अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि वे संघीय एजेंसियों को एलियंस और अनजान उड़न वस्तुओं (UFO) से जुड़ी सरकारी फाइलें जारी करने का निर्देश देंगे। ट्रंप ने इसे जनता की गहरी रुचि से जुड़ा “बहुत ही दिलचस्प और अहम” विषय बताया।
सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वे पेंटागन प्रमुख पीट हेगसेथ और अन्य एजेंसियों को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने को कहेंगे। उनके अनुसार, लोगों को यह जानने का हक है कि सरकार के पास इस विषय में क्या जानकारी है।

ओबामा पर आरोप
इसी दौरान ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ओबामा ने एलियंस पर सार्वजनिक टिप्पणी करते समय गोपनीय जानकारी का खुलासा कर “बड़ी गलती” की। ट्रंप ने जॉर्जिया की यात्रा के दौरान पत्रकारों से बातचीत में कहा, “उन्होंने क्लासिफाइड जानकारी बाहर निकाल दी… उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था।”
हालांकि, ओबामा की ओर से ऐसी कोई जानकारी सार्वजनिक करने का कोई संकेत नहीं मिला है। उनके कार्यालय ने भी इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
ओबामा ने क्या कहा था?
हाल ही में जारी एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, होस्ट ब्रायन टायलर कोहेन ने ओबामा से पूछा था कि क्या एलियंस सच में होते हैं। इस पर ओबामा ने हल्के अंदाज में जवाब दिया, “वे हैं, लेकिन मैंने उन्हें नहीं देखा है, और वे एरिया 51 में छिपाए नहीं गए हैं। जब तक कोई बहुत बड़ी साजिश न हो, जिसे राष्ट्रपति से भी छिपा लिया गया हो।”
एरिया 51 अमेरिका के नेवादा में स्थित एक गुप्त एयर फोर्स सुविधा है। लंबे समय से कुछ लोग दावा करते रहे हैं कि वहां एलियंस के शव या उनका अंतरिक्ष यान रखा गया है। हालांकि, 2013 में जारी सीआईए दस्तावेजों में बताया गया था कि यह जगह असल में गुप्त जासूसी विमानों के परीक्षण के लिए इस्तेमाल होती थी।
ओबामा ने रविवार को इंस्टाग्राम पर भी लिखा कि अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि एलियंस ने धरती से संपर्क किया हो। उन्होंने यह जरूर कहा कि ब्रह्मांड बहुत विशाल है, इसलिए पृथ्वी के बाहर जीवन होने की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। लेकिन उनके अनुसार, इतनी लंबी दूरी तय कर किसी बाहरी जीवन का धरती पर आना बहुत कम संभावना वाला है।
ट्रंप का रुख क्या है?
ओबामा पर टिप्पणी करने के बाद ट्रंप ने खुद भी माना कि उन्होंने एलियंस के अस्तित्व का कोई पुख्ता सबूत नहीं देखा है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कि वे असली हैं या नहीं।”
एरिया-51 का रहस्य क्या है?
