Japan Election: साने ताकाइची की LDP ने 465 में से 316 सीटें जीतीं, कैसे PM तकाइची ने दिलाई LDP को भारी बहुमत की जीत?

जापान की राजनीति में रविवार को हुए आम चुनाव ने इतिहास रच दिया। प्रधानमंत्री साने ताकाइची (Sanae Takaichi) के नेतृत्व में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP – Liberal Democratic Party) ने निचले सदन में ऐसी जीत दर्ज की है, जो दशकों में दुर्लभ मानी जा रही है। चुनावी अनुमानों और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 465 सदस्यीय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (Lower House) में LDP को अकेले 316 सीटें मिलने जा रही हैं, जबकि उसके गठबंधन को कुल 352 सीटों का समर्थन हासिल हुआ है।

 

यह परिणाम न केवल ताकाइची की व्यक्तिगत लोकप्रियता को दर्शाता है, बल्कि जापान में एक मजबूत, दक्षिणपंथी और निर्णायक नेतृत्व की वापसी का संकेत भी देता है।

 

संख्याओं की राजनीति: यह जीत कितनी बड़ी है

जापान की संसदीय व्यवस्था में कुछ विशेष बहुमत बेहद अहम माने जाते हैं।
यदि कोई गठबंधन 261 सीटें हासिल कर लेता है, तो उसे एब्सोल्यूट स्टेबल मेजॉरिटी (Absolute Stable Majority) कहा जाता है, जिससे वह संसदीय समितियों पर पूरा नियंत्रण रख सकता है और बजट जैसे अहम कानूनों को आसानी से पास कर सकता है।

 

इस चुनाव में LDP-इशिन गठबंधन न सिर्फ इस आंकड़े से आगे निकल गया, बल्कि 310 सीटों के सुपरमेजॉरिटी (Supermajority) आंकड़े को भी पार कर गया। इसका सीधा मतलब है कि प्रधानमंत्री ताकाइची अब ऊपरी सदन में विपक्षी बाधाओं के बावजूद कानून पास करा सकती हैं।

 

इशिन पार्टी और विपक्ष की स्थिति

प्रधानमंत्री ताकाइची की सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी (Ishin – Japan Innovation Party) को अनुमानित रूप से 36 सीटें मिली हैं। इसके विपरीत, सभी विपक्षी दल मिलकर केवल 113 सीटें ही जीत पाए।

 

एक दिलचस्प मोड़ यह रहा कि लंबे समय तक LDP की सहयोगी रही कोमेइतो पार्टी (Komeito) इस बार विपक्षी कांस्टीट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ जापान (CDPJ) के साथ मिलकर निचले सदन में सबसे बड़ा विपक्षी गठबंधन बन गई।

 

ताकाइची का राजनीतिक दांव और उसका परिणाम

64 वर्षीय साने ताकाइची ने सत्ता संभालने के महज तीन महीने बाद संसद भंग कर स्नैप इलेक्शन (Snap Election) कराने का फैसला किया था। यह फैसला राजनीतिक रूप से बेहद जोखिम भरा माना जा रहा था, क्योंकि LDP हाल के वर्षों में फंडिंग अनियमितताओं (Funding Irregularities) और धार्मिक संगठनों से जुड़े घोटालों (Religious-linked Scandals) के कारण आलोचनाओं में घिरी रही थी।

 

हालांकि, ताकाइची ने अपनी ऊंची पब्लिक अप्रूवल रेटिंग (Public Approval Rating) का फायदा उठाया और पार्टी को नया जनादेश दिलाने में सफल रहीं।

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टीवी इंटरव्यू में ताकाइची का संदेश
चुनाव परिणाम सामने आते ही एक टेलीविजन इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह चुनाव केवल सत्ता का नहीं, बल्कि नीति परिवर्तन (Policy Shift) का जनादेश है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार आर्थिक और वित्तीय नीतियों में बड़े बदलाव लाएगी, साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किया जाएगा। उन्होंने माना कि इन नीतियों का विरोध भी हुआ है, लेकिन जनता का समर्थन मिलने के बाद सरकार का दायित्व और बढ़ जाता है।


LDP की वापसी: संकट से सत्ता तक
यह जीत LDP के लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं मानी जा रही। पिछले कुछ वर्षों में पार्टी लगातार कमजोर होती दिख रही थी।


2024 में LDP ने पहली बार दोनों सदनों में बहुमत गंवा दिया था और उसका दशकों पुराना गठबंधन भी टूट गया था।


ताकाइची के दो पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में पार्टी को भ्रष्टाचार (Corruption), महंगाई (Inflation) और जीवन-यापन लागत (Cost of Living) जैसे मुद्दों पर जनता की नाराजगी झेलनी पड़ी थी।


