ईरान में बढ़ता संकट: अमेरिकी नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की चेतावनी, परमाणु वार्ता से पहले हालात बेहद तनावपूर्ण

ईरान में मौजूदा हालात तेजी से गंभीर होते जा रहे हैं। बढ़ती अशांति, व्यापक विरोध प्रदर्शन, संचार सेवाओं में बार-बार रुकावट और यात्रा पर लगी पाबंदियों के बीच अमेरिका ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। वर्चुअल अमेरिकी दूतावास ने साफ शब्दों में कहा है कि देश की सुरक्षा स्थिति अत्यंत खराब हो चुकी है और किसी भी वक्त हालात और बिगड़ सकते हैं।

 

अमेरिकी अधिकारियों ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना देरी किए ईरान छोड़ दें और इस प्रक्रिया में अमेरिकी सरकार से किसी प्रकार की आधिकारिक मदद की उम्मीद न रखें। चेतावनी में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में कांसुलर सहायता बेहद सीमित है और संकट की स्थिति में मदद मिल पाना लगभग असंभव हो सकता है।

 

सुरक्षा व्यवस्था चरमराई, आम जनजीवन प्रभावित

ईरान में इन दिनों देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक अस्थिरता का माहौल है। कई शहरों में सड़कों को बंद कर दिया गया है, सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं लगभग ठप हो चुकी हैं। इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क और लैंडलाइन सेवाएं बार-बार बाधित हो रही हैं, जिससे लोगों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूटता जा रहा है।

 

हवाई यात्रा भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने ईरान आने-जाने वाली उड़ानों को या तो सीमित कर दिया है या पूरी तरह रद्द कर दिया है। इससे देश छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के सामने गंभीर मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

crisis in Iran US citizens warned to leave the country immediately

“खुद बनाएं निकलने की योजना” – अमेरिकी दूतावास की सख्त सलाह

वर्चुअल अमेरिकी दूतावास ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि ईरान में अमेरिका के साथ कोई औपचारिक कूटनीतिक या कांसुलर संबंध नहीं हैं। ऐसे में अमेरिकी सरकार अपने नागरिकों को निकालने या संकट में सहायता देने की स्थिति में नहीं है।

 

दूतावास ने कहा है कि अगर किसी कारणवश तुरंत ईरान छोड़ पाना संभव नहीं हो, तो नागरिक किसी सुरक्षित स्थान पर रहें, पर्याप्त मात्रा में खाना, पानी, दवाइयां और जरूरी सामान इकट्ठा करके रखें। साथ ही इंटरनेट ब्लैकआउट की संभावना को देखते हुए परिवार और दोस्तों से संपर्क बनाए रखने के लिए वैकल्पिक तरीकों की योजना बनाने की सलाह दी गई है।

 

दोहरी नागरिकता वालों के लिए खतरा ज्यादा

अमेरिकी चेतावनी में खास तौर पर अमेरिका-ईरान की दोहरी नागरिकता रखने वाले लोगों को लेकर गंभीर चिंता जताई गई है। ईरान दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता, ऐसे में इन लोगों को केवल ईरानी नागरिक के तौर पर देखा जाता है।

 

दूतावास ने आगाह किया है कि अमेरिकी पासपोर्ट दिखाना या अमेरिका से किसी भी तरह का जुड़ाव जाहिर करना ईरानी अधिकारियों के लिए हिरासत या पूछताछ का कारण बन सकता है। ऐसे मामलों में गिरफ्तारी, लंबी पूछताछ या अनिश्चितकालीन हिरासत का खतरा बना रहता है। दोहरी नागरिकता वाले लोग ईरान से बाहर निकलने के लिए केवल ईरानी पासपोर्ट का ही इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

कांसुलर सेवाएं बंद, स्विट्जरलैंड निभा रहा भूमिका

अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंध न होने के कारण तेहरान में अमेरिकी दूतावास मौजूद नहीं है। ईरान में अमेरिका के हितों का प्रतिनिधित्व स्विट्जरलैंड का दूतावास करता है। हालांकि, मौजूदा हालात में रूटीन कांसुलर सेवाएं भी बंद हैं और किसी तरह की त्वरित सहायता मिलने की संभावना बेहद कम है।

 

