ओडिशा के पुरी स्थित Jagannath Temple के रत्न भंडार की गिनती और सूची तैयार करने की प्रक्रिया अब शुरू होने जा रही है। यह काम लंबे समय से चर्चा में था। राज्य सरकार ने 25 मार्च को दोपहर 12:12 बजे से 1:45 बजे के बीच का शुभ समय तय किया है। इसी दौरान रत्न भंडार खोलकर आभूषणों की गिनती और रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
क्या है रत्न भंडार?
‘रत्न भंडार’ मंदिर का वह खास हिस्सा है, जहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के कीमती गहने और धातु के सामान रखे जाते हैं। यह खजाना सदियों से मंदिर की आस्था और परंपरा का हिस्सा रहा है। बाहरी रत्न भंडार में रोज उपयोग होने वाले आभूषण रखे जाते हैं, जबकि भीतरी भंडार में दुर्लभ और खास गहने सुरक्षित रहते हैं।
1978 में आखिरी बार विस्तृत गिनती की गई थी। 13 मई से 13 जुलाई तक चली इस प्रक्रिया में 128.38 किलो सोना और 221.53 किलो चांदी के आभूषण दर्ज किए गए थे। यह काम कुल 72 दिन चला था। उस समय कई सोने-चांदी की वस्तुओं का पूरा आकलन नहीं हो सका था।
इस बार कैसे होगी गिनती?
इस बार पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जाएगी ताकि रिकॉर्ड साफ रहे। Reserve Bank of India ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को भेजने पर सहमति दी है। राष्ट्रीयकृत बैंक पंजीकृत सुनार उपलब्ध कराएंगे, जो गहनों का वजन और जांच करेंगे।
राज्य सरकार की ओर से दो रत्न विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे। ये आभूषणों में जड़े कीमती पत्थरों की पहचान करेंगे। मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी के अनुसार, इस बार गिनती कितने दिन चलेगी, अभी कुछ कहना मुश्किल है।
सरकार ने इसके लिए एक साफ दिशा-निर्देश जारी किया है। तीन सदस्यीय पैनल पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के लिए अलग-अलग बॉक्स रखे जाएंगे। करीब 10 लोग आभूषणों को इन बॉक्स में सुरक्षित रखेंगे। हर दिन मजिस्ट्रेट खजाने से चाबी लेकर आएंगे और काम खत्म होते ही उसी दिन वापस जमा करेंगे।

पहले कब-कब खुला रत्न भंडार?
दस्तावेजों के अनुसार, 1905 में रत्न भंडार खोला गया था। इसके बाद 1926 में भी इसे खोला गया। 1978 में विस्तृत सूची बनाई गई, जिसमें करीब 128 किलो सोना और 222 किलो चांदी दर्ज की गई।
1985 में भीतरी भंडार खोले जाने का दावा किया गया, लेकिन सूची अपडेट नहीं हुई। 2018 में विधानसभा में बताया गया कि रत्न भंडार में 12,831 भरी से ज्यादा सोने के जेवर हैं। एक भरी लगभग 11.66 ग्राम के बराबर होती है। इसके अलावा 22,153 भरी चांदी के बर्तन और अन्य सामान भी बताए गए थे।
2018 में क्यों नहीं खुल सका भंडार?
2018 में Orissa High Court ने राज्य सरकार को रत्न भंडार खोलने का निर्देश दिया था। 4 अप्रैल 2018 को 16 लोगों की टीम जब भंडार के पास पहुंची तो दावा किया गया कि चाबी नहीं मिल रही है। इस कारण भंडार नहीं खुल सका।
चाबी के मुद्दे पर विवाद बढ़ा तो तत्कालीन मुख्यमंत्री Naveen Patnaik ने 4 जून 2018 को न्यायिक जांच के आदेश दिए। जांच रिपोर्ट 29 नवंबर 2018 को सरकार को सौंप दी गई, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया। चाबी का मामला आज तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाया।
जुलाई 2024 में क्या हुआ?
18 जुलाई 2024 को करीब 46 साल बाद भीतरी रत्न भंडार से खजाना बाहर निकाला गया। राज्य सरकार की बनाई गई हाई कमेटी के 11 सदस्य सुबह 9:15 बजे अंदर गए। उन्हें मोटे कांच की तीन अलमारियां और एक बड़ी लोहे की अलमारी मिली, जिसकी ऊंचाई करीब 6.5 फीट और चौड़ाई 4 फीट थी।
इसके अलावा लकड़ी के दो और लोहे का एक बड़ा संदूक भी मिला। इनके अंदर कई छोटे बॉक्स रखे थे, जिनमें सोना मौजूद था। एक बॉक्स खोलकर देखा गया, लेकिन अलमारियां और संदूक इतने भारी थे कि हिल नहीं सके। बाद में तय हुआ कि बॉक्स से गहने निकालकर महाप्रभु के शयन कक्ष में शिफ्ट किए जाएं। इस काम में टीम को करीब 7 घंटे लगे।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
Jagannath Temple का निर्माण 12वीं शताब्दी में पूर्वी गंग राजवंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने कराया था। इसे ‘यमनिका तीर्थ’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान जगन्नाथ की उपस्थिति से मृत्यु के देवता यम की शक्ति समाप्त हो जाती है।
इस मंदिर को कभी ‘सफेद पैगोडा’ भी कहा जाता था। यह चारधाम यात्रा का हिस्सा है, जिसमें बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम शामिल हैं। मंदिर अपनी खास वास्तुकला, ऊंचे शिखर और बड़े परिसर के लिए प्रसिद्ध है।
हर साल होने वाली रथ यात्रा इस मंदिर की सबसे बड़ी पहचान है। इस उत्सव में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ शहर में निकाले जाते हैं। लाखों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं। मंदिर का महाप्रसाद भी बहुत प्रसिद्ध है, जिसे मंदिर की रसोई में बनाया जाता है।
ओडिशा के अन्य प्रमुख स्थल
पुरी के अलावा ओडिशा में कई और प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं। इनमें Konark Sun Temple, Lingaraj Temple और Tara Tarini Temple शामिल हैं। कोणार्क सूर्य मंदिर यूनेस्को विश्व विरासत स्थल भी है।
आगे क्या?
अब सबकी नजर 25 मार्च पर टिकी है। गिनती और सूची बनने के बाद यह साफ होगा कि मंदिर के खजाने में कितना सोना-चांदी और कितने कीमती रत्न हैं। पारदर्शिता के लिए इस बार हर कदम रिकॉर्ड किया जाएगा।

