ब्रिटेन ने एयर इंडिया से बोइंग ड्रीमलाइनर में ईंधन बदलने की घटना पर जवाब मांगा, जानिए क्या है पूरा मामला?

भारतीय विमानन उद्योग एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय निगरानी के केंद्र में आ गया है। एअर इंडिया के एक बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान में दर्ज की गई तकनीकी अनियमितता ने न केवल भारत, बल्कि ब्रिटेन की विमानन सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है।

 

ब्रिटेन की सिविल एविएशन अथॉरिटी (CAA) ने इस मामले में एयर इंडिया से सात दिनों के भीतर विस्तृत और संतोषजनक जवाब मांगा है। चेतावनी दी गई है कि समय पर स्पष्टीकरण नहीं मिलने की स्थिति में नियामक कार्रवाई की जा सकती है।

 

यह मामला केवल एक तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उड़ान सुरक्षा, नियामक प्रक्रियाओं और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता से जुड़े गंभीर सवाल भी शामिल हैं।

 

लंदन से बेंगलुरु तक: क्या हुआ उस उड़ान में?

यह घटना 1 फरवरी की है, जब एअर इंडिया की फ्लाइट AI-132, जो लंदन से बेंगलुरु के लिए रवाना होने वाली थी, अपने प्री-फ्लाइट चरण में थी। विमान के चालक दल ने जांच के दौरान यह नोटिस किया कि बाएं इंजन का फ्यूल कंट्रोल स्विच सामान्य तरीके से “रन” स्थिति में लॉक नहीं हो रहा है।

 

हल्का ऊर्ध्वाधर दबाव डालने पर स्विच अपनी जगह से हटने जैसा व्यवहार कर रहा था, जो कि असामान्य माना जाता है। हालांकि, बाद में किए गए प्रयास में स्विच सही तरीके से लॉक हो गया और स्थिर पाया गया। इसके बाद चालक दल ने उड़ान जारी रखने का निर्णय लिया।

 

विमान ने लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से उड़ान भरी और लगभग 200 यात्रियों को लेकर सुरक्षित रूप से बेंगलुरु पहुंचा। लेकिन लैंडिंग के बाद पायलट ने इस संभावित तकनीकी समस्या की औपचारिक रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद विमान को तुरंत ग्राउंड कर दिया गया।

Britain asks Air India to respond to the Boeing Dreamliner fuel swap incident

ब्रिटिश नियामक की आपत्ति: उड़ान की अनुमति क्यों दी गई?

ब्रिटेन की CAA ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए एयर इंडिया को एक आधिकारिक पत्र भेजा। इस पत्र में सबसे अहम सवाल यही उठाया गया कि जब चालक दल ने ईंधन नियंत्रण स्विच में असामान्य व्यवहार देखा था, तो विमान को उड़ान की अनुमति किस आधार पर दी गई।

 

CAA ने यह भी जानना चाहा है कि लंदन में विमान पर क्या-क्या मेंटेनेंस या तकनीकी जांच की गई, किस इंजीनियरिंग लॉग के आधार पर उड़ान को सुरक्षित माना गया और निर्णय लेने की प्रक्रिया में कौन-कौन शामिल था।

 

नियामक ने स्पष्ट किया है कि यदि सात दिनों के भीतर पूरा और विश्वसनीय जवाब नहीं मिला, तो एअर इंडिया के साथ-साथ उसके बोइंग 787 बेड़े के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

 

एअर इंडिया के पास कितने ड्रीमलाइनर?

वर्तमान में एअर इंडिया के पास बोइंग 787 मॉडल के 33 विमान हैं, जिनमें से 28 सक्रिय रूप से परिचालन में हैं। ऐसे में किसी एक विमान में दर्ज की गई तकनीकी समस्या को हल्के में लेना न केवल सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकता है, बल्कि पूरे बेड़े पर सवाल खड़े कर सकता है।

 

हालांकि विमानन विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि किसी घटना के बाद विदेशी नियामक द्वारा जानकारी मांगना एक मानक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है, जिसे सीधे दंडात्मक कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

 

एयर इंडिया की सफाई: “एहतियात के तौर पर जांच”

एयर इंडिया ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उसने अपने सभी परिचालन बोइंग 787 विमानों में फ्यूल कंट्रोल स्विच की एहतियाती जांच पूरी कर ली है। एयरलाइन के अनुसार, किसी भी विमान में कोई तकनीकी दोष नहीं पाया गया।

 

एयर इंडिया ने अपने बयान में कहा कि यह कदम “एक पायलट द्वारा दर्ज अवलोकन के बाद, अत्यधिक सावधानी बरतते हुए” उठाया गया। कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि भारत के विमानन नियामक DGCA ने इस प्रक्रिया की सक्रिय निगरानी की और स्वतंत्र निरीक्षण के बाद स्विच सिस्टम को मंजूरी दी।

 

इसके अलावा एयरलाइन ने यह भरोसा भी दिलाया कि वह मूल उपकरण निर्माता (OEM) द्वारा सुझाई गई ऑपरेटिंग प्रक्रियाओं को सभी उड़ान चालक दल सदस्यों तक पहुंचाने के लिए नियामक निर्देशों का पालन करेगी।

 

DGCA की प्रारंभिक जांच में क्या सामने आया?

