उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हुई एक दर्दनाक घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि समाज के सामने कई गहरे सवाल भी खड़े कर दिए हैं। भारत सिटी बी-1 टॉवर की नौवीं मंजिल से तीन नाबालिग बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना अब केवल एक सुसाइड केस नहीं रह गई है, बल्कि यह डिजिटल दुनिया, बच्चों की मानसिक स्थिति, पारिवारिक तनाव और सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर गंभीर बहस का विषय बन गई है।
3 फरवरी की रात करीब दो बजे 16 वर्षीय निशिका, 14 वर्षीय प्राची और 12 वर्षीय पाखी ने अपने घर की बालकनी से छलांग लगाकर जान दे दी। शुरुआती घंटों में यह मामला एक ऑनलाइन कोरियन गेम से जोड़ा गया, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस जांच आगे बढ़ी, परत-दर-परत कई चौंकाने वाली बातें सामने आती चली गईं।
शुरुआती थ्योरी से बदली जांच की दिशा
घटना के बाद पहले यह आशंका जताई गई कि तीनों बहनें किसी टास्क-बेस्ड कोरियन गेम के प्रभाव में थीं और उसी से जुड़ी मानसिक स्थिति के चलते उन्होंने आत्महत्या की। लेकिन लगभग दस घंटे की जांच, परिवार के बयान और कमरे से मिले सबूतों के बाद पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि घटना के पीछे हालात कहीं अधिक जटिल थे।
जांच में सामने आया कि घटना से कुछ समय पहले पिता चेतन ने बेटियों को फटकार लगाई थी और उनके मोबाइल फोन छीन लिए थे। यही वह बिंदु माना जा रहा है, जिसने बच्चियों को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया।
कोविड काल से शुरू हुआ बदलाव
पुलिस और परिवार के बयानों के अनुसार, इस पूरी कहानी की जड़ें वर्ष 2020 में जाती हैं। कोविड महामारी के दौरान जब स्कूल बंद हुए और पढ़ाई बाधित हो गई, तब तीनों बहनों का अधिकांश समय मोबाइल फोन और इंटरनेट पर बीतने लगा।
पहले निशिका को कोरियन म्यूजिक, फिल्में और वेब सीरीज देखने की आदत लगी। धीरे-धीरे यही रुचि उसकी पहचान बनती चली गई। बाद में छोटी बहनें प्राची और पाखी भी उसी दुनिया में खोती चली गईं। कुछ ही वर्षों में तीनों बहनों की सोच, व्यवहार और जीवनशैली पूरी तरह बदल चुकी थी।
कोरियन संस्कृति में ढलती पहचान
परिवार के सदस्यों और पुलिस को मिली डायरी से यह साफ हुआ कि बच्चियां खुद को भारतीय पहचान से अलग करने लगी थीं। वे न केवल कोरियन संस्कृति को पसंद करती थीं, बल्कि खुद को कोरियन मानने लगी थीं।
उन्होंने अपने नाम बदल लिए थे, कोरियन भाषा सीख ली थी और आपस में उसी भाषा में बातचीत करती थीं। पहनावा, खानपान और बोलचाल – हर स्तर पर वे कोरियन जीवनशैली अपनाने लगी थीं। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि वे अपने पिता को भारतीय और खुद को कोरियन बताने लगी थीं।
सोशल मीडिया और यूट्यूब की भूमिका
साल 2022 के बाद निशिका का झुकाव सोशल मीडिया की ओर और बढ़ गया। वह कोरियन रील्स और वीडियो लगातार देखने लगी। कुछ समय बाद तीनों बहनों ने मिलकर एक यूट्यूब चैनल भी शुरू किया, जहां वे कोरियन संस्कृति से जुड़ा कंटेंट अपलोड करती थीं।
हालांकि, पिता चेतन को यह गतिविधियां पसंद नहीं थीं। पढ़ाई से दूरी, मोबाइल पर बढ़ती निर्भरता और सोशल मीडिया में डूबते बच्चों को देखकर उन्होंने सख्ती दिखाई। इसी कारण मोबाइल फोन छीन लिए गए थे। उल्लेखनीय है कि यह यूट्यूब चैनल तीनों बहनों ने घटना से लगभग एक महीने पहले खुद ही डिलीट कर दिया था।
शिक्षा से कटाव और आर्थिक दबाव
तीनों बहनें औपचारिक शिक्षा में भी पीछे रह गई थीं। निशिका चौथी कक्षा, प्राची तीसरी और पाखी दूसरी कक्षा तक ही पढ़ पाई थीं। पढ़ाई में रुचि कम होती गई और फेल होने के बाद उन्होंने स्कूल जाना पूरी तरह छोड़ दिया।
