113 साल पुराने दिल्ली जिमखाना क्लब पर संकट : सरकार ने खाली करने को कहा कैंपस – जानिए क्या है मामला?

देश की राजधानी दिल्ली का मशहूर और बेहद प्रतिष्ठित Delhi Gymkhana Club इन दिनों बड़े विवाद के केंद्र में है। केंद्र सरकार ने क्लब को 5 जून 2026 तक उसका पूरा परिसर खाली करने का आदेश दिया है। यह वही क्लब है जिसे कभी ब्रिटिश अफसरों, महाराजाओं, नौकरशाहों और देश की हाई सोसायटी का सबसे खास ठिकाना माना जाता था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या 113 साल पुरानी इस ऐतिहासिक संस्था का सफर अपने अंत की तरफ बढ़ रहा है?

सरकार का कहना है कि सफदरजंग रोड स्थित क्लब की 27.3 एकड़ जमीन राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा ढांचे को मजबूत करने और सार्वजनिक हित की परियोजनाओं के लिए जरूरी है। दूसरी तरफ क्लब प्रबंधन का दावा है कि यह कार्रवाई जल्दबाजी में की जा रही है और इससे हजारों सदस्य, कर्मचारी और उससे जुड़े परिवार प्रभावित होंगे।

113-year-old Delhi Gymkhana Club in trouble

22 मई के नोटिस से शुरू हुआ नया विवाद

क्लब प्रबंधन के मुताबिक 22 मई को आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय यानी L&DO की तरफ से आधिकारिक नोटिस मिला। इसमें कहा गया कि सरकार अब इस जमीन को वापस अपने कब्जे में लेना चाहती है।

यह परिसर दिल्ली के 2, सफदरजंग रोड पर स्थित है, जो प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब माना जाता है। नोटिस में कहा गया कि यह जमीन मूल रूप से “इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड” को सामाजिक और खेल गतिविधियों के संचालन के लिए लीज पर दी गई थी। अब सरकार ने लीज समाप्त करने का फैसला लिया है।

सरकार ने साफ कहा है कि यह इलाका राष्ट्रीय राजधानी के सबसे संवेदनशील इलाकों में आता है, इसलिए सुरक्षा कारणों से यहां नई संस्थागत और प्रशासनिक जरूरतें विकसित की जानी हैं।

कैसे शुरू हुआ था दिल्ली जिमखाना क्लब

आज जिस क्लब को लेकर इतना विवाद हो रहा है, उसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। साल 1911 में ब्रिटिश सरकार ने भारत की राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली शिफ्ट करने का फैसला लिया। नई राजधानी के साथ अंग्रेज अधिकारियों के लिए एक सामाजिक और खेल केंद्र की जरूरत महसूस हुई।

इसी सोच के तहत 1913 में “इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” की स्थापना हुई। यह क्लब मुख्य रूप से ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों, सिविल सेवा अधिकारियों और उच्च वर्ग के लोगों के लिए बनाया गया था।

इस क्लब को स्थापित करने में उस दौर के कई बड़े राजघरानों ने मदद की थी। इनमें ग्वालियर, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कश्मीर और किशनगढ़ के महाराजा तथा भोपाल के नवाब शामिल थे। इन्हें क्लब का लाइफ मेंबर बनाया गया था।

 

1918 की लीज अब बनी सबसे बड़ी वजह

क्लब को जो जमीन मिली थी, वह 1918 में एक विशेष लीज व्यवस्था के तहत दी गई थी। लगभग 27.3 एकड़ की इस जमीन का सालाना किराया केवल 1000 रुपये तय किया गया था।

लेकिन इस लीज में एक बेहद महत्वपूर्ण शर्त भी थी। उसमें साफ लिखा गया था कि अगर सरकार को कभी “सार्वजनिक उद्देश्य” के लिए जमीन की जरूरत पड़े, तो वह लीज खत्म करके जमीन वापस ले सकती है।

अब ठीक उसी शर्त का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार ने क्लब को खाली करने का आदेश दिया है।

 

लुटियंस दिल्ली की पहचान माना जाता है क्लब

दिल्ली जिमखाना क्लब सिर्फ एक स्पोर्ट्स क्लब नहीं रहा। इसे लंबे समय तक सत्ता, प्रतिष्ठा और प्रभाव का प्रतीक माना जाता रहा है।

ब्रिटिश वास्तुकार Robert Russell ने 1930 के दशक में इस क्लब की इमारत डिजाइन की थी। यही वास्तुकार कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन क्षेत्र की डिजाइनिंग के लिए भी जाने जाते हैं।

क्लब में विशाल लॉन, टेनिस कोर्ट, बार, रेस्टोरेंट, कॉटेज और स्विमिंग पूल जैसी सुविधाएं विकसित की गईं। यहां के केक, पेस्ट्री और नॉन-वेज व्यंजन दिल्ली की हाई सोसायटी में काफी मशहूर रहे।

 

सदस्यता आज भी बेहद मुश्किल

दिल्ली जिमखाना क्लब की सदस्यता को आज भी देश की सबसे मुश्किल और प्रतिष्ठित सदस्यताओं में गिना जाता है।

