टैरिफ डील के बीच वाशिंगटन में जयशंकर-रुबियो के बीच हुई मुलाकात, जानिए क्यों है खास यह बातचीत

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच मंगलवार देर शाम वाशिंगटन में महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच एक अहम व्यापार समझौता अंतिम रूप ले चुका है, जिसके तहत वाशिंगटन ने भारतीय उत्पादों पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है।

 

यह बैठक जयशंकर की 2 से 4 फरवरी तक चलने वाली तीन दिवसीय अमेरिकी यात्रा का हिस्सा थी। बुधवार को होने वाले महत्वपूर्ण खनिज मंत्रिस्तरीय सम्मेलन से पहले यह वार्ता काफी अहम मानी जा रही है।

Jaishankar and Rubio meet in Washington amid tariff deal

व्यापक चर्चा में शामिल रहे कई मुद्दे

दोनों नेताओं ने अपनी वार्ता में क्वाड संवाद के माध्यम से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। जयशंकर ने इस चर्चा को “व्यापक” बताते हुए कहा कि परमाणु सहयोग, रक्षा संबंध, महत्वपूर्ण खनिज, व्यापार और ऊर्जा जैसे विभिन्न विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

गौरतलब है कि क्वाड समूह में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत साझेदार देशों के रूप में शामिल हैं।

 

इससे पहले दिन में, जयशंकर ने अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट से भी मुलाकात की थी। दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने और रणनीतिक सहयोग मजबूत करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया।

 

ट्रंप प्रशासन में नई रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस वापसी के बाद यह व्यापार समझौता विशेष महत्व रखता है। नई टैरिफ नीतियों और कठोर व्यापारिक रुख ने वैश्विक वाणिज्य को प्रभावित किया है, क्योंकि अमेरिका दुनियाभर में बातचीत में अधिक मुखर दृष्टिकोण अपना रहा है।

 

सोशल मीडिया पर जयशंकर का संदेश

विदेश मंत्री ने बैठक के बाद एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “आज दोपहर अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो से मिलकर प्रसन्नता हुई। यह एक विस्तृत बातचीत थी जिसमें हमारे द्विपक्षीय सहयोग एजेंडा, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।”

 

जयशंकर ने आगे कहा कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख स्तंभों पर विचार हुआ, जिनमें व्यापार, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज और प्रौद्योगिकी शामिल हैं। “साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न तंत्रों की शीघ्र बैठकों पर सहमति बनी,” उन्होंने लिखा।

 

अमेरिकी विदेश विभाग का बयान

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रिंसिपल डिप्टी प्रवक्ता टॉमी पिगॉट द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, खनन और प्रसंस्करण पर सहयोग को औपचारिक बनाने पर चर्चा की। साथ ही, दोनों लोकतंत्रों के बीच घनिष्ठ आर्थिक और ऊर्जा सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।

 

“विदेश मंत्री रुबियो और विदेश मंत्री जयशंकर ने राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुए व्यापार समझौते का स्वागत किया,” विज्ञप्ति में कहा गया।

 

“दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि हमारे लोकतंत्रों को मिलकर नए आर्थिक अवसरों को खोलने और साझा ऊर्जा सुरक्षा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की जरूरत है,” इसमें जोड़ा गया।

 

हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर फोकस

बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र भी चर्चा का विषय रहा। दोनों नेताओं ने साझा रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए एक स्थिर और समृद्ध क्षेत्र की आवश्यकता पर बल दिया।

 

विज्ञप्ति में कहा गया, “विदेश मंत्री रुबियो और विदेश मंत्री जयशंकर ने क्वाड के माध्यम से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए बैठक समाप्त की। उन्होंने स्वीकार किया कि हमारे साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए एक समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र महत्वपूर्ण बना हुआ है।”

 

महत्वपूर्ण खनिज मंत्रिस्तरीय सम्मेलन की तैयारी

इस बीच, अमेरिका वाशिंगटन में पहला महत्वपूर्ण खनिज मंत्रिस्तरीय सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग के कार्यालय द्वारा पहले जारी सूचना के अनुसार, इसमें 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे। इसका उद्देश्य वैश्विक महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित और विविध बनाने में सहयोग गहरा करना है।

 

मंत्रिस्तरीय सम्मेलन से पहले, रुबियो के नेतृत्व वाला अमेरिकी विदेश विभाग महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं पर सहयोग मजबूत करने के लिए दुनियाभर के साझेदारों को एकत्रित करेगा। रुबियो इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे, जिसमें 50 से अधिक देशों के प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी अपेक्षित है।

 

इस ऐतिहासिक पहल का उद्देश्य उन महत्वपूर्ण खनिजों को सुरक्षित करने में सहयोग के लिए सामूहिक गति बनाना है जो तकनीकी नवाचार, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यावश्यक हैं।

 

कार्यक्रम की शुरुआत अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस, विदेश मंत्री रुबियो और अन्य वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के संबोधन से होगी।