भारत की संसद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका और मजबूत करने जा रही है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 64 देशों के साथ पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स (Parliamentary Friendship Groups – PFG) के गठन की घोषणा की है। इन समूहों का उद्देश्य अलग-अलग देशों की संसदों के साथ संवाद बढ़ाना और वैश्विक मंच पर भारत की लोकतांत्रिक आवाज को एकजुट तरीके से पेश करना है।
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुझाव दिया था कि भारत और अन्य देशों के बीच संसदीय स्तर पर बातचीत बढ़ाई जाए। इसी प्रस्ताव के आधार पर अब लोकसभा अध्यक्ष ने 64 PFG का गठन किया है।

704 सांसद, हर ग्रुप में 11 सदस्य
इन 64 समूहों में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 704 सांसद शामिल हैं। हर ग्रुप में एक लीडर और 10 सदस्य रखे गए हैं। राजनीतिक दलों के आधार पर देखें तो भाजपा के पास सबसे ज्यादा 30 ग्रुप लीडर हैं। कांग्रेस के 10, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 3-3 सांसदों को भी ग्रुप लीडर बनाया गया है।
भाजपा की ओर से हेमा मालिनी, मनोज तिवारी और निशिकांत दूबे जैसे नाम शामिल हैं। कांग्रेस से शशि थरूर, TMC से अभिषेक बनर्जी और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को भी ग्रुप लीडर की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ये ग्रुप किस तरह नियमित काम करेंगे और उनकी कार्यप्रणाली क्या होगी।
देश | ग्रुप लीडर | पार्टी |
श्रीलंका | डॉ. डी. पुरंदेश्वरी | भाजपा |
कजाकिस्तान | पूनमबेन हेमंतभाई माड़म | भाजपा |
जर्मनी | संजय कुमार झा | जदयू |
न्यूज़ीलैंड | समिक भट्टाचार्य | भाजपा |
स्विट्जरलैंड | राजीव प्रताप रूड़ी | भाजपा |
अर्जेंटीना | अशोककुमार चव्हाण | भाजपा |
दक्षिण अफ्रीका | हेमा मालिनी | भाजपा |
भूटान | बिप्लब कुमार देब | भाजपा |
भारत-कैरेकोम | मनोज तिवारी | भाजपा |
फिजी | डॉ. के. सुदर्शन | भाजपा |
सऊदी अरब | डॉ. सुधांशु त्रिवेदी | भाजपा |
इजरायल | महेंद्रजी महताब | भाजपा |
त्रिनिदाद एंड टोबैगो | विवेक ठाकुर | भाजपा |
मालदीव | लाल श्री कृष्ण देवेरायलु | TDP |
अमेरिका | बैजयंत पांडा | भाजपा |
कुवैत | कांडा विश्वेश्वर रेड्डी | भाजपा |
थाईलैंड | दिलीप सैकिया | भाजपा |
रूस | डॉ. निशिकांत दुबे | भाजपा |
मॉरीशस | जगदंबिका पाल | भाजपा |
इथियोपिया | डॉ. महेश शर्मा | भाजपा |
यूरोपीय संसद (ब्रसेल्स) | अनुराग सिंह ठाकुर | भाजपा |
उज़्बेकिस्तान | गणेश सिंह | भाजपा |
चेक गणराज्य | अरुण सिंह | भाजपा |
नॉर्डिक देश | भुवनेश्वर कलिता | भाजपा |
दक्षिण कोरिया | परशोत्तम रूपाला | भाजपा |
नाइजीरिया | डॉ. एम. थंबीदुरई | AIADMK |
पोलैंड | सुशील सिंह नागर | भाजपा |
बुल्गारिया | डॉ. काकोली घोष दस्तीदार | TMC |
नेपाल | नीरज शेखर | भाजपा |
यूनाइटेड किंगडम | रविशंकर प्रसाद | भाजपा |
आर्मेनिया | धर्मेंद्र यादव | सपा |
फिलीपींस | गौरव गोगोई | कांग्रेस |
ऑस्ट्रिया | राजीव शुक्ला | कांग्रेस |
कतर | कोडिकुन्निल सुरेश | कांग्रेस |
आयरलैंड | मुकुल वासनिक | कांग्रेस |
फ्रांस | डॉ. शशि थरूर | कांग्रेस |
जापान | अखिलेश यादव | सपा |
इटली | पी. चिदंबरम | कांग्रेस |
मेडागास्कर | एम. के. प्रेमचंद्रन | RSP |
मंगोलिया | कुमारी शैलजा | कांग्रेस |
ऑस्ट्रेलिया | अभिषेक बनर्जी | TMC |
ओमान | असदुद्दीन ओवैसी | AIMIM |
ऑस्ट्रेलिया (दूसरा ग्रुप) | मनीष तिवारी | कांग्रेस |
पुर्तगाल | के. सी. वेणुगोपाल | कांग्रेस |
जॉर्जिया | डॉ. सस्मित पात्रा | बीजद |
तंजानिया | अपराजिता सारंगी | भाजपा |
मिस्र | प्रो. रामगोपाल यादव | सपा |
मलेशिया | टी. आर. बालू | DMK |
ग्रीस | कनिमोझी करुणानिधि | DMK |
क्यूबा | मंगटा श्रीनिवासुलु रेड्डी | TDP |
सूरीनाम | संजय सिंह | आप |
मोरक्को | अरविंद गणपत सावंत | शिवसेना-उद्धव |
सिंगापुर | सुप्रिया सुले | NCP-SP |
इंडोनेशिया | श्रीकांत एकनाथ शिंदे | शिवसेना |
बाल्टिक देश | पी. वी. मिधुन रेड्डी | YSRCP |
ब्राजील | फुल्लेन पटेल | NCP |
