बांग्लादेश की राजनीति में बदलाव का संकेत: बीएनपी का घोषणापत्र और भारत के साथ नए रिश्तों की तलाश

बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी कर दिया है। यह घोषणापत्र केवल चुनावी वादों का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश के आर्थिक मॉडल, विदेश नीति और लोकतांत्रिक दिशा को लेकर एक वैकल्पिक दृष्टि प्रस्तुत करता है। पार्टी के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान द्वारा जारी यह घोषणापत्र खासतौर पर मध्य वर्ग, आर्थिक सुधार और भारत के साथ संतुलित संबंधों पर केंद्रित है।

 

अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण का वादा

बीएनपी के घोषणापत्र का सबसे अहम हिस्सा अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। तारिक रहमान ने साफ कहा है कि पार्टी की प्राथमिकता कर्ज आधारित अर्थव्यवस्था से बाहर निकलकर निवेश और उत्पादन आधारित विकास मॉडल अपनाने की होगी। उनका दावा है कि यदि बीएनपी सत्ता में आती है तो 2034 तक बांग्लादेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाएगा और देश को अपर-मिडिल-इनकम श्रेणी में पहुंचाया जाएगा।

 

घोषणापत्र में कहा गया है कि बीते वर्षों में बांग्लादेश का मध्य वर्ग लगभग समाप्त हो गया है। बढ़ती महंगाई, सीमित रोजगार अवसर और असमान विकास ने इस वर्ग को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। बीएनपी का कहना है कि वास्तविक आर्थिक विकास तभी संभव है जब मध्य वर्ग मजबूत होगा, क्योंकि यही वर्ग खपत, उद्यमिता और सामाजिक स्थिरता का आधार होता है।

Signs of change in Bangladesh politics

कुलीनतंत्र के खिलाफ राजनीतिक संदेश

तारिक रहमान ने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से “कुलीनतंत्र” को तोड़ने की बात कही। यह बयान मौजूदा सत्ता संरचना की आलोचना के रूप में देखा जा रहा है, जहां सत्ता और संसाधनों पर सीमित समूहों का नियंत्रण होने का आरोप लगाया जाता रहा है। बीएनपी का दावा है कि उसका विकास मॉडल किसी विशेष वर्ग या परिवार के विशेषाधिकारों पर नहीं, बल्कि हर नागरिक की उत्पादक क्षमता पर आधारित होगा।

 

यह दृष्टिकोण बांग्लादेश की राजनीति में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की बहस को फिर से केंद्र में लाता है।

 

बांग्लादेश फर्स्ट’ विदेश नीति

घोषणापत्र में विदेश नीति को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाया गया है। बीएनपी ने “बांग्लादेश फर्स्ट” नीति की बात करते हुए कहा है कि देश अपने पड़ोसियों को मित्र के रूप में देखेगा, मालिक के रूप में नहीं। यह बयान खासतौर पर भारत के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

बीएनपी का कहना है कि विदेश नीति में संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मसम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। पार्टी का दावा है कि इससे बांग्लादेश वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार, सक्रिय और सम्मानित देश के रूप में उभरेगा।

 

भारत के साथ संबंध और जल विवाद

घोषणापत्र में भारत के साथ रिश्तों पर अपेक्षाकृत संतुलित और संवाद आधारित रुख दिखाई देता है। तारिक रहमान ने पद्मा, तीस्ता और अन्य साझा नदियों के जल बंटवारे को प्राथमिक मुद्दा बताया है। उन्होंने कहा कि बीएनपी भारत के साथ निरंतर बातचीत के जरिए “उचित हिस्सेदारी” सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी।

 

यह बयान यह संकेत देता है कि बीएनपी टकराव की बजाय बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर चलना चाहती है। हालांकि, “उचित हिस्सा” जैसे शब्द यह भी दर्शाते हैं कि पार्टी जल संसाधनों के मुद्दे पर घरेलू जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दबाव की राजनीति कर सकती है।

 

बीएनपी का राजनीतिक इतिहास और संघर्ष

बीएनपी की स्थापना 1978 में जियाउर्रहमान ने की थी और जल्द ही यह बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक ताकत बन गई। बाद में खालिदा जिया के नेतृत्व में पार्टी ने सत्ता संभाली और उन्होंने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में इतिहास रचा।

 

हालांकि, 2009 के बाद शेख हसीना के लंबे शासनकाल में बीएनपी को राजनीतिक हाशिये पर धकेल दिया गया। पार्टी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के मुकदमे, जेल और निर्वासन जैसे हालात बने। चुनावों में पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए बीएनपी ने 2014 और 2024 के चुनावों का बहिष्कार भी किया।

 

अब 2026 के चुनावों में घोषणापत्र के जरिए बीएनपी खुद को एक वैकल्पिक, लोकतांत्रिक और विकासोन्मुख ताकत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।

 

भारत के लिए क्या मायने?

भारत के दृष्टिकोण से बीएनपी का घोषणापत्र मिश्रित संकेत देता है। एक ओर बातचीत, संतुलन और सहयोग की बात है, वहीं दूसरी ओर जल बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दबाव की राजनीति की संभावना भी मौजूद है। यदि बीएनपी सत्ता में आती है, तो भारत-बांग्लादेश संबंधों में पुनर्संतुलन देखने को मिल सकता है, खासकर जल, व्यापार और सीमा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में।

 

निष्कर्ष:

बीएनपी का घोषणापत्र केवल चुनावी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए एक वैकल्पिक रोडमैप है। यह मध्य वर्ग के पुनर्निर्माण, समावेशी विकास और संतुलित विदेश नीति की बात करता है। हालांकि, इन वादों की वास्तविक परीक्षा चुनाव परिणामों और सत्ता में आने के बाद नीतिगत क्रियान्वयन में होगी।

 

UPSC प्रीलिम्स प्रश्न

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने अपने घोषणापत्र में “बांग्लादेश फर्स्ट” विदेश नीति की बात कही है।
  2. बीएनपी ने भारत के साथ जल बंटवारे के मुद्दे को बातचीत के जरिए सुलझाने की बात की है।
  3. बीएनपी की स्थापना शेख हसीना ने की थी।

सही कथन/कथनों का चयन कीजिए:
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

 

UPSC मेंस प्रश्न (GS-II)

“बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी का हालिया घोषणापत्र देश की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति में संभावित बदलावों का संकेत देता है।”
इस कथन के आलोक में भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इसके संभावित प्रभावों का विश्लेषण कीजिए।