पिता चेतन पहले ही आर्थिक संकट से गुजर रहे थे। पुलिस जांच में सामने आया कि उनके व्यवसाय में करीब दो करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। इसी आर्थिक दबाव के चलते उन्होंने बच्चों की पढ़ाई पर ज्यादा जोर नहीं दिया और यह सोचकर इंतजार करने लगे कि हालात सुधरने पर दोबारा स्कूल में दाखिला करवाया जाएगा।
छोटी बहन को लेकर बढ़ा तनाव
तीनों बहनों ने अपनी चार साल की छोटी बहन को भी अपने साथ रखना शुरू कर दिया था। वे उसे भी कोरियन वीडियो दिखाती थीं और भाषा सिखाने की कोशिश कर रही थीं। जब पिता को इस बात का पता चला तो उन्होंने सख्ती से उन्हें रोका और छोटी बच्ची को इस माहौल से दूर रखने को कहा।
सूत्रों के अनुसार, इसी बात के बाद तीनों बहनों ने छोटी बहन से बातचीत बंद कर दी और खुद को उससे अलग कर लिया।
वह रात जिसने सब कुछ बदल दिया
3 फरवरी की रात तीनों बच्चियां अपने पिता की पहली पत्नी के साथ कमरे में सो रही थीं। रात करीब डेढ़ बजे उन्होंने मां के गालों को चूमा, “आई लव यू” कहा और चुपचाप कमरे से बाहर निकल गईं।
इसके बाद वे पूजा वाले कमरे में गईं, बालकनी के पास दो स्टेप वाला स्टूल रखा और कमरे को अंदर से बंद कर लिया। फिर एक-एक करके नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी।
घटना के बाद जब परिवार ने दरवाजा तोड़ा, तो तीनों की जान जा चुकी थी। कमरे से मिली डायरी के 18 पन्नों में लिखा सुसाइड नोट पुलिस के लिए अहम सबूत बना।
सुसाइड नोट में क्या लिखा था
पुलिस के अनुसार, डायरी में लिखा था- “मम्मी-पापा सॉरी… गेम नहीं छोड़ पा रही हूं। अब आपको एहसास होगा कि हम गेम से कितना प्यार करते थे, जिसे आप छुड़वाना चाहते थे।” यह पंक्तियां बच्चियों की मानसिक उलझन और भावनात्मक टूटन को दर्शाती हैं।
पारिवारिक रिश्तों की उलझन
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि परिवार का माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था। चेतन ने पहले अपनी पत्नी से शादी की थी और बाद में उसकी छोटी बहन हिना से दूसरा विवाह किया। एक साल से उनकी तीसरी और सबसे छोटी बहन भी उसी घर में रह रही थी।
मई 2025 में पहली पत्नी के साथ बड़ा विवाद हुआ था, जिसके बाद वह घर छोड़कर चली गई थी। चेतन ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी और बाद में उसे दिल्ली से वापस लाया गया।
पुलिस के सामने खड़े पांच बड़े सवाल
हालांकि पुलिस आत्महत्या की पुष्टि कर चुकी है, लेकिन जांच में अब भी कुछ सवाल अनुत्तरित हैं:
- बालकनी में रेलिंग के बाहर खड़े होने की जगह नहीं थी, फिर बच्ची के बैठने की बात कैसे आई?
- 85 फीट की ऊंचाई से गिरने के बावजूद शव दीवार के बेहद पास कैसे मिले?
- तीनों ने एक जैसी छलांग लगाई, फिर शव अलग-अलग दूरी पर क्यों गिरे?
- घटना से पहले घर में झगड़े और गाली-गलौज की बात क्यों सामने आई?
- जांच के दौरान दोनों पत्नियों का सामने न आना क्या किसी दबाव की ओर इशारा करता है?
पुलिस का आधिकारिक पक्ष
एडिशनल पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी के अनुसार, मोबाइल फोन में कोरियन कंटेंट, बदले हुए नाम और भाषा से जुड़े सबूत मिले हैं। सभी तथ्यों के आधार पर जांच जारी है।
गाजियाबाद की यह घटना केवल तीन मासूम जिंदगियों की कहानी नहीं है। यह डिजिटल युग में बच्चों की मानसिक सुरक्षा, पारिवारिक संवाद और जिम्मेदार निगरानी की गंभीर चेतावनी है।
अगर समय रहते संवाद, समझ और मार्गदर्शन मिलता, तो शायद यह त्रासदी टल सकती थी। यह मामला समाज, माता-पिता और नीति-निर्माताओं-सभी के लिए आत्ममंथन का विषय है।
