ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष अब यूरोप तक फैलने की आशंका पैदा कर रहा है। मंगलवार को तेहरान में एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय देशों को साफ चेतावनी दी कि अगर उन्होंने इस युद्ध में किसी भी तरह का कदम उठाया, तो उसे “युद्ध की कार्रवाई” माना जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि अगर यूरोपीय देश “रक्षात्मक कार्रवाई” के नाम पर भी हस्तक्षेप करते हैं, तो इसे हमलावरों का साथ देना माना जाएगा। उनके मुताबिक, ऐसा कोई भी कदम ईरान के खिलाफ युद्ध की तरह समझा जाएगा और उसका जवाब दिया जाएगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यूरोपीय देश ईरान को अपनी सुरक्षा क्षमता से वंचित करना चाहते हैं। उनके शब्दों में, “रक्षा” और “हमला” एक ही बात नहीं हो सकती। अगर कोई देश ईरान की जवाबी क्षमता को रोकने की कोशिश करेगा, तो उसे भी आक्रामक पक्ष का हिस्सा माना जाएगा।

यूरोप की चिंता क्यों बढ़ी?
यूरोपीय देशों ने हाल ही में संकेत दिया था कि अगर ईरान की मिसाइल क्षमता से उन्हें खतरा महसूस होता है, तो वे अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा सकते हैं। इसी बयान के बाद तेहरान ने सख्त प्रतिक्रिया दी।
यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब यूरोप के कई देश अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत कर रहे हैं। उन्हें डर है कि मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष उनके क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकता है।
साइप्रस में ब्रिटिश ठिकाने पर ड्रोन हमला
सोमवार को साइप्रस में स्थित ब्रिटिश वायुसेना के अक्रोतिरि बेस को निशाना बनाकर हमलावर ड्रोन भेजे गए। यह बेस एक अहम सैन्य ठिकाना है। अधिकारियों का मानना है कि ये ड्रोन लेबनान से दागे गए थे और इसमें हिजबुल्लाह की भूमिका हो सकती है।
हमले के बाद ब्रिटेन ने इस ठिकाने की सुरक्षा बढ़ा दी है। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर भविष्य में संभावित हमलों को रोकने के लिए एक युद्धपोत तैनात करने पर विचार कर रहे हैं।
ग्रीस, जर्मनी और फ्रांस का समर्थन
साइप्रस की सुरक्षा को लेकर ग्रीस, जर्मनी और फ्रांस ने मदद का भरोसा दिया है। ग्रीस और फ्रांस ने नौसेना के फ्रिगेट भेजे हैं। ग्रीस ने एफ-16 लड़ाकू विमान भी तैनात किए हैं। इससे साफ है कि यूरोप इस मामले को गंभीरता से ले रहा है।
नाटो का रुख
NATO के प्रमुख Mark Rutte ने कहा कि नाटो सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट में चल रही कार्रवाई में शामिल नहीं है। लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो नाटो अपने क्षेत्र के “हर इंच” की रक्षा करेगा।

उत्तरी मैसिडोनिया की यात्रा के दौरान रुटे ने कहा कि ईरान क्षेत्र के लिए खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान इजराइल के लिए अस्तित्व का खतरा है और यूरोप के लिए भी बड़ा जोखिम पैदा करता है। उनके अनुसार, ईरान परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता के करीब पहुंच रहा है।
रुटे ने यह भी कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाई अमेरिका और इजराइल ने की है। कुछ सहयोगी देश अलग-अलग स्तर पर समर्थन दे रहे हैं, लेकिन नाटो एक संगठन के रूप में इसमें शामिल नहीं है।
फ्रांस ने बढ़ाया परमाणु बल
इस बीच Emmanuel Macron ने फ्रांस के परमाणु शस्त्रागार को मजबूत करने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि यूरोप कई मोर्चों पर खतरे का सामना कर रहा है-एक ओर रूस-यूक्रेन युद्ध और दूसरी ओर मिडिल ईस्ट का संघर्ष।
मैक्रों ने यह भी घोषणा की कि फ्रांस यूरोप के अलग-अलग हिस्सों में अपनी परमाणु क्षमता फैलाने की योजना बना रहा है। आठ देशों-जिनमें ब्रिटेन, जर्मनी और नीदरलैंड शामिल हैं-ने फ्रांसीसी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता की मेजबानी में रुचि दिखाई है।
बढ़ता तनाव, बढ़ती आशंका
ईरान की चेतावनी ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। अगर यूरोपीय देश सीधे तौर पर किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होते हैं, तो संघर्ष का दायरा बढ़ सकता है। इससे न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि यूरोप भी सीधे टकराव की स्थिति में आ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अभी सभी पक्ष एक-दूसरे को सख्त संदेश दे रहे हैं। लेकिन यदि कोई भी कदम सीमा से आगे जाता है, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं।