अमेरिकी सरकार ने अपने नागरिकों से कहा है कि वे प्रदर्शन स्थलों, भीड़-भाड़ वाली जगहों और सरकारी इमारतों से दूर रहें, अपने मोबाइल फोन चार्ज रखें और स्थानीय मीडिया के जरिए हालात पर नजर बनाए रखें।

 

परमाणु वार्ता से पहले बढ़ा तनाव

इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच लगभग नौ महीने बाद पहली औपचारिक परमाणु वार्ता शुरू होने जा रही है। यह बातचीत ओमान की राजधानी मस्कट में आयोजित की जा रही है। जून 2025 में हुए संघर्ष के बाद से दोनों देशों के बीच संवाद पूरी तरह ठप पड़ा था।

 

वार्ता से पहले ही माहौल बेहद तनावपूर्ण है। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह कूटनीति को प्राथमिकता देता है, लेकिन बातचीत नाकाम होने की स्थिति में सैन्य विकल्पों से पीछे नहीं हटेगा।

 

व्हाइट हाउस की दो टूक चेतावनी

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि ओमान में होने वाली बातचीत से कोई ठोस समाधान निकले। हालांकि, उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका की मांग बिल्कुल स्पष्ट है-ईरान के पास किसी भी तरह की परमाणु क्षमता नहीं होनी चाहिए।

 

लेविट ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत विफल रहती है, तो राष्ट्रपति के पास कई विकल्प मौजूद हैं, जिनमें ताकत का इस्तेमाल भी शामिल है।

 

अमेरिका की चार शर्तें

अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने हाल ही में ईरान के सामने समझौते के लिए चार प्रमुख शर्तें रखी थीं-

  1. यूरेनियम संवर्धन पर पूर्ण प्रतिबंध
  2. पहले से संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजना
  3. लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या सीमित करना
  4. क्षेत्रीय प्रॉक्सी संगठनों को समर्थन देना बंद करना

 

ईरान ने इन शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया है और कहा है कि वार्ता केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहनी चाहिए।

 

मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव पर मतभेद

अमेरिका चाहता है कि बातचीत में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार रिकॉर्ड को भी शामिल किया जाए। वहीं, ईरान का रुख साफ है कि वह केवल परमाणु मुद्दे पर ही चर्चा करेगा।

 

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची राजनयिक दल के साथ मस्कट पहुंच चुके हैं। वार्ता से ठीक पहले ईरानी राज्य मीडिया ने दावा किया कि रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स की साइट पर लंबी दूरी की खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल तैनात की गई है।

 

मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सैन्य तैयारियां

अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। अरब सागर और लाल सागर में USS अब्राहम लिंकन, USS थियोडोर रूजवेल्ट जैसे विमानवाहक पोत और कई गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात किए गए हैं।

 

इसके अलावा कतर, बहरीन, सऊदी अरब, इराक और जॉर्डन के सैन्य अड्डों से अमेरिकी वायुसेना की गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों और कमांड सेंटरों पर समुद्र और हवा-दोनों से कार्रवाई करने की स्थिति में है।

 

पहले भी टकराव के रहे हैं गवाह

राष्ट्रपति ट्रम्प अपने पहले कार्यकाल में ईरान के खिलाफ आक्रामक नीति अपना चुके हैं। 2018 में उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते JCPOA से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था और ईरान पर ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति लागू की थी।

 

इस नीति के तहत ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने की कोशिश की गई, ऊर्जा, वित्त और शिपिंग सेक्टर पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए और ईरान के साथ व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों को भी अमेरिकी बाजार से बाहर करने की चेतावनी दी गई।

 

क्षेत्र में भारी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी

फिलहाल मिडिल ईस्ट में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। पर्शियन गल्फ और आसपास के इलाकों में करीब छह नौसैनिक जहाज मौजूद हैं, जिनमें तीन गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस में सक्षम हैं।

 

संकट के बीच अनिश्चित भविष्य

एक तरफ परमाणु वार्ता से समाधान की उम्मीद जताई जा रही है, तो दूसरी ओर सैन्य टकराव की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे हालात में ईरान में फंसे अमेरिकी नागरिकों के लिए खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका की सख्त चेतावनी इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं।

 

अब सबकी नजर मस्कट में हो रही बातचीत पर टिकी है-क्या कूटनीति कामयाब होगी या मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ेगा।