एरिया-51 कई दशकों से यूएफओ और एलियन की कहानियों से जुड़ा रहा है। यह अमेरिकी वायुसेना का एक अत्यंत गोपनीय परीक्षण केंद्र है, जहां नए सैन्य विमानों और तकनीक का परीक्षण होता है। लंबे समय तक अमेरिकी सरकार ने इसके अस्तित्व की आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी। साल 2013 में CIA ने पहली बार स्वीकार किया कि यह एक परीक्षण स्थल है।

1955 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइसेनहावर के निर्देश पर एक गुप्त स्थान चुना गया था, जहां खुफिया विमानों की जांच की जा सके। यहीं पर यू-2 जासूसी विमान का परीक्षण हुआ था, जो उस समय बहुत ऊंचाई पर उड़ सकता था। उस दौर में लोगों को इतनी ऊंचाई पर उड़ने वाली चीजों की जानकारी नहीं थी, इसलिए कई बार उन्हें यूएफओ समझ लिया जाता था।
अमेरिकी जांच और रिपोर्टें
अमेरिका में यूएफओ को लेकर कई बार आधिकारिक जांच हो चुकी है। 1947 से 1969 तक अमेरिकी वायुसेना ने “प्रोजेक्ट ब्लू बुक” नाम से जांच चलाई। इस दौरान करीब 12,618 मामलों की पड़ताल की गई। ज्यादातर घटनाएं सामान्य कारणों से जुड़ी निकलीं, जैसे विमान, मौसम के गुब्बारे या खगोलीय घटनाएं। हालांकि 701 मामलों में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी।
2007 से 2012 के बीच “एडवांस्ड एयरोस्पेस थ्रेट आइडेंटिफिकेशन प्रोग्राम” (AATIP) नामक कार्यक्रम चलाया गया। बाद में इसे बंद कर दिया गया। 2020 में “अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना टास्क फोर्स” बनाई गई, जिसकी रिपोर्ट 2021 में आई। इसमें 2004 से 2021 के बीच 144 घटनाओं का जिक्र था। रिपोर्ट में न तो एलियंस की पुष्टि की गई और न ही पूरी तरह खारिज किया गया। सिर्फ एक मामले की स्पष्ट पहचान हो पाई।
अमेरिकी रक्षा विभाग, यानी Pentagon, ने यह जरूर कहा कि कुछ उड़ती वस्तुएं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हो सकती हैं, लेकिन उनके एलियन होने का कोई पक्का प्रमाण नहीं मिला।
हाल के खुलासे और बढ़ती दिलचस्पी
पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी नौसेना के पायलटों द्वारा रिकॉर्ड किए गए कुछ वीडियो सार्वजनिक किए गए। इनमें आसमान में तेज गति से उड़ती और अजीब हरकत करती वस्तुएं दिखाई दीं। इन घटनाओं को UAP यानी अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनॉमिना कहा गया। इसके बाद जनता के बीच उत्सुकता और बढ़ गई।
इसी कड़ी में अमेरिकी कांग्रेस ने भी सरकार से अधिक पारदर्शिता की मांग की है। अब UAP से जुड़े मामलों की जांच के लिए अलग कार्यालय भी बनाया गया है।
एलियंस की तलाश में वैज्ञानिक प्रयास
धरती के बाहर जीवन की खोज लंबे समय से चल रही है। 1999 में शुरू हुआ SETI@Home प्रोजेक्ट इसका बड़ा उदाहरण है। इसमें दुनिया भर के लाखों लोगों ने हिस्सा लिया। इसका मकसद अंतरिक्ष से आने वाले असामान्य रेडियो संकेतों की पहचान करना था। यह डेटा प्यूर्टो रिको स्थित एरेसीबो वेधशाला से लिया गया था।
2020 में एरेसीबो रेडियो टेलीस्कोप एक केबल टूटने के कारण ढह गया और यह परियोजना बंद हो गई। हालांकि 21 साल के डेटा में 12 अरब से ज्यादा संकेतों की पहचान की गई। इनमें से 100 संकेतों को खास माना गया और अब उन्हें चीन के FAST रेडियो टेलीस्कोप से दोबारा जांचा जा रहा है।
चीन ने 500 मीटर व्यास वाला विशाल रेडियो टेलीस्कोप लगाया है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष से संभावित संदेशों की तलाश करना है। फ्रांस की स्पेस एजेंसी CNES भी यूएफओ देखे जाने की रिपोर्ट इकट्ठा करती है। रूस में ROSCOSMOS जैसी एजेंसियां भी ऐसी घटनाओं का विश्लेषण करती हैं।
क्या कभी एलियन मिले?
