बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। 299 सीटों वाली संसद में से अब तक 286 सीटों के नतीजे घोषित किए जा चुके हैं। इनमें से BNP ने 209 सीटें जीत ली हैं, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी 150 सीटों के आंकड़े से काफी ज्यादा है।
करीब दो दशक बाद BNP की सत्ता में वापसी हुई है। 2008 से 2024 तक देश में अवामी लीग की नेता शेख हसीना की सरकार रही थी। इस बार अवामी लीग चुनाव में शामिल नहीं थी। ऐसे में मुकाबला अलग तरह का रहा और नतीजों ने बांग्लादेश की राजनीति की दिशा बदल दी।
तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने की तैयारी
इस जीत के बाद BNP अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। उन्होंने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह जीत दर्ज की है।
तारिक रहमान पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं। वे पिछले साल 25 जनवरी को ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे थे। करीब 17 साल तक वे देश से बाहर रहे। उनकी वापसी के कुछ ही दिन बाद उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद पार्टी की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।
बांग्लादेश को 35 साल बाद एक पुरुष प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है। 1988 में काजी जफर अहमद देश के प्रधानमंत्री बने थे। उसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति दो महिला नेताओं-शेख हसीना और खालिदा जिया-के इर्द-गिर्द घूमती रही। दोनों अलग-अलग समय पर प्रधानमंत्री रहीं और राजनीति पर उनका दबदबा रहा।
जमात गठबंधन को 70 सीटें
चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन को अब तक 70 सीटें मिली हैं। जमात प्रमुख शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत हासिल की है। हालांकि मुख्य बहुमत BNP के पास है और सरकार उसी के नेतृत्व में बनेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को जीत की बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह परिणाम दर्शाता है कि बांग्लादेश की जनता को उनके नेतृत्व पर भरोसा है। मोदी ने यह भी कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक और प्रगति करते हुए बांग्लादेश के साथ खड़ा रहेगा और दोनों देश आपसी रिश्तों को और मजबूत करेंगे।
तारिक रहमान का राजनीतिक सफर
तारिक रहमान का राजनीतिक जीवन आसान नहीं रहा है। 2001 से 2006 के दौरान BNP की सरकार में उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। 2007 में अंतरिम सरकार के समय उन्हें गिरफ्तार किया गया और करीब 18 महीने जेल में रहना पड़ा।
2008 में वे इलाज के नाम पर लंदन चले गए और फिर लंबे समय तक वहीं रहे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने देश वापसी नहीं की। हालांकि विदेश में रहते हुए भी BNP में उन्हें ही नेता माना जाता रहा। टाइम मैगजीन की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी की रणनीति और आंदोलन की दिशा लंबे समय तक उनके इशारों पर तय होती रही।
अब वे खुद को शांत, सुनने वाले और नीतियों पर ध्यान देने वाले नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। वे पर्यावरण, शिक्षा और विकास जैसे मुद्दों पर जोर दे रहे हैं। उनके प्रमुख वादों में हर साल 5 करोड़ पेड़ लगाने, ढाका में नए ग्रीन जोन बनाने और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देना शामिल है।
चुनाव पर विवाद और आरोप
हालांकि चुनाव नतीजों के साथ विवाद भी सामने आए हैं। नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने आरोप लगाया है कि कुछ जगहों पर नतीजों में गड़बड़ी की कोशिश हुई। ढाका में पार्टी प्रवक्ता आसिफ महमूद सजीब भुइयां ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कुछ सीटों पर गलत वोटों को गिनकर BNP उम्मीदवार को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई।
उन्होंने दावा किया कि ढाका-15 सीट पर जब 20 हजार वोटों का अंतर था, तब BNP उम्मीदवार ने फेसबुक पर खुद को विजेता घोषित कर दिया, जिससे माहौल प्रभावित हुआ।
शेख हसीना का बयान