दूर-दराज़ लेकिन असरदार: फॉर-राइट की सीमित मौजूदगी
इस चुनाव में सान्सेइतों (Sanseito) जैसी दक्षिणपंथी पार्टी ने रिकॉर्ड 190 उम्मीदवार मैदान में उतारे। अनुमान है कि उसे करीब 15 सीटें मिल सकती हैं, जो पिछली बार की तुलना में बढ़ोतरी है।


हालांकि, यह संख्या अभी भी बहुत सीमित है, लेकिन पार्टी की मौजूदगी ने जापान की राजनीति को वैचारिक रूप से और दाईं ओर धकेला है। सान्सेइतों ने विदेशी नागरिकों और आव्रजन के मुद्दे पर आक्रामक प्रचार किया और युवाओं के बीच कुछ समर्थन हासिल किया।


कौन हैं साने ताकाइची: जापान की ‘आयरन लेडी’
साने ताकाइची जापान की पहली निर्वाचित महिला प्रधानमंत्री हैं। वे खुद को ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर (Margaret Thatcher) से प्रेरित मानती हैं और ‘आयरन लेडी’ की छवि को अपनाती हैं।


उनके सामाजिक विचार बेहद रूढ़िवादी (Ultraconservative) माने जाते हैं। वे समलैंगिक विवाह (Same-Sex Marriage), विवाहित जोड़ों के अलग उपनाम और महिलाओं के शाही उत्तराधिकार के खिलाफ हैं।


इसके बावजूद, एक महिला होकर शीर्ष पद तक पहुंचना उन्हें जापान में एक प्रतीकात्मक चेहरा बनाता है।


सुरक्षा नीति और अमेरिका से नजदीकी
ताकाइची की विदेश नीति का केंद्र बिंदु अमेरिका के साथ मजबूत गठबंधन है। उन्होंने सत्ता संभालने के कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से मुलाकात की थी।
वे जापान की सैन्य क्षमताओं (Military Capabilities) को बढ़ाने और रक्षा खर्च में तेज बढ़ोतरी की समर्थक हैं।

 

चीन के साथ बढ़ता तनाव
ताकाइची के नेतृत्व में चीन के साथ संबंध और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। पिछले साल उन्होंने संकेत दिया था कि यदि चीन ताइवान पर बलपूर्वक कब्जा करने की कोशिश करता है, तो जापान हस्तक्षेप कर सकता है।


यह बयान सत्ता में आने के दो हफ्ते के भीतर दिया गया था, जिसने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी थी।


आर्थिक वादे और उनकी चुनौतियां
चुनाव में LDP का बड़ा वादा था – खाद्य पदार्थों पर 8% बिक्री कर (Sales Tax) को अस्थायी रूप से निलंबित करना। यह कदम आम लोगों को महंगाई से राहत देने के लिए उठाया गया, लेकिन निवेशकों और अर्थशास्त्रियों ने इसे लेकर चिंता जताई।


जापान पहले ही भारी सरकारी कर्ज (Government Debt) से जूझ रहा है और टैक्स कटौती से वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।


आव्रजन नीति और आलोचना
ताकाइची ने चुनाव अभियान में आव्रजन नियमों (Immigration Rules) को सख्त करने, विदेशी भूमि स्वामित्व की समीक्षा और विदेशी नागरिकों द्वारा बकाया करों पर कार्रवाई का वादा किया।


आलोचकों का कहना है कि इससे समाज में विभाजन बढ़ सकता है, खासकर तब जब जापान की केवल 3% आबादी विदेशी मूल की है।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ताकाइची को “ऐतिहासिक जीत” पर बधाई देते हुए कहा कि भारत-जापान संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे।


डोनाल्ड ट्रंप ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि जापान के लोगों ने “शांति के लिए ताकत” के एजेंडे को चुना है।


कठिन हालात में मतदान
यह जापान का 36 वर्षों में पहला मध्य-शीतकालीन चुनाव था। भारी बर्फबारी, ट्रेन और फेरी सेवाओं के बंद होने और उड़ानों के रद्द होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग मतदान करने पहुंचे।


पिछले पांच साल: चार प्रधानमंत्री
जापान की राजनीति हाल के वर्षों में अस्थिर रही है – शिंजो आबे, योशिहिदे सुगा, फुमियो किशिदा और शिगेरू इशिबा – सभी का कार्यकाल विवादों और दबावों से भरा रहा।
इसी अस्थिरता के बाद ताकाइची का उभार एक मजबूत और स्थायी नेतृत्व की वापसी के रूप में देखा जा रहा है।

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