अमेरिका में एक पूर्व खुफिया अधिकारी डेविड ग्रश ने दावा किया था कि सरकार के पास एलियन से जुड़ी सामग्री है और कुछ दुर्घटनाओं में दूसरे ग्रह का यान मिला था। उन्होंने कहा कि 1930 के दशक से ऐसा एक गुप्त कार्यक्रम चल रहा है। हालांकि पेंटागन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि ऐसा कोई कार्यक्रम कभी नहीं चला।
1947 की रोजवेल घटना भी काफी चर्चित रही। उस समय एक अज्ञात वस्तु के गिरने की खबर आई थी। बाद में सरकार ने बताया कि वह एक गुप्त निगरानी गुब्बारा था, जिसका इस्तेमाल सोवियत संघ के परमाणु परीक्षणों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था।
भारत में भी देखी गईं अजीब चीजें
भारत में भी समय-समय पर आसमान में अजीब रोशनी या उड़ती वस्तुओं की खबरें आई हैं। 1951 में दिल्ली में एक सिगार आकार की वस्तु देखी गई थी। 2017 में कोलकाता में एक चमकीली चीज दिखाई दी, जिसे बाद में शुक्र ग्रह बताया गया। 2013 के बाद चेन्नई से लखनऊ तक कई जगहों पर रात में बुलेट जैसी रोशनी दिखने की बातें सामने आईं। हालांकि भारत सरकार ने इन घटनाओं की विस्तृत जांच नहीं की।
कल्पना और साहित्य में एलियन
धरती के बाहर जीवन की कल्पना नई नहीं है। हिंदू धर्मग्रंथों में स्वर्ग लोक, भू लोक और पाताल लोक का जिक्र मिलता है। प्राचीन सुमेरियन कथाओं में अनुन्नाकी देवताओं का वर्णन है। यूनानी लेखक लुशियन ने करीब 2 हजार साल पहले चांद की यात्रा की कहानी लिखी थी। जापान की पुरानी कथा “द बैम्बू कटर की बेटी” में चांद से आई लड़की का जिक्र है।
विज्ञान कथा साहित्य में भी एलियंस लोकप्रिय रहे हैं। 19वीं सदी में इटली के खगोलशास्त्री जियोवानी शियापरेली ने मंगल ग्रह का अध्ययन किया। इसके बाद मंगल के प्राणियों पर कहानियां बनने लगीं। The War of the Worlds जैसी किताबों ने लोगों की कल्पना को और बढ़ाया।
क्या हम ब्रह्मांड में अकेले हैं?
वैज्ञानिक मानते हैं कि हमारी आकाशगंगा में अरबों तारे और ग्रह हैं। कुछ अध्ययनों के अनुसार हमारी गैलेक्सी में पृथ्वी जैसे सैकड़ों करोड़ ग्रह हो सकते हैं। एक शोध में अनुमान लगाया गया कि हमारी गैलेक्सी में 36 तक बुद्धिमान सभ्यताएं हो सकती हैं। हालांकि यह सिर्फ गणना पर आधारित संभावना है, कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं।
अधिकांश वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक एलियंस के धरती पर आने का कोई पक्का सबूत नहीं मिला है। यूएफओ के ज्यादातर मामले प्राकृतिक घटनाओं, तकनीकी उपकरणों या गलत पहचान से जुड़े पाए गए हैं।
निष्कर्ष:
एलियंस और UFO का विषय दशकों से लोगों की जिज्ञासा का केंद्र रहा है। फिल्मों, किताबों और इंटरनेट चर्चाओं ने इसे और लोकप्रिय बना दिया है। अब ट्रंप के इस ऐलान के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार किन दस्तावेजों को सार्वजनिक करती है और क्या उनमें कोई नई जानकारी सामने आती है।
फिलहाल, न तो ट्रंप ने एलियंस के अस्तित्व का दावा किया है और न ही पेंटागन की जांच में ऐसा कोई प्रमाण मिला है। लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है क्या आने वाले समय में सरकारी फाइलें इस रहस्य से पर्दा उठाएंगी, या एलियंस की कहानी सिर्फ कल्पना ही साबित होगी?