केन्या | प्रेमचंद गुप्ता | राजद |
चिली | डेरेक ओ’ब्रायन | TMC |
बहरीन | तिरुचि शिवा | DMK |
यूक्रेन | अरविंद धर्मपुरी | भाजपा |
वियतनाम | विष्णु दयाल राम | भाजपा |
मेक्सिको | प्रमोद तिवारी | कांग्रेस |
ईरान | देवेश चंद्र ठाकुर | जदयू |
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) | डॉ. संजय जायसवाल | भाजपा |
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सक्रिय कूटनीति
इस पहल को ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की सक्रिय संसदीय कूटनीति का हिस्सा माना जा रहा है। 17 मई 2025 को केंद्र सरकार ने 59 सदस्यों वाले एक विशेष डेलिगेशन (delegation) की घोषणा की थी। इसमें 51 नेता और 8 राजदूत शामिल थे। इनमें 31 सदस्य एनडीए (NDA) से और 20 अन्य दलों से थे, जिनमें 3 कांग्रेस नेता भी शामिल थे।
यह प्रतिनिधिमंडल 33 देशों के दौरे पर गया, जिनमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्य देश भी शामिल थे। इन देशों में जाकर सांसदों ने ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत का पक्ष रखा।
7 समूहों में बंटा था प्रतिनिधिमंडल
इस डेलिगेशन को 7 अलग-अलग समूहों में बांटा गया था। हर ग्रुप में 8 से 9 सदस्य थे। इनमें 6-7 सांसद, कुछ वरिष्ठ नेता (पूर्व मंत्री) और राजदूत शामिल थे। हर ग्रुप का एक लीडर तय किया गया था।
ग्रुप-1 ने सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और अल्जीरिया का दौरा किया। इसके लीडर भाजपा सांसद बैजयंत पांडा थे। उनके साथ निशिकांत दुबे, फंगनन कोन्याक, रेखा शर्मा, असदुद्दीन ओवैसी, सतनाम सिंह संधू, गुलाम नबी आजाद और राजदूत हर्ष श्रृंगला शामिल थे। यह दल 24 मई को रवाना हुआ और 3 जून को लौटा।
ग्रुप-2 ने यूके, फ्रांस, जर्मनी, यूरोपीय संघ, इटली और डेनमार्क का दौरा किया। इसके लीडर रवि शंकर प्रसाद थे। दल 25 मई को रवाना हुआ और 8 जून को लौटा।
ग्रुप-3 ने इंडोनेशिया, मलेशिया, कोरिया गणराज्य, जापान और सिंगापुर का दौरा किया। इसके लीडर जेडीयू सांसद संजय कुमार झा थे। यह समूह 21 मई को रवाना हुआ और 4 जून को लौटा।
ग्रुप-4 ने संयुक्त अरब अमीरात, लाइबेरिया, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और सिएरा लियोन का दौरा किया। इसके लीडर शिवसेना सांसद श्रीकांत एकनाथ शिंदे थे। यह दल 21 मई को रवाना हुआ और 4 जून को वापस आया।
ग्रुप-5 अमेरिका, पनामा, गुयाना, ब्राजील और कोलंबिया गया। इसके लीडर कांग्रेस सांसद शशि थरूर थे। यह दल 24 मई को रवाना हुआ और 10 जून को लौटा।
ग्रुप-6 ने स्पेन, ग्रीस, स्लोवेनिया, लातविया और रूस का दौरा किया। इसके लीडर कनिमोझी करुणानिधि (DMK) थीं। यह समूह 22 मई को गया और 3 जून को वापस आया।
ग्रुप-7 ने मिस्र, कतर, इथियोपिया और दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया। इसके लीडर एनसीपी-एससीपी की सुप्रिया सुले थीं। यह दल 24 मई को रवाना हुआ और 5 जून को लौटा।
दुनिया को दिए गए 5 मुख्य संदेश
इन सातों समूहों ने विदेशों में जाकर भारत की ओर से पांच प्रमुख बातें रखीं-
- आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance): ऑपरेशन सिंदूर का लक्ष्य आतंकी ठिकानों और ढांचे पर सटीक कार्रवाई था। इसे किसी देश की जनता के खिलाफ नहीं बताया गया।
- पाकिस्तान की भूमिका: सांसदों ने पहलगाम हमले में पाक समर्थित संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)’ की भूमिका के सबूत पेश किए।
- भारत का संयम: भारत ने कार्रवाई के दौरान यह सुनिश्चित किया कि किसी निर्दोष नागरिक को नुकसान न पहुंचे।
- वैश्विक एकजुटता की अपील: अन्य देशों से आतंकवाद के खिलाफ खुलकर समर्थन और सहयोग मांगा गया।
- बदला हुआ रुख: भारत ने साफ किया कि अब वह सीमा पार से आने वाले खतरों पर पहले से ज्यादा सक्रिय (pro-active) रुख अपनाएगा।
संसदीय कूटनीति का नया अध्याय?
64 देशों के साथ PFG का गठन और 33 देशों का दौरा इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि संसदीय स्तर पर भी संबंध मजबूत करना चाहता है। इससे सांसद सीधे विदेशी संसदों और नेताओं से संवाद कर सकेंगे।