भारतीय नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि फ्यूल कंट्रोल स्विच के संचालन के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का स्पष्ट रूप से पालन नहीं किया गया था

 

DGCA ने एयर इंडिया को निर्देश दिया है कि सभी पायलटों और चालक दल सदस्यों को सही संचालन प्रक्रिया का अनिवार्य रूप से प्रशिक्षण दिया जाए और भविष्य में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए।

 

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि बेंगलुरु में किए गए निरीक्षण के दौरान बाएं और दाएं दोनों स्विच संतोषजनक स्थिति में पाए गए।

 

सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने उठाए गंभीर सवाल

मंत्रालय के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन, जो विमानन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाला एक गैर-सरकारी संगठन है, ने एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

 

फाउंडेशन का कहना है कि जब AAIB की जांच सक्रिय है, तब किसी अन्य एजेंसी द्वारा किसी प्रणाली को सार्वजनिक रूप से “क्लीन चिट” देना जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

 

फाउंडेशन के संस्थापक-निदेशक और वरिष्ठ विमानन सुरक्षा अधिवक्ता कैप्टन अमित सिंह ने चेतावनी दी कि इससे साक्ष्यों की निष्पक्षता, जांच की दिशा और सार्वजनिक भरोसे-तीनों पर असर पड़ सकता है।

 

AAIB से क्या मांग की गई?

सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने AAIB से कई ठोस कदम उठाने की मांग की है, जिनमें शामिल हैं:

  • AI-132 घटना से जुड़े सभी साक्ष्यों को तुरंत अपने नियंत्रण में लेना
  • एक संरक्षण आदेश जारी करना, जिससे किसी भी संबंधित साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न हो
  • यह स्पष्ट करना कि जांच पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष रहेगी
  • यह जांच करना कि DGCA या अन्य एजेंसियों के सार्वजनिक बयानों का किसी चल रही जांच पर नकारात्मक प्रभाव तो नहीं पड़ा

 

अहमदाबाद दुर्घटना की छाया

इस पूरे मामले को और भी संवेदनशील बनाता है पिछले वर्ष 12 जून को हुई अहमदाबाद दुर्घटना। उस हादसे में एअर इंडिया का बोइंग 787-8 विमान टेक-ऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई थी

 

AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया था कि उड़ान के शुरुआती क्षणों में ईंधन आपूर्ति बाधित हुई थी और फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद पाए गए थे। इसके बाद DGCA ने सभी एयरलाइनों को फ्यूल स्विच सिस्टम की जांच के निर्देश दिए थे।

 

फ्यूल कंट्रोल स्विच: कितनी अहम है यह प्रणाली?

फ्यूल कंट्रोल स्विच कॉकपिट में थ्रस्ट लीवर के पास स्थित होते हैं और इंजन में ईंधन की आपूर्ति को नियंत्रित करते हैं। बोइंग 787 जैसे दो-इंजन वाले विमानों में प्रत्येक इंजन के लिए एक अलग स्विच होता है।

 

ये स्विच स्प्रिंग-लोडेड और डिटेंट लॉक सिस्टम से लैस होते हैं। इन्हें चलाने के लिए तीन स्पष्ट चरणों की आवश्यकता होती है-पकड़ना, लॉक से बाहर निकालना और फिर छोड़ना। विशेषज्ञों के अनुसार, यह डिजाइन गलती से स्विच हिलने की संभावना को न्यूनतम करने के लिए बनाया गया है।

 

निष्कर्ष: जवाब से तय होगा आगे का रास्ता

एअर इंडिया का यह मामला तकनीकी जांच से कहीं आगे निकल चुका है। अब यह विमानन सुरक्षा, नियामक समन्वय और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता की परीक्षा बन गया है।

 

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि एअर इंडिया ब्रिटिश CAA को किस तरह का जवाब देती है और क्या यह मामला केवल स्पष्टीकरण तक सीमित रहेगा या किसी बड़ी कार्रवाई का कारण बनेगा।

 

एक बात तय है-वैश्विक विमानन में अब हर निर्णय अंतरराष्ट्रीय निगरानी के दायरे में है, और सुरक्षा से जुड़े सवालों पर किसी भी तरह की अस्पष्टता स्वीकार नहीं की जाएगी।