ब्रह्मपुत्र पर बना देश का पहला 6-लेन एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज उद्घाटन के करीब, जानिए क्या है इसकी खासियत

असम की राजधानी गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी पर बना देश का पहला 6-लेन एक्स्ट्राडोज्ड पुल अब लगभग तैयार हो चुका है। ‘महासेतु’ नाम से पहचाना जा रहा यह पुल उत्तर और दक्षिण गुवाहाटी को जोड़ेगा। निर्माण कार्य लगभग 99 प्रतिशत पूरा हो चुका है और संभावना है कि इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करेंगे।

 

यह पुल कई मायनों में खास है। इसे भारत का सबसे लंबा एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज बताया जा रहा है। साथ ही यह भूकंपरोधी तकनीक से बनाया गया है और इसकी अनुमानित उम्र लगभग 100 वर्ष मानी जा रही है।

assam longest eartquake extradosed bridge

भूकंप क्षेत्र में बना है पुल

असम का यह इलाका भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुल में विशेष ‘पेंडुलम सिस्टम’ लगाया गया है। यह प्रणाली भूकंप के झटकों को सोखकर उन्हें नीचे की ओर स्थानांतरित कर देती है, जिससे पुल की संरचना पर कम असर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से पुल की मजबूती और सुरक्षा दोनों बढ़ती हैं।

 

क्या होता है एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज?

एक्स्ट्राडोज्ड ब्रिज ऐसी संरचना होती है जिसमें गर्डर (बीम) और केबल दोनों तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। यह पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक मजबूत और किफायती माना जाता है। इसमें केबल्स का उपयोग पुल को अतिरिक्त सहारा देने के लिए किया जाता है, जिससे इसकी भार वहन क्षमता बढ़ जाती है।

 

लोड टेस्ट भी हो चुका

उद्घाटन से पहले पुल की मजबूती जांचने के लिए लोड टेस्ट किया गया। इसके तहत कई भरे हुए ट्रक और डंपर एक साथ पुल पर चलाए गए, ताकि यह देखा जा सके कि भारी वजन में भी पुल सुरक्षित रहता है या नहीं। अधिकारियों के अनुसार परीक्षण सफल रहा है।

 

देश के अन्य अनोखे पुल

भारत में हाल के वर्षों में कई आधुनिक और अनोखी तकनीक वाले पुल बनाए गए हैं। इनमें तमिलनाडु का नया पंबन ब्रिज और जम्मू-कश्मीर का चिनाब आर्च ब्रिज खास हैं।

 

तमिलनाडु: एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट स्पैन रेलवे ब्रिज

तमिलनाडु के रामेश्वरम में बना नया पंबन पुल एशिया का पहला वर्टिकल लिफ्ट स्पैन रेलवे ब्रिज है। इसकी लंबाई 2.08 किलोमीटर है। इसकी आधारशिला नवंबर 2019 में रखी गई थी और वर्ष 2025 में इसका उद्घाटन किया गया। यह पुल रामेश्वरम को मुख्य भूमि के मंडपम से जोड़ता है।

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे डबल ट्रैक और हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए डिजाइन किया गया है। स्टील से बने इस पुल पर पॉलीसिलोक्सेन कोटिंग की गई है, जो इसे जंग और समुद्री खारे पानी से बचाती है।

 

5 मिनट में उठ जाता है पुल

यह पुल इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम से संचालित होता है। इसका मध्य हिस्सा 5 मिनट में 22 मीटर तक ऊपर उठाया जा सकता है, ताकि समुद्री जहाज आसानी से गुजर सकें। इसे संचालित करने के लिए केवल एक व्यक्ति की जरूरत होती है।

 

पुराना पंबन पुल हाथ से लीवर के जरिए खोला जाता था, जिसमें 14 लोगों की जरूरत पड़ती थी। हालांकि, यदि समुद्री हवा की रफ्तार 58 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक हो जाए तो यह लिफ्ट सिस्टम काम नहीं करेगा और अपने आप लाल सिग्नल सक्रिय हो जाएगा।

 

जम्मू-कश्मीर: दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी पर बना चिनाब आर्च ब्रिज दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज है। इसे हाल ही में उद्घाटित किया गया। यह पुल बक्कल और कौरी के बीच बनाया गया है। इसे वर्ष 2003 में मंजूरी मिली थी।

शुरुआती योजना के अनुसार इसे 2009 तक पूरा होना था, लेकिन निर्माण में 22 साल लगे। इसकी लंबाई 1.25 किलोमीटर से अधिक है और नदी से इसकी ऊंचाई 359 मीटर है। यह पेरिस के एफिल टॉवर से 29 मीटर ऊंचा है। इसकी लागत 1486 करोड़ रुपये बताई गई है।

 

पुल नदी तल से लगभग 331 मीटर की ऊंचाई पर बना है। इसे सहारा देने के लिए 1086 फीट ऊंचा टॉवर बनाया गया है, जो 77 मंजिला इमारत जितना ऊंचा है। इसमें से 472.25 मीटर हिस्सा केबल के सहारे टिका हुआ है।

 

इसके अलावा, अंजी नदी पर भी एक महत्वपूर्ण पुल बनाया गया है, जो रियासी जिले के कटरा को बनिहाल से जोड़ता है। इसकी लंबाई 725.5 मीटर है और यह चिनाब ब्रिज से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित है।

 

आधुनिक भारत की नई पहचान

गुवाहाटी का ‘महासेतु’, तमिलनाडु का पंबन ब्रिज और जम्मू-कश्मीर का चिनाब आर्च ब्रिज – ये सभी परियोजनाएं दिखाती हैं कि भारत बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीक, भूकंपरोधी डिजाइन, समुद्री सुरक्षा और ऊंचाई के रिकॉर्ड जैसे पहलू देश की इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाते हैं।

 

आने वाले समय में ये पुल न केवल आवागमन को आसान बनाएंगे, बल्कि आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन को भी बढ़ावा देंगे। खासकर गुवाहाटी का नया एक्स्ट्राडोज्ड पुल उत्तर-पूर्व भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।