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस चुनाव को “दिखावटी” और “पहले से तय” बताया है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव निष्पक्ष नहीं था और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान नहीं किया गया।
हसीना ने आरोप लगाया कि 11 फरवरी की शाम से कई मतदान केंद्रों पर कब्जा किया गया, गोलियां चलाई गईं और जबरन बैलेट पेपर पर मुहर लगाई गई। उनके अनुसार, कई जगह मतदाताओं की संख्या बहुत कम रही।
इस चुनाव में अवामी लीग को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं दी गई थी। चुनाव आयोग का कहना था कि 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में पार्टी की भूमिका के कारण यह फैसला लिया गया।
कुछ जगहों पर गड़बड़ी की घटनाएं
मैमनसिंह-11 सीट के एक मतदान केंद्र पर पांच युवक बूथ के अंदर घुस गए और खुद ही मतपत्रों पर मुहर लगाकर बैलेट बॉक्स में डालने लगे। यह घटना सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई। करीब आधे घंटे के लिए मतदान रोक दिया गया। बाद में प्रिसाइडिंग ऑफिसर को हटाया गया और मतदान फिर से शुरू कराया गया।
भोल-1 सीट पर भी कॉकटेल फेंककर मतपत्र छीनने की कोशिश हुई। वहां करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक वोटिंग रुकी रही।
चुनाव के दिन चार लोगों की मौत
मतदान के दिन अलग-अलग जगहों पर चार लोगों की मौत हो गई। खुलना में BNP नेता महीबुज्जमान कोची मतदान केंद्र में गिर पड़े और अस्पताल ले जाते समय उनकी मौत हो गई।
सतखीरा में 65 वर्षीय अनाथ घोष की वोट डालने जाते समय तबीयत बिगड़ी और उनका निधन हो गया। ब्राह्मणबरिया में एक पोलिंग अधिकारी एमडी मुजाहिदुल इस्लाम बेहोश हो गए और अस्पताल में उन्हें मृत घोषित किया गया। चट्टोग्राम में भी एक व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई।
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक की प्रतिक्रिया
इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट (IRI) के चुनाव पर्यवेक्षक और पूर्व अमेरिकी सांसद डेविड ड्रेयर ने चुनाव को फ्री और फेयर बताया। उन्होंने कहा कि मतदान केंद्रों पर व्यवस्थित माहौल और लोगों में उत्साह देखा गया। उनके अनुसार, यह बांग्लादेश के इतिहास का खास दिन था।
खुलना-1 सीट पर दिलचस्प मुकाबला
खुलना-1 सीट पर जमात-ए-इस्लामी के हिंदू उम्मीदवार कृष्ण नंदी को 50 हजार से ज्यादा वोटों से हार मिली। BNP उम्मीदवार आमिर एजाज खान को 1,20,092 वोट मिले, जबकि कृष्ण नंदी को 69,658 वोट मिले।
BNP के प्रमुख चुनावी वादे
तारिक रहमान की पार्टी ने कई बड़े वादे किए हैं:
महिला सशक्तिकरण: महिलाओं के नाम पर फैमिली कार्ड जारी करने और उन्हें पोस्ट ग्रेजुएशन तक मुफ्त शिक्षा देने का वादा।
बुलेट ट्रेन परियोजना: ढाका को बड़े शहरों से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रेल सेवा शुरू करने की योजना।
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा: हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की बात।
अर्थव्यवस्था: छोटे उद्योगों को टैक्स में राहत और विदेशों में काम करने वाले मजदूरों के लिए कल्याण फंड।
प्रशासनिक सुधार: न्यायपालिका को मजबूत और स्वतंत्र बनाना, चुनाव आयोग को अधिक अधिकार देना और भ्रष्टाचार कम करने के उपाय।
विदेश नीति: किसी भी देश के दबाव में आए बिना संतुलित विदेश नीति अपनाने का वादा।
बांग्लादेश की राजनीति में नया दौर
शेख हसीना के देश छोड़ने और खालिदा जिया के निधन के बाद यह पहला चुनाव था। लंबे समय तक दो महिला नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही राजनीति अब नए चेहरे की ओर बढ़ रही है।
BNP की यह जीत सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। अब देखना होगा कि तारिक रहमान अपने वादों को किस तरह लागू करते हैं और देश को किस दिशा में ले जाते हैं।
बांग्लादेश चुनाव प्रक्रिया:
