राजस्थान विधानसभा में राजस्थान राइट टू हेल्थ बिल पर जोरदार विवाद: स्वास्थ्य मंत्री ने कहा MAA योजना ही पर्याप्त, जानिए पूरा मामला..

12 फरवरी 2026 को विधानसभा में राजस्थान राइट टू हेल्थ बिल (Rajasthan Right to Health Bill) को लेकर जोरदार विवाद हुआ। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने सदन में कहा कि राज्य में इस कानून की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि मौजूदा MAA योजना (मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना) पर्याप्त है।

 

उन्होंने कहा कि पूर्व कांग्रेस सरकार ने चुनावी फायदे के लिए, हितधारकों (जैसे IMA, UPCHAR आदि) से पूरी सलाह लिए बिना और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट से ठीक पहले यह कानून लाया था।

 

मंत्री ने जोर दिया कि मौजूदा मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना (MAA योजना) इतनी व्यापक है कि अलग से राइट टू हेल्थ एक्ट की आवश्यकता नहीं। MAA योजना के तहत 5 करोड़ लोगों को 25 लाख रुपये तक का कवर मिलता है (2179 पैकेज शामिल)। परिवार को सिर्फ 850 रुपये प्रीमियम पर यह सुविधा। सरकार आने के बाद 7,826 करोड़ रुपये कैशलेस इलाज में दिए गए। OPD, मुफ्त दवा और जांच सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध। खींवसर ने कहा कि MAA योजना बुखार से लेकर रोबोटिक सर्जरी तक सब कवर करती है, इसलिए एक्ट लाने की जरूरत नहीं।

 

इस बयान से विपक्ष भड़क गया। कांग्रेस विधायकों ने सदन में नारे लगाए, वेल में आकर हंगामा किया और बाद में वॉकआउट कर दिया।

Rajasthan Right to Health Bill

राइट टू हेल्थ क्या है?

  • परिभाषा: हर व्यक्ति को सबसे अधिक प्राप्त करने योग्य स्वास्थ्य स्तर का अधिकार, जो मानव गरिमा का हिस्सा है।
  • उत्पत्ति: 1946 में WHO की स्थापना से शुरू, स्वास्थ्य को मानवाधिकार माना गया।
  • सरकार की जिम्मेदारी: लिंग, जाति, धर्म, आर्थिक स्थिति से परे सभी के लिए स्वास्थ्य की रक्षा और संवर्धन।
  • भारत में संबंधित प्रावधान:
  • अंतरराष्ट्रीय: UN की Universal Declaration of Human Rights (1948) का अनुच्छेद 25 – स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पर्याप्त जीवन स्तर का अधिकार।
  • संविधान: अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) – गरिमापूर्ण जीवन के लिए स्वास्थ्य निहित।
  • DPSP: अनुच्छेद 38, 39, 42, 43, 47 – राज्य को स्वास्थ्य सुधार की नीति बनाने का निर्देश।
  • न्यायिक फैसले: Parmanand Katara vs Union of India (1989) – हर डॉक्टर (सरकारी या निजी) को आपात में इलाज देना अनिवार्य। Paschim Banga Khet Mazdoor Samity (1996) – सरकार की प्राथमिक ड्यूटी लोगों का कल्याण और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना।
  • महत्व: अधिकार-आधारित स्वास्थ्य सेवाएं, व्यापक पहुंच, OOP खर्च में कमी, गरीबी से सुरक्षा।

 

राजस्थान राइट टू हेल्थ बिल क्या हैं?

राजस्थान राइट टू हेल्थ एक्ट, 2022 (Rajasthan Right to Health Act, 2022) भारत में स्वास्थ्य को कानूनी अधिकार बनाने वाला पहला राज्य-स्तरीय कानून है। यह अधिनियम राजस्थान के निवासियों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की गारंटी देता है। नीचे इसकी पूरी कहानी क्रमबद्ध और तथ्य-आधारित रूप से प्रस्तुत है, जिसमें नवीनतम घटनाक्रम (फरवरी 2026 तक) शामिल हैं।

 

पृष्ठभूमि और प्रस्तावना

राजस्थान सरकार (तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार) ने स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से यह विधेयक लाया। यह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 47 (राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों में स्वास्थ्य सुधार) पर आधारित था। 22 सितंबर 2022 को विधानसभा में Rajasthan Right to Health Bill, 2022 पेश किया गया।

 

बिल/एक्ट की मुख्य विशेषताएं (Key Features)

  • राज्य के हर निवासी को सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त सेवाएं: परामर्श, दवाएं, जांच, आपात परिवहन, प्रक्रियाएं और आपात देखभाल।
  • चुनिंदा निजी अस्पतालों में भी (नियमों के अनुसार) आपात मामलों में इलाज अनिवार्य।
  • आपात स्थिति में अस्पतालों को मेडिको-लीगल औपचारिकताओं का इंतजार किए बिना इलाज देना होगा, दवाएं और परिवहन बिना पैसे के उपलब्ध कराना होगा।
  • इससे आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च कम होगा, स्वास्थ्य प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी।
  • मरीजों के 20+ अधिकार: सम्मान, सूचित सहमति, जानकारी, भेदभाव न करना, समयबद्ध शिकायत निवारण आदि।

 

विरोध और संशोधन प्रक्रिया

विधेयक के प्रस्ताव के बाद निजी चिकित्सकों और अस्पतालों (भारतीय चिकित्सा संघ सहित) ने व्यापक विरोध किया। उनका तर्क था कि यह निजी क्षेत्र पर अनुचित बोझ डालेगा, आर्थिक नुकसान होगा और रेगुलेशन बढ़ेगा।

