UK ने लागू किया दुनिया का सबसे सख्त नियम : ब्रिटेन का 2008 के बाद जन्मे लोगों के लिए सिगरेट पर आजीवन रोक

धूम्रपान को लेकर सख्ती बढ़ाने की दिशा में United Kingdom ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने ऐसा कानून तैयार किया है, जिसके तहत नई पीढ़ी के लोग जीवनभर सिगरेट और तंबाकू से जुड़े उत्पाद नहीं खरीद पाएंगे।

इस फैसले को ‘टोबैको एंड वेप्स बिल’ के रूप में संसद से मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे कानून बनने के लिए सिर्फ King Charles III की औपचारिक स्वीकृति का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही यह नियम पूरे देश – इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड – में लागू हो जाएगा।

 

क्या है इस नए कानून की खास बात

इस कानून की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उम्र के साथ बदलता रहेगा। इसे ऐसे डिजाइन किया गया है कि धीरे-धीरे पूरी नई पीढ़ी तंबाकू से दूर हो जाए।

सरकार के अनुसार, 1 जनवरी 2027 से तंबाकू खरीदने की न्यूनतम उम्र हर साल एक साल बढ़ा दी जाएगी।

 

उदाहरण के लिए:

  • 2027 में न्यूनतम उम्र 18 साल होगी
  • 2028 में यह 19 साल हो जाएगी
  • 2029 में 20 साल और आगे भी इसी तरह बढ़ती रहेगी

इसका सीधा मतलब यह है कि 2009 या उसके बाद पैदा हुए लोग कभी भी कानूनी रूप से सिगरेट नहीं खरीद पाएंगे।

 

दुकानदारों और कंपनियों के लिए नए नियम

इस कानून के लागू होने के बाद दुकानदारों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी। हर ग्राहक की उम्र जांचना जरूरी होगा। अगर कोई दुकानदार कम उम्र के व्यक्ति को सिगरेट बेचता है, तो उसे भारी जुर्माना देना पड़ सकता है।

इसके अलावा, तंबाकू बेचने वाले सभी कारोबारियों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा। विज्ञापन और प्रमोशन पर भी कड़ी रोक लगाई जाएगी, ताकि लोगों को सिगरेट की ओर आकर्षित न किया जा सके।

UK introduce smoking ban rule

ई-सिगरेट और वेपिंग पर भी सख्ती

सरकार ने सिर्फ पारंपरिक सिगरेट ही नहीं, बल्कि वेपिंग यानी ई-सिगरेट पर भी कड़े नियम लागू करने का फैसला किया है।

स्कूल, अस्पताल और बच्चों के खेलने की जगहों पर धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। कई इनडोर स्थानों पर वेपिंग की भी अनुमति नहीं होगी।

अगर कोई व्यक्ति 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ कार में वेपिंग करता है, तो यह भी गैरकानूनी माना जाएगा।

 

सरकार का उद्देश्य क्या है

ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री Wes Streeting का कहना है कि यह कदम एक “स्मोक-फ्री जनरेशन” बनाने की दिशा में उठाया गया है।

उनका मानना है कि बीमारी का इलाज करने से बेहतर है कि उसे होने से पहले ही रोक दिया जाए।

सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों और मौतों में बड़ी कमी आए।

 

धूम्रपान से कितना नुकसान

ब्रिटेन में हर साल करीब 76,000 लोगों की मौत धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। इनमें कैंसर, दिल की बीमारी और फेफड़ों की समस्या जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि ज्यादातर लोग कम उम्र में ही सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं और बाद में इसे छोड़ना मुश्किल हो जाता है।

इसी वजह से अब फोकस इस बात पर है कि नई पीढ़ी को शुरुआत ही न करने दी जाए।

 

स्वास्थ्य सेवा पर असर

धूम्रपान का असर सिर्फ लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका बोझ देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ता है।

National Health Service (NHS) पर धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों के इलाज का भारी खर्च आता है।

अगर लोग कम धूम्रपान करेंगे, तो इस खर्च में कमी आएगी और स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव भी कम होगा।

 

आर्थिक असर भी महत्वपूर्ण

धूम्रपान के कारण लोग बीमार पड़ते हैं, जिससे उनकी काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।

सरकार का मानना है कि अगर लोग स्वस्थ रहेंगे, तो उत्पादकता बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।

 

