरुद्ध हिंसा और दमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सैफ को 2017 तक जिंटान में बंदी बनाकर रखा गया।

 

रिहाई और रहस्यमय जीवन

2017 में एक सामान्य क्षमादान के अंतर्गत उन्हें मुक्त कर दिया गया। रिहाई के उपरांत कई वर्षों तक सैफ सार्वजनिक तौर पर बेहद कम दिखाई दिए और उनकी स्थिति रहस्य में डूबी रही। पर्दे के पीछे से वे राजनीति में पुनः प्रवेश की योजना बना रहे थे।

 

विवादास्पद राजनीतिक वापसी का प्रयास

2021 में सैफ ने लीबिया के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की, जो अत्यंत विवादास्पद साबित हुई। अनेक लोग उन्हें गद्दाफी शासनकाल के अत्याचारों के लिए जिम्मेदार मानते थे, इसलिए चुनाव स्थगित हो गया। वे पॉपुलर फ्रंट फॉर द लिबरेशन ऑफ लीबिया (PFLL) पार्टी से संबद्ध थे।

 

चुनाव आयोग ने प्रारंभ में उनकी उम्मीदवारी को अस्वीकार कर दिया, यह कहते हुए कि आपराधिक रिकॉर्ड के कारण वे चुनाव नहीं लड़ सकते। सैफ ने इसके विरोध में न्यायालय में अपील दायर की। दिसंबर 2021 में न्यायालय ने निर्णय दिया कि वे उम्मीदवार बने रह सकते हैं और उनकी उम्मीदवारी बहाल कर दी गई। परंतु लीबिया की जटिल राजनीतिक स्थिति के चलते चुनाव संपन्न ही नहीं हो सका।

 

लीबिया के बारे में:

उत्तरी अफ्रीका में स्थित लीबिया एक तेल-संपन्न देश है जिसका बड़ा हिस्सा मरुस्थलीय है। 1951 में स्वतंत्रता मिलने से पूर्व, लीबिया शताब्दियों तक विदेशी आधिपत्य में रहा। स्वतंत्रता के पश्चात देश ने तेल भंडारों के माध्यम से विपुल समृद्धि हासिल की।

Libya Map

मुअम्मर गद्दाफी ने 1969 में सत्तापलट कर शासन प्राप्त किया और लगभग चार दशकों तक शासन किया। त्रिपोली राजधानी वाले इस देश की जनसंख्या करीब 6.4 मिलियन है। लगभग 1.77 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस राष्ट्र में अरबी मुख्य भाषा है और इस्लाम प्रमुख धर्म है।

 

लीबिया को मुख्यतः उसके प्राचीन इतिहास, गद्दाफी के 42 वर्षीय तानाशाही शासन और वर्तमान अराजकता के लिए जाना जाता है।

 

एक विरासत का अंत

सैफ अल-इस्लाम की हत्या एक युग के अंत का प्रतीक है। वे गद्दाफी परिवार के अंतिम प्रमुख सदस्यों में से एक थे जो राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने का प्रयास कर रहे थे। उनकी मृत्यु लीबिया की जटिल और हिंसक राजनीति का एक और दुखद अध्याय है, जो 2011 की क्रांति के बाद से अस्थिरता में डूबा हुआ है।

 

यह घटना लीबिया में शांति और स्थिरता की तलाश को और भी कठिन बना सकती है, जहां विभिन्न गुट और मिलिशिया अभी भी सत्ता के लिए संघर्षरत हैं।