बांग्लादेश में संसदीय चुनाव (जनरल इलेक्शन) हर 5 साल में होते हैं, जिसमें जातीय संगद (Jatiya Sangsad) के 300 सदस्यों का चुनाव किया जाता है। ये 300 सीटें फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) सिस्टम से भरी जाती हैं, यानी हर निर्वाचन क्षेत्र (कॉन्स्टिट्यूएंसी) में सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार जीतता है। इसके अलावा, 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होती हैं, जो सीधे चुनाव से नहीं, बल्कि संसद के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व (प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन) के आधार पर चुनी जाती हैं। कुल मिलाकर, संसद में 350 सदस्य होते हैं।
मुख्य चुनाव प्रक्रिया के चरण:
- निर्वाचक नामावली तैयार करना: चुनाव आयोग (Election Commission) मतदाता सूची तैयार करता है। हर नागरिक 18 साल की उम्र पूरी करने पर वोटर बन सकता है। 2026 चुनाव में कुल 77 करोड़ (127 मिलियन) से ज्यादा मतदाता पंजीकृत थे।
- नामांकन और उम्मीदवारों की जांच: राजनीतिक दल या स्वतंत्र उम्मीदवार नामांकन दाखिल करते हैं। आयोग नामांकन की जांच करता है और अंतिम सूची जारी करता है।
- चुनाव प्रचार: नामांकन स्वीकृत होने के बाद 1-2 महीने का प्रचार काल होता है। दल रैलियां, विज्ञापन और घर-घर जाकर प्रचार करते हैं।
- मतदान: एक ही दिन पूरे देश में मतदान होता है। मतदान केंद्रों (पोलिंग बूथ) पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) या बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता है। मतदान सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक चलता है। पहचान के लिए नेशनल आईडी कार्ड जरूरी है। 2026 में पहली बार विदेशी बांग्लादेशियों और हिरासत में बंद लोगों के लिए डाक मतदान (पोस्टल वोटिंग) की सुविधा दी गई। साथ ही, “नो वोट” विकल्प भी जोड़ा गया।
- मतगणना और परिणाम: मतदान समाप्ति के बाद तुरंत मतगणना शुरू होती है। परिणाम रात या अगले दिन घोषित होते हैं। जीतने वाले दल की सरकार बनती है, और प्रधानमंत्री संसद में बहुमत वाले दल का नेता होता है।
- आरक्षित सीटें: महिलाओं की 50 सीटें संसद के सदस्यों द्वारा वोटिंग से भरी जाती हैं, जो दलों के सीटों के अनुपात में बांटी जाती हैं।
चुनाव की निगरानी अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों (जैसे EU, Commonwealth) और स्थानीय संगठनों द्वारा की जाती है। हिंसा या अनियमितताओं पर सख्ती बरती जाती है।
2026 बांग्लादेश चुनाव में भाग लेने वाली पार्टियां
2026 का जनरल इलेक्शन 12 फरवरी 2026 को हुआ, जो शेख हसीना की 2024 की जुलाई क्रांति (July Revolution) के बाद का पहला चुनाव था। हसीना की सरकार गिरने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, और अवामी लीग (Awami League) को आतंकवाद और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में चुनाव से प्रतिबंधित कर दिया गया। साथ ही, संविधान में संशोधन पर जनमत संग्रह (रेफरेंडम) भी हुआ।
- पंजीकृत पार्टियां: कुल 50 राजनीतिक दल चुनाव आयोग के पास पंजीकृत थे।
- भाग लेने वाली पार्टियां: इनमें से 41 दल ने सक्रिय रूप से चुनाव लड़ा। कुछ छोटे दल (जैसे वर्कर्स पार्टी ऑफ बांग्लादेश) ने उम्मीदवार नहीं उतारे।
- गठबंधन और मुख्य दल:
- बीएनपी (Bangladesh Nationalist Party): तारिक रहमान के नेतृत्व में, 11-पार्टी गठबंधन का नेतृत्व किया। ये 300 सीटों पर लड़े।
- 11-पार्टी गठबंधन: बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी (शफीकुर रहमान) के नेतृत्व में, जिसमें नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP, नहिद इस्लाम), अमर बांग्लादेश पार्टी, बांग्लादेश खेलाफत मजलिस आदि शामिल। 298 सीटों पर लड़े।
- नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट: जतिया पार्टी (एरशाद) के नेतृत्व में, 206 सीटों पर।
- डेमोक्रेटिक यूनाइटेड फ्रंट: कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ बांग्लादेश के नेतृत्व में, 149 सीटों पर।
- ग्रेटर सुन्नी अलायंस: बांग्लादेश इस्लामी फ्रंट के नेतृत्व में, 64 सीटों पर।
- इस्लामी अंदोलन बांग्लादेश: स्वतंत्र रूप से 253 सीटों पर।
कुल 1,981 से 2,028 उम्मीदवार 300 सीटों के लिए लड़े। बीएनपी ने भूस्वामीन्वय (landslide) जीत हासिल की (212 सीटें), जबकि 11-पार्टी गठबंधन को 74 सीटें मिलीं। मतदान 12.77 करोड़ वोटरों के बीच हुआ, जिसमें युवाओं (Gen Z) की भूमिका प्रमुख थी।
