दक्षिण अमेरिका के देश वेनेजुएला से अमेरिका ने 13.5 किलो हाईली एनरिच्ड यूरेनियम हटाकर एक बड़ा और संवेदनशील ऑपरेशन पूरा किया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने इस मिशन की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम सिर्फ वेनेजुएला ही नहीं बल्कि पूरे दक्षिण अमेरिका और अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। कई दशकों से यह यूरेनियम वेनेजुएला के एक पुराने रिसर्च रिएक्टर में रखा हुआ था।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस मिशन को अमेरिका, वेनेजुएला, ब्रिटेन और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने मिलकर अंजाम दिया। यूरेनियम को बेहद सख्त सुरक्षा के बीच कराकास के पास मौजूद साइट से निकाला गया और फिर समुद्र तथा सड़क मार्ग के जरिए अमेरिका पहुंचाया गया।
कई साल से बंद पड़े रिएक्टर में रखा था यूरेनियम
जानकारी के अनुसार, वेनेजुएला का RV-1 रिसर्च रिएक्टर कई वर्षों तक परमाणु रिसर्च और वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए इस्तेमाल होता था। हालांकि 1991 में वहां रिसर्च गतिविधियां बंद हो गई थीं, लेकिन उसके बाद भी रिएक्टर में हाईली एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद रहा।
अमेरिका की नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (NNSA) ने बताया कि यह यूरेनियम 20% से ज्यादा शुद्धता वाला था। ऐसे पदार्थों को सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इनका इस्तेमाल भविष्य में हथियार बनाने के लिए किया जा सकता है।
एजेंसी ने कहा कि दुनिया भर में ऐसे पुराने परमाणु पदार्थों को सुरक्षित करना और हटाना उनके मिशन का अहम हिस्सा है।
छह हफ्तों से कम समय में पूरा हुआ मिशन
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस ऑपरेशन को बेहद कम समय में पूरा किया गया। शुरुआती निरीक्षण के बाद छह हफ्तों से भी कम समय में यूरेनियम को सुरक्षित तरीके से हटाकर अमेरिका पहुंचा दिया गया।
यूरेनियम को विशेष सुरक्षा कंटेनर में पैक किया गया था। इसके बाद लगभग 100 मील तक सड़क के रास्ते इसे बंदरगाह तक ले जाया गया। वहां से ब्रिटेन की न्यूक्लियर ट्रांसपोर्ट सॉल्यूशंस कंपनी के विशेष जहाज में लोड करके अमेरिका भेजा गया।
यह सामग्री मई की शुरुआत में अमेरिका पहुंची और फिर इसे साउथ कैरोलाइना स्थित सवाना रिवर परमाणु साइट में ट्रांसफर कर दिया गया। अब वहां इस यूरेनियम को प्रोसेस किया जाएगा।
अमेरिका ने इसे बड़ी सुरक्षा सफलता बताया
NNSA के प्रशासक ब्रैंडन विलियम्स ने इस मिशन को बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम दुनिया को यह संदेश देता है कि वेनेजुएला अब परमाणु सुरक्षा के मामले में नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।
वहीं, NNSA के डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर डॉ. मैट नेपोली खुद इस मिशन की निगरानी के लिए वेनेजुएला पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि टीम के अनुभव और कई वर्षों की तैयारी की वजह से यह ऑपरेशन सफल हो पाया।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने भी इस मिशन की पुष्टि करते हुए इसे जटिल और संवेदनशील ऑपरेशन बताया।
आखिर हाईली एनरिच्ड यूरेनियम इतना संवेदनशील क्यों?
यूरेनियम की शुद्धता के आधार पर उसका इस्तेमाल तय होता है। आमतौर पर 3% से 5% तक एनरिच्ड यूरेनियम का उपयोग बिजली बनाने वाले परमाणु संयंत्रों में किया जाता है।
20% तक शुद्ध यूरेनियम को उच्च स्तर का माना जाता है, लेकिन इससे सीधे परमाणु हथियार नहीं बनाए जा सकते। हालांकि जब इसकी शुद्धता 60% तक पहुंचती है तो इसे “नियर वेपन ग्रेड” कहा जाता है। यानी यह परमाणु बम बनाने के काफी करीब माना जाता है।
अगर यूरेनियम 90% या उससे ज्यादा शुद्ध हो जाए तो उसे “वेपन ग्रेड” कहा जाता है। ऐसे पदार्थ का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में किया जा सकता है।
इसी वजह से दुनिया भर में हाईली एनरिच्ड यूरेनियम की निगरानी और सुरक्षा को बेहद गंभीर मुद्दा माना जाता है।

1996 से अब तक हजारों किलो परमाणु सामग्री हटाई
NNSA के मुताबिक 1996 से अब तक एजेंसी दुनिया के कई देशों से 7,350 किलो से ज्यादा हाईली एनरिच्ड यूरेनियम और प्लूटोनियम को हटाने या सुरक्षित करने का काम कर चुकी है।
अमेरिका का कहना है कि इस तरह के मिशन परमाणु प्रसार रोकने की वैश्विक कोशिशों का हिस्सा हैं। एजेंसी अब इस यूरेनियम को प्रोसेस करके भविष्य के अमेरिकी न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम में इस्तेमाल करेगी।
ईरान को लेकर भी अमेरिका की चिंता जारी
वेनेजुएला से यूरेनियम हटाने की खबर ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दबाव बना रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पास करीब 408 किलो हाईली एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। अमेरिका और पश्चिमी देशों को डर है कि अगर ईरान इसकी शुद्धता और बढ़ाता है तो वह परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है।
हालांकि ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
वेनेजुएला और अमेरिका के रिश्तों में बदलाव
हाल के महीनों में अमेरिका और वेनेजुएला के रिश्तों में भी बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक दोनों देशों के बीच तनाव बना रहा, लेकिन अब दोनों के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़ने लगे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ समेत कई अमेरिकी अधिकारी हाल में वेनेजुएला गए थे। सात साल बाद दोनों देशों के बीच कमर्शियल फ्लाइट भी दोबारा शुरू हुई हैं। इसके अलावा अमेरिकी दूतावास को भी फिर से खोला गया है।
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में गिना जाता है। माना जा रहा है कि अमेरिका अब वहां ऊर्जा और खनन सेक्टर में अपने कारोबार को बढ़ाना चाहता है।
मादुरो की गिरफ्तारी के बाद बदला माहौल
जनवरी 2026 में अमेरिका ने वेनेजुएला में बड़ा सैन्य ऑपरेशन चलाकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किया था। अमेरिका ने उन पर ड्रग तस्करी और आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए थे।
इस कार्रवाई के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक संकट शुरू हो गया था। बाद में उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया गया और अमेरिका ने नई सरकार को समर्थन दिया।
हालांकि रूस, चीन और कुछ अन्य देशों ने अमेरिकी कार्रवाई का विरोध किया था। इसके बावजूद अमेरिका और वेनेजुएला के बीच आर्थिक और राजनीतिक संबंध धीरे-धीरे बेहतर होते दिखाई दे रहे हैं।
क्या दुनिया में परमाणु खतरे को कम करने की नई शुरुआत है?
वेनेजुएला से हाईली एनरिच्ड यूरेनियम हटाने को अमेरिका अपनी बड़ी कूटनीतिक और सुरक्षा सफलता बता रहा है। यह ऑपरेशन ऐसे समय हुआ है जब दुनिया में परमाणु सुरक्षा और हथियारों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।

