भारत और कनाडा के रिश्तों में लंबे समय बाद फिर से नई गर्मजोशी दिखाई देने लगी है। दोनों देश अब अपने आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश में जुट गए हैं। इसी कड़ी में भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौते को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी तय किया है।
कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney ने कहा कि भारत के साथ होने वाला यह समझौता कनाडाई कारोबार और वहां के कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उन्होंने इसे “गेम चेंजर” बताया और कहा कि इससे कनाडा को दुनिया के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक तक सीधी पहुंच मिलेगी।

फ्री ट्रेड डील पर तेजी से आगे बढ़ रही बातचीत
कनाडा के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने भारत के केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal से मुलाकात कर अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा, कृषि-खाद्य क्षेत्र, टेक्नोलॉजी और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
मार्क कार्नी ने कहा कि दोनों देश इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह केवल व्यापारिक समझौता नहीं होगा, बल्कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए नए अवसरों का दरवाजा खोलेगा।

गोयल बोले- रिश्तों में आया नया भरोसा
भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 25 से 27 मई तक कनाडा के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस दौरान उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री से मुलाकात की और प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से शुभकामनाएं भी दीं।
गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की हालिया भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा और विश्वास पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा अब अपने रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

गोयल के अनुसार दोनों पक्षों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA को जल्द पूरा करने को लेकर सकारात्मक माहौल बना है। उनका कहना है कि यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा पहुंचा सकता है।
17 अरब डॉलर से 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने की तैयारी
भारत और कनाडा के बीच मौजूदा व्यापार लगभग 17 अरब डॉलर के आसपास है। अब दोनों देश इसे बढ़ाकर 2030 तक 50 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। गोयल ने कहा कि यह लक्ष्य मुश्किल नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की गंभीर इच्छा दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि साल खत्म होने से पहले या उससे भी पहले फ्री ट्रेड समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश की जाए।
गोयल ने कहा कि भारत और कनाडा दोनों लोकतांत्रिक देश हैं और वैश्विक शांति, आर्थिक विकास तथा साझा समृद्धि में विश्वास रखते हैं। ऐसे में दोनों की साझेदारी आने वाले समय में और मजबूत हो सकती है।
कनाडा भेजेगा बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री Maninder Sidhu ने घोषणा की कि इस साल के अंत तक कनाडा का एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भारत का दौरा करेगा। उन्होंने कहा कि भारत के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाने को लेकर कनाडा में काफी उत्साह है।
सिद्धू ने कहा कि कनाडा अब अपने व्यापारिक साझेदारों का दायरा बढ़ाना चाहता है और अमेरिका पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि कनाडा करीब 300 अरब डॉलर के गैर-अमेरिकी निर्यात को बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है और भारत इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत से गया सबसे बड़ा कारोबारी दल
पीयूष गोयल ने बताया कि वे अपने साथ भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल लेकर कनाडा पहुंचे हैं। उनके मुताबिक 100 से ज्यादा भारतीय कारोबारी इस दौरे में शामिल हैं।
इस प्रतिनिधिमंडल में खनन, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस और टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़े बड़े उद्योगपति और कारोबारी शामिल हैं। इससे साफ है कि दोनों देश केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि नई तकनीकों और उद्योगों में भी साझेदारी बढ़ाना चाहते हैं।
किन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग?
दोनों देशों के बीच जिन सेक्टरों में सबसे ज्यादा संभावनाएं देखी जा रही हैं, उनमें ऊर्जा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, सेमीकंडक्टर, टेक्नोलॉजी और स्वच्छ ऊर्जा प्रमुख हैं।
कनाडा दुनिया के बड़े यूरेनियम उत्पादक देशों में शामिल है और भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए न्यूक्लियर ऊर्जा पर भी जोर दे रहा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच यूरेनियम सप्लाई को लेकर भी बड़ा समझौता हुआ था।
इसके अलावा कनाडा के पेंशन फंड और निवेशक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ाने में