  • मार्च-अप्रैल 2023 में 17 दिनों की हड़ताल हुई, जिससे निजी अस्पताल बंद रहे और मरीजों को परेशानी हुई।
  • सरकार ने Select Committee गठित की, जिसमें चिकित्सकों से परामर्श हुआ।
  • प्रमुख संशोधन: 50 बेड से कम या राज्य सब्सिडी न लेने वाले छोटे निजी अस्पतालों को छूट। बड़े अस्पतालों पर मुख्य रूप से लागू।
  • 21 मार्च 2023: संशोधित विधेयक विधानसभा में पारित।
  • 12 अप्रैल 2023: राज्यपाल की मंजूरी मिली – अधिनियम प्रभावी हुआ। राजस्थान देश का पहला राज्य बना जहां स्वास्थ्य को वैधानिक अधिकार दिया गया।

 

क्रियान्वयन में चुनौतियां

अधिनियम पारित होने के बावजूद नियमावली (Rules) नहीं बनाई गई, जो सेक्शन 17 के तहत अनिवार्य हैं। बिना नियमों के अधिकांश प्रावधान व्यावहारिक रूप से लागू नहीं हो सकते।

  • 2023 के अंत में विधानसभा चुनाव और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के कारण नियम फाइनल नहीं हो सके।
  • दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार सत्ता में आई।
  • 2024-2025 तक नियम नहीं बने। जन स्वस्थ्य अभियान (JSA) जैसे संगठनों ने बार-बार मांग की।
  • जनवरी 2026: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक PIL पर सरकार को नोटिस जारी किया, क्योंकि 5 वर्ष बाद भी नियम नहीं बने। सरकार को 8 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश।

 

विपक्ष और स्वास्थ्य संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया

  • नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली ने कहा: यह कानून सिर्फ एक्ट नहीं, बल्कि हर गरीब, वंचित और जरूरतमंद परिवार के जीवन की सुरक्षा की गारंटी था। दो साल से ज्यादा हो गए, लेकिन भाजपा सरकार ने नियम नहीं बनाए। मंत्री का बयान लाखों लोगों की उम्मीदों पर ठंडा पानी फेंकने जैसा है।
  • पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्री के बयान को “निंदनीय और असंवेदनशील” बताया। कहा कि यह गरीबों और मध्यम वर्ग के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। कांग्रेस ने चिरंजीवी और निरोगी राजस्थान योजनाओं के बावजूद राइट टू हेल्थ लाया था ताकि आपात स्थिति में कोई मरीज इलाज से वंचित न रहे। भाजपा सरकार मेडिकल लॉबी के आगे झुक रही है।
  • जन स्वस्थ्य अभियान (JSA) राजस्थान ने मंत्री के बयान की कड़ी निंदा की। कहा कि एक्ट को सिर्फ मुफ्त इलाज से जोड़ना गलतफहमी है। यह कानून अधिकार-आधारित ढांचा है, जिसमें शामिल हैं:
  • मरीजों के अधिकार (सम्मान, सूचित सहमति, जानकारी, भेदभाव न करना)।
  • आपात इलाज में प्री-पेमेंट के बिना स्थिरीकरण और इलाज (निजी अस्पतालों में अनिवार्य)।
  • समयबद्ध शिकायत निवारण तंत्र।
  • जिला और राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरणों का गठन।
  • सरकार की कानूनी जिम्मेदारी स्वास्थ्य पहुंच, गुणवत्ता और निरंतरता सुनिश्चित करने की। JSA ने मंत्री से बयान वापस लेने और नियम तुरंत अधिसूचित करने की मांग की।

 

Right to Health Act बनाने के फायदे (क्यों यह बेहतर हो सकता है)

यह एक्ट स्वास्थ्य को कानूनी अधिकार बनाता है, जो मौजूदा स्कीम्स से ज्यादा मजबूत गारंटी देता है। मुख्य तर्क:

  • कानूनी प्रवर्तनीयता: अगर सरकार स्वास्थ्य सेवाएं नहीं देती, तो लोग या एक्टिविस्ट्स कोर्ट जा सकते हैं। यह अन्य राज्यों में नहीं है, जहां सिर्फ स्कीम्स पर निर्भर रहना पड़ता है।
  • व्यापक अधिकार: सिर्फ मुफ्त इलाज नहीं, बल्कि 20+ अधिकार जैसे आपात इलाज बिना पेमेंट (निजी अस्पतालों में भी), मरीजों का सम्मान, सूचित सहमति, भेदभाव न करना, समयबद्ध शिकायत निवारण, और स्वास्थ्य प्रणाली में पारदर्शिता/जवाबदेही।
  • आउट-ऑफ-पॉकेट खर्च कम: अगर लागू होता, तो गरीबों को निजी अस्पतालों में आपात इलाज की गारंटी मिलती, जो स्कीम्स में हमेशा नहीं होती (जैसे क्लेम रिजेक्शन की समस्या)।
  • लंबे समय का फायदा: यह एक्ट स्वास्थ्य को मौलिक बनाता है, जो स्कीम्स से ज्यादा स्थायी है। स्कीम्स सरकार बदलने पर बदल सकती हैं, लेकिन एक्ट कानून है।
  • एक्सपर्ट व्यू: कई स्वास्थ्य विशेषज्ञ (जैसे JSA) कहते हैं कि यह अधिकार-आधारित फ्रेमवर्क है, जो सिर्फ मुफ्त सेवाओं से ज्यादा है-यह सरकार को कानूनी रूप से जिम्मेदार बनाता है।