नई दिल्ली में चल रहे ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर और गेट्स फाउंडेशन के चेयरमैन बिल गेट्स इस समिट में अपना तय मुख्य भाषण नहीं देंगे। गुरुवार सुबह गेट्स फाउंडेशन ने आधिकारिक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की। बयान में कहा गया कि काफी सोच-विचार के बाद यह फैसला लिया गया है ताकि समिट का फोकस अपनी प्राथमिकताओं पर बना रहे।
फाउंडेशन ने यह भी साफ किया कि समिट में उनकी जगह अंकुर वोरा बोलेंगे। अंकुर वोरा गेट्स फाउंडेशन के अफ्रीका और भारत कार्यालयों के प्रेसिडेंट हैं और वे संगठन के कामकाज से लंबे समय से जुड़े हुए हैं। वे समिट के एक सत्र में फाउंडेशन का पक्ष रखेंगे।

पहले था अलग रुख, फिर बदला फैसला
दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले तक गेट्स फाउंडेशन का रुख अलग था। जब समिट की वेबसाइट से बिल गेट्स का नाम और फोटो हटाए जाने की खबरें सामने आईं, तब फाउंडेशन ने कहा था कि वे अपना कीनोट जरूर देंगे। उस समय अटकलों को खारिज किया गया था।

लेकिन गुरुवार को अचानक बयान जारी कर कहा गया कि वे भाषण नहीं देंगे। इससे सवाल उठने लगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिससे यह बदलाव आया।
अमरावती दौरे के बाद बढ़ा विवाद
समिट में शामिल होने से पहले बिल गेट्स आंध्र प्रदेश के अमरावती गए थे। वहां उनकी मुलाकात राज्य के नेताओं से हुई। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गेट्स के साथ तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने लिखा कि राज्य के किसान तकनीक को अपनाने में आगे हैं और गेट्स को पारंपरिक स्वागत दिया गया।
ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। हालांकि इसके साथ ही आलोचना भी शुरू हो गई। कुछ लोगों ने सवाल उठाए कि हालिया विवादों के बीच गेट्स को बड़े मंच पर क्यों बुलाया गया।
एपस्टीन केस से जुड़ा विवाद
बिल गेट्स का नाम हाल में जारी हुए जेफ्री एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में सामने आया है। एपस्टीन पर यौन अपराधों और नाबालिगों की तस्करी के गंभीर आरोप थे। 2019 में उसकी मौत के बाद उससे जुड़े कई गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए गए।
इन दस्तावेजों में दावा किया गया कि एपस्टीन और गेट्स के बीच संपर्क था। इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई। हालांकि बिल गेट्स पहले ही एक इंटरव्यू में कह चुके हैं कि उन्हें एपस्टीन से मुलाकात करने का पछतावा है और उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी थी।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने यह सवाल उठाया कि ऐसे विवाद के बीच गेट्स को वैश्विक मंच पर मुख्य वक्ता के रूप में बुलाना क्या सही है।
‘इंडिया लैब’ वाले बयान पर भी चर्चा
सोशल मीडिया पर एक और पुराना बयान फिर से चर्चा में आ गया। 2024 में एक पॉडकास्ट के दौरान गेट्स ने कहा था कि भारत एक तरह की “लैब” की तरह है, जहां नई चीजें आजमाई जा सकती हैं और सफल होने पर उन्हें दुनिया के अन्य हिस्सों में लागू किया जा सकता है।
हालांकि यह टिप्पणी एक बड़े संदर्भ में की गई थी, लेकिन कुछ लोगों ने इसे बिना संदर्भ के साझा किया और इसे असंवेदनशील बताया। इससे सोशल मीडिया पर आलोचना और बढ़ गई।
सरकार की प्रतिक्रिया
जब इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कौन कार्यक्रम में शामिल हो रहा है या नहीं, यह व्यक्तिगत फैसला है और इस पर उन्हें टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।
इस बीच यह भी चर्चा रही कि समिट आयोजक और सरकार सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध के बीच क्या कदम उठाएंगे। अंत में गेट्स फाउंडेशन के बयान ने स्थिति साफ कर दी।
अन्य बड़े नाम भी चर्चा में
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 में दुनिया की कई बड़ी टेक कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए हैं। गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई जैसे दिग्गज यहां मौजूद हैं।
एनवीडिया के सीईओ जेंसेन हुआंग के भी आने की चर्चा थी, लेकिन उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया। हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कोई कारण नहीं बताया।
समिट की खास बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी को इस समिट का उद्घाटन किया था। यह कार्यक्रम 20 फरवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहा है। इसके साथ ‘इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026’ का आयोजन भी हो रहा है, जहां 300 से ज्यादा कंपनियां अपने नए AI समाधान पेश कर रही हैं।
इस समिट की थीम ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ रखी गई है। इसका मकसद है कि AI का विकास ऐसा हो जिससे समाज के हर वर्ग को फायदा मिले।
समिट तीन मुख्य आधारों पर टिका है:
पीपल: ऐसी AI तकनीक को बढ़ावा देना जो लोगों के अधिकारों की रक्षा करे।
प्लैनेट: पर्यावरण के अनुकूल AI विकास पर जोर।
प्रोग्रेस: आर्थिक और तकनीकी तरक्की को सभी तक पहुंचाना।
इस आयोजन में 110 से अधिक देश और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हो रहे हैं। करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और 45 से ज्यादा मंत्री इसमें भाग ले रहे हैं। यह पहली बार है जब किसी विकासशील देश में इस स्तर का AI समिट आयोजित हो रहा है।
समिट का वैश्विक सफर
पिछले वर्षों में यह समिट अलग-अलग देशों में आयोजित हुआ।
- 2023 में ब्रिटेन में फोकस AI के खतरों पर था।
- 2024 में दक्षिण कोरिया में इनोवेशन पर चर्चा हुई।
- 2025 में फ्रांस में एक्शन प्लान पर जोर दिया गया।
- 2026 में भारत में इसका फोकस है-AI को आम लोगों तक पहुंचाना, खासकर किसानों, मजदूरों और युवाओं के लिए।
आगे क्या?
फिलहाल गेट्स फाउंडेशन ने साफ कर दिया है कि बिल गेट्स समिट में कीनोट नहीं देंगे और उनकी जगह अंकुर वोरा बोलेंगे। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि गेट्स समिट में मौजूद हैं या नहीं।
सोशल मीडिया पर उठे सवाल, एपस्टीन से जुड़ा विवाद और पुराने बयान-इन सबने मिलकर माहौल को संवेदनशील बना दिया। ऐसे में आयोजकों ने शायद यह तय किया कि विवाद से बचना बेहतर होगा ताकि समिट का मुख्य फोकस AI और उसके सामाजिक प्रभाव पर बना रहे।