मौजूदा समय में क्लब के करीब 5,600 स्थायी सदस्य बताए जाते हैं। हर साल केवल 60 से 100 नए सदस्यों को ही जगह मिलती है। वह भी तब, जब कोई पुराना सदस्य इस्तीफा दे या उसकी सदस्यता खत्म हो जाए।

क्लब में सदस्यता का एक अनौपचारिक कोटा सिस्टम भी वर्षों से चर्चा में रहा है –

  • 40% सदस्य सिविल सेवाओं से
  • 40% रक्षा सेवाओं से
  • 20% अन्य क्षेत्रों से

इसी वजह से आम लोगों के लिए यहां सदस्य बनना लगभग नामुमकिन माना जाता है। कई लोगों की वेटिंग लिस्ट 30 से 37 साल तक पहुंच चुकी है।

 

आजादी के बाद भी बना रहा एलीट कल्चर

भारत की आजादी के बाद क्लब के नाम से “इम्पीरियल” शब्द हटा दिया गया। लेकिन इसकी पहचान और प्रभाव बना रहा।

देश के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru भी इससे जुड़े रहे। धीरे-धीरे क्लब में भारतीय भोजन और भारतीय सदस्य बढ़े, लेकिन इसकी एलीट छवि कभी खत्म नहीं हुई।

यह क्लब लंबे समय तक नौकरशाहों, सेना अधिकारियों, न्यायाधीशों, बड़े उद्योगपतियों और राजनीतिक नेताओं का पसंदीदा सामाजिक केंद्र बना रहा।

 

2014 से शुरू हुआ कानूनी विवाद

दिल्ली जिमखाना क्लब पर विवाद कोई नया नहीं है। इसकी शुरुआत लगभग एक दशक पहले हुई थी।

2014 में दिल्ली सरकार ने क्लब पर करीब 2.92 करोड़ रुपये के लग्जरी टैक्स बकाया होने का मामला उठाया। इसके बाद कई वित्तीय और प्रशासनिक सवाल सामने आए।

2016 में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने क्लब की जांच शुरू की। जांच में सदस्यता में पक्षपात, वित्तीय गड़बड़ी, प्रबंधन की कमियां और अनधिकृत निर्माण जैसे आरोप सामने आए। इसके बाद मामला NCLT और NCLAT तक पहुंच गया।

 

सरकार ने अपने हाथ में लिया था नियंत्रण

2021 में NCLAT ने क्लब की पुरानी जनरल कमेटी को हटाकर केंद्र सरकार को एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने का आदेश दिया था।

फिर 2022 में NCLT ने क्लब का नियंत्रण सरकार समर्थित व्यवस्था को सौंप दिया। इसके बाद 15 सदस्यीय कमेटी बनाई गई।

हालांकि बाद में अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था अस्थायी होगी और मार्च 2025 तक सुधार प्रक्रिया पूरी करके नए चुनाव कराए जाएंगे।

लेकिन तय समय तक चुनाव नहीं हो सके। इसी के बाद अब सरकार ने जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

 

सरकार क्या कह रही है

केंद्र सरकार का कहना है कि यह परिसर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाके में स्थित है। इसलिए इसे रक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर क्लब तय समय तक परिसर खाली नहीं करता, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्जा लिया जा सकता है।

आदेश के अनुसार पूरी 27.3 एकड़ जमीन, सभी इमारतें, लॉन और संरचनाएं भारत सरकार के नियंत्रण में चली जाएंगी।

 

क्लब ने मांगी वैकल्पिक जमीन

क्लब प्रबंधन ने सरकार को भेजे जवाब में कहा है कि अगर उसे मौजूदा परिसर खाली करना पड़े, तो उसे वैकल्पिक जमीन दी जानी चाहिए।

क्लब का कहना है कि यहां करीब 14 हजार सदस्य और उपयोगकर्ता जुड़े हुए हैं, जबकि 500 से ज्यादा कर्मचारी यहां काम करते हैं। दशकों में यहां खेल सुविधाओं और बुनियादी ढांचे पर भारी निवेश किया गया है।

क्लब ने सरकार से यह भी पूछा है कि क्या उसे किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा।

 

हाईकोर्ट पहुंचा मामला

सरकारी आदेश के खिलाफ क्लब अब Delhi High Court पहुंच चुका है। वरिष्ठ वकील Abhishek Manu Singhvi ने अदालत में जल्द सुनवाई की मांग की है।

अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 26 मई की तारीख तय की है। अब सबकी नजर इसी सुनवाई पर टिकी है।

 

सिर्फ एक क्लब नहीं, इतिहास का हिस्सा भी

दिल्ली जिमखाना क्लब को सिर्फ एक स्पोर्ट्स या सोशल क्लब के रूप में नहीं देखा जाता। यह ब्रिटिश दौर, सत्ता संस्कृति और दिल्ली के सामाजिक इतिहास का हिस्सा माना जाता है।

यहां भारत विभाजन से पहले भारतीय और ब्रिटिश सैन्य अधिकारी साथ बैठते थे। आजादी के बाद भी यह क्लब सत्ता और प्रभाव का प्रतीक बना रहा।

अब अगर सरकार का आदेश पूरी तरह लागू होता है, तो दिल्ली के सबसे पुराने एलीट संस्थानों में से एक का स्वरूप हमेशा के लिए बदल सकता है।