ट्विशा शर्मा केस : शादी के महज 5 महीने बाद एक्ट्रेस ट्विशा की मौत, आत्महत्या या सोची-समझी साजिश?

भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में रहने वाली 31 वर्षीय मॉडल और पूर्व एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत ने पूरे मामले को रहस्यमय बना दिया है। 11 मई की रात हुई इस घटना के बाद से लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं, जिनसे कहानी और उलझती जा रही है। एक तरफ इसे आत्महत्या बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ परिवार इसे एक सोची-समझी साजिश और हत्या का मामला मान रहा है।

ट्विशा शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली थीं। उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में अपना करियर शुरू किया था और बाद में कुछ विज्ञापनों और तेलुगु फिल्मों में भी काम किया। वह मिस पुणे भी रह चुकी थीं और कई बड़े ब्रांड्स के लिए एड शूट कर चुकी थीं। करियर में उतार-चढ़ाव के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर में भी काम किया था।

उनकी शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के रहने वाले वकील समर्थ सिंह से हुई थी। समर्थ एक वकील हैं और उनकी मां रिटायर्ड जिला जज रह चुकी हैं। शादी को अभी कुछ ही महीने हुए थे कि यह घटना सामने आ गई।

Twisha Sharma Case

मौत की रात क्या हुआ था?

11 मई की शाम ट्विशा ब्यूटी पार्लर से घर लौटी थीं। परिवार के अनुसार वह सामान्य थीं और टीवी देख रही थीं। इसी दौरान उनकी मां का फोन आया। फोन पर बात करते-करते वह घर की छत पर चली गईं।

सीसीटीवी फुटेज में भी यह देखा गया है कि वह अकेले सीढ़ियां चढ़कर छत की ओर जा रही हैं। इसके कुछ देर बाद रात के समय एक और फुटेज सामने आता है जिसमें तीन लोग एक शव को नीचे लाते दिखाई देते हैं। यही वीडियो अब जांच का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है।

परिवार का दावा है कि ट्विशा की मौत करीब रात 10 बजे के आसपास हुई, जबकि पोस्टमॉर्टम और अस्पताल रिकॉर्ड में अलग-अलग समय सामने आए हैं। इसी समय के अंतर ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है।

Twisha Sharma Case

ट्विशा और समर्थ

 

व्हाट्सएप चैट ने बढ़ाया मामला

इस केस में एक व्हाट्सएप चैट भी सामने आई है, जिसमें ट्विशा अपनी मां से कहती हैं कि “मुझे बहुत घुटन हो रही है मां… ये लोग न रोने देंगे, न हंसने की वजह देंगे।” इस चैट के बाद परिवार ने इसे मानसिक प्रताड़ना से जोड़कर देखा है।

परिवार का कहना है कि ट्विशा पिछले कुछ समय से तनाव में थीं और ससुराल में उन्हें लगातार मानसिक दबाव झेलना पड़ रहा था।

 

ससुराल पक्ष का दावा क्या है?

दूसरी तरफ ससुराल पक्ष और समर्थ सिंह की मां, जो खुद रिटायर्ड जज हैं, ने इन आरोपों को पूरी तरह से नकार दिया है। उनका कहना है कि ट्विशा मानसिक तनाव में थीं और उनका इलाज भी चल रहा था।

उन्होंने यह भी दावा किया कि ट्विशा को नशे की आदत थी और वह कई बार चिड़चिड़े व्यवहार में रहती थीं। सास का कहना है कि शादी के बाद स्थिति बिगड़ने लगी थी और ट्विशा ने खुद कई बार मदद ली थी।

ससुराल पक्ष का यह भी कहना है कि ट्विशा की आर्थिक मदद भी की जाती थी और उन पर कोई दबाव नहीं था।

 

गर्भावस्था और गर्भपात का विवाद

इस केस में एक और बड़ा मुद्दा सामने आया है – गर्भावस्था। परिवार का दावा है कि ट्विशा गर्भवती थीं और उस दौरान उन्हें मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था।

वहीं ससुराल पक्ष का कहना है कि बाद में उनका गर्भपात हुआ और यह निर्णय उनकी इच्छा से लिया गया था। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ते जा रहे हैं।

परिवार का आरोप है कि बच्चे को लेकर लगातार ताने दिए जा रहे थे और मानसिक रूप से उन्हें परेशान किया जा रहा था।

 

सीसीटीवी और टाइमलाइन का रहस्य

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल टाइमलाइन को लेकर है। अलग-अलग रिकॉर्ड में समय अलग-अलग बताया जा रहा है।

सीसीटीवी में ट्विशा शाम करीब 7:20 बजे छत पर जाती दिखती हैं

8:17 बजे कुछ लोग एक बॉडी नीचे लाते नजर आते हैं

जबकि अस्पताल रिकॉर्ड में शव को रात 12 बजे के बाद लाया जाना दर्ज है इन अलग-अलग समय ने जांच को और जटिल बना दिया है। परिवार का कहना है कि कैमरे के समय से छेड़छाड़ की गई हो सकती है, जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी गड़बड़ी भी हो सकती है।

 

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर सवाल

एम्स भोपाल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों के निशान बताए गए हैं। हालांकि, रिपोर्ट को लेकर दोनों पक्षों में विवाद है।

परिवार का कहना है कि रिपोर्ट अधूरी है और सही तरीके से जांच नहीं हुई। वहीं ससुराल पक्ष का कहना है कि रिपोर्ट को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

एक और विवाद यह सामने आया कि जिस बेल्ट से फांसी की बात कही जा रही है, वह पोस्टमॉर्टम के समय जांच में शामिल नहीं थी, जिससे फॉरेंसिक जांच पूरी नहीं हो सकी।

 

पति समर्थ सिंह पर आरोप और फरार स्थिति

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा नाम समर्थ सिंह का सामने आया है, जो फिलहाल फरार हैं। पुलिस ने उन पर 10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है और उनकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें लगी हुई हैं।

कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी है। परिवार का आरोप है कि उन्हें जानबूझकर फरार होने का मौका दिया गया।

 

कोर्ट में क्या हुआ?

इस मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब आरोपी पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। इसके बाद वह पूरी तरह फरार हो गया और पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए टीमों का गठन किया। उसके ऊपर 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है।

वहीं दूसरी ओर, सास और रिटायर्ड जिला जज गिरीबाला सिंह को शुरुआती स्तर पर जमानत मिल गई। इस फैसले के बाद मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया और परिवार ने न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए।

परिवार का कहना है कि प्रभावशाली लोगों के कारण जांच धीमी हो रही है, जबकि ससुराल पक्ष का दावा है कि उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं और मामले को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

 

पुलिस जांच और सवालों की लंबी सूची

पुलिस जांच में कई अहम बिंदु सामने आए हैं, लेकिन अभी तक केस पूरी तरह सुलझा नहीं है।

  • पुलिस ने कथित तौर पर इस्तेमाल की गई बेल्ट को जब्त किया है
  • लेकिन पोस्टमॉर्टम के समय वह बेल्ट फॉरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध नहीं थी
  • बाद में बेल्ट मिलने के बावजूद जांच पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से नहीं हो सकी

इसी वजह से परिवार ने जांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं और दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग की है। उनका कहना है कि एम्स दिल्ली में री-पोस्टमॉर्टम होना चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

 

सबसे बड़ा विवाद: सीसीटीवी फुटेज

सीसीटीवी फुटेज इस केस का सबसे अहम सबूत माना जा रहा है। इसमें ट्विशा को छत पर जाते और फिर कुछ समय बाद तीन लोगों को उनका शव नीचे लाते हुए देखा गया है।

परिवार का कहना है कि यह सब कुछ सामान्य नहीं था और फुटेज में छेड़छाड़ की संभावना है। वहीं साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कैमरे के समय में अंतर है तो तकनीकी कारण हो सकते हैं, लेकिन इसकी फॉरेंसिक जांच जरूरी है।

इसी फुटेज को लेकर अब यह सवाल सबसे बड़ा बन गया है कि –

अगर यह आत्महत्या थी, तो शव को तुरंत नीचे क्यों लाया गया? और अगर यह हत्या है, तो असली समय और घटनाक्रम क्या था?

 

परिवार के गंभीर आरोप

ट्विशा के परिवार ने शुरू से ही इसे हत्या का मामला बताया है। उनके अनुसार ट्विशा पर लगातार मानसिक दबाव बनाया जा रहा था।

परिवार का आरोप है कि –

  • ट्विशा को दहेज और पारिवारिक दबाव में परेशान किया जाता था
  • उसे बच्चे को लेकर ताने दिए जाते थे
  • मानसिक रूप से उसे कमजोर किया जा रहा था
  • ससुराल पक्ष ने कई महत्वपूर्ण सबूतों को प्रभावित किया

ट्विशा के भाई, जो भारतीय सेना में मेजर हैं, ने भी आरोप लगाया कि पुलिस जांच में देरी की गई और आरोपी को भागने का समय मिला।

परिवार ने यह भी दावा किया है कि एफआईआर दर्ज होने में देरी हुई, जिससे केस कमजोर हुआ।

 

ससुराल पक्ष की सफाई और दावे

वहीं ससुराल पक्ष ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि ट्विशा मानसिक तनाव में थीं और उन्हें नशे की आदत थी।

सास का दावा है कि ट्विशा ने खुद गर्भपात का निर्णय लिया और बाद में डिप्रेशन में चली गईं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है और मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है।

ससुराल पक्ष ने यह भी कहा कि ट्विशा को समय-समय पर आर्थिक मदद दी जाती थी और उनके साथ किसी तरह की हिंसा नहीं हुई।

 

मीडिया, राजनीति और जनदबाव

यह केस अब सोशल मीडिया और मीडिया में भी काफी चर्चा में है। दोनों पक्षों के दावों के चलते जनता में भी मतभेद देखने को मिल रहा है।

परिवार का कहना है कि प्रभावशाली ससुराल पक्ष के कारण उन्हें न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है, जबकि ससुराल पक्ष का कहना है कि उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है।

 

सबसे बड़ा सवाल: सच क्या है?

आज भी इस केस में कई सवाल अनसुलझे हैं –

  • ट्विशा की मौत आत्महत्या थी या हत्या?
  • सीसीटीवी फुटेज पूरी कहानी बता रहा है या अधूरी सच्चाई?
  • क्या पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर्याप्त थी?
  • क्या जांच में लापरवाही हुई या जानबूझकर देरी की गई?

इन सवालों का जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है।