लोगों की राय क्या कहती है

ब्रिटेन में किए गए सर्वे के अनुसार, करीब 75% लोग जो सिगरेट पीते हैं, वे चाहते हैं कि उन्होंने कभी इसकी शुरुआत ही न की होती।

इससे यह साफ होता है कि धूम्रपान की लत से छुटकारा पाना आसान नहीं है और इसे रोकने के लिए सख्त कदम जरूरी हो सकते हैं।

 

आलोचना भी हो रही है

हालांकि इस कानून को लेकर कुछ लोग और कारोबारी असहमति भी जता रहे हैं। उनका कहना है कि यह नियम बहुत सख्त है और लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता बढ़ाना ज्यादा प्रभावी तरीका हो सकता है, बजाय पूरी तरह प्रतिबंध लगाने के।

 

दुनिया में पहले भी ऐसे प्रयास

इस तरह का कानून सबसे पहले New Zealand ने लागू किया था। वहां 2008 के बाद पैदा हुए लोगों के लिए तंबाकू खरीदना प्रतिबंधित कर दिया गया था।

हालांकि बाद में 2024 में सरकार बदलने के बाद यह कानून वापस ले लिया गया। नई सरकार का कहना था कि इससे टैक्स से मिलने वाला राजस्व प्रभावित हो रहा था।

 

वैश्विक स्तर पर क्या स्थिति

World Health Organization के अनुसार, दुनिया के कई देश अब स्मोक-फ्री नीतियों की ओर बढ़ रहे हैं।

2004 में Ireland पहला देश बना जिसने कार्यस्थलों और सार्वजनिक जगहों पर धूम्रपान पर रोक लगाई।

2023 तक दुनिया की करीब 71% आबादी किसी न किसी स्मोक-फ्री नीति के दायरे में आ चुकी है।

 

अन्य देशों के कदम

  • France में पार्क और बीच पर स्मोकिंग रोकने की दिशा में काम हो रहा है
  • Spain ने सार्वजनिक जगहों पर प्रतिबंध और सख्त किए हैं
  • Sweden दुनिया के सबसे कम धूम्रपान दर वाले देशों में शामिल है
  • Japan में सार्वजनिक स्थानों पर सख्त नियम हैं
  • United States के कई राज्यों में पब्लिक प्लेस पर स्मोकिंग बैन है
  • Maldives भी नई पीढ़ी को तंबाकू से दूर रखने के लिए सख्त कदम उठा रहा है

 

भारत में क्या कानून है ?

भारत में 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिगों के लिए तंबाकू के संबंध में नियम अत्यंत सख्त हैं, जिन्हें मुख्य रूप से COTPA (सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम), 2003 की धारा 6 और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट, 2015 के माध्यम से लागू किया गया है।

कानून के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना या उनके माध्यम से इनकी बिक्री करवाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। नियमों को प्रभावी बनाने के लिए, किसी भी शैक्षणिक संस्थान (स्कूल या कॉलेज) के 100 गज (91 मीटर) के दायरे में तंबाकू की बिक्री पर पूर्ण रोक है। दुकानदारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे अपनी दुकान पर एक स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाएं, जिसमें नाबालिगों को तंबाकू बेचना दंडनीय अपराध बताया गया हो।

सजा के मामले में, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 77 सबसे महत्वपूर्ण है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति किसी बच्चे को तंबाकू उत्पाद देता है या परोसता है, तो उसे 7 साल तक की कठोर कैद और 1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा, भारत सरकार ने PECA (ई-सिगरेट निषेध अधिनियम), 2019 के तहत वैप्स और ई-सिगरेट पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार ने COTPA में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा है, जिसमें कानूनी उम्र को 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने और खुले में सिगरेट (loose cigarettes) की बिक्री पर रोक लगाने की बात की गई है, ताकि युवाओं को इसकी पहुंच से दूर रखा जा सके।

 

क्या यह मॉडल सफल होगा

ब्रिटेन का यह कदम एक नई सोच को दिखाता है, जहां फोकस सिर्फ नियंत्रण पर नहीं बल्कि पूरी पीढ़ी को तंबाकू से दूर रखने पर है।

अगर यह मॉडल सफल होता है, तो अन्य देश भी इसे अपनाने पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, इसके परिणाम आने में समय लगेगा और यह देखना होगा कि लोग इस कानून को कैसे अपनाते हैं।

 

निष्कर्ष:

ब्रिटेन का यह फैसला धूम्रपान के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। यह सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सेहत को बेहतर बनाने की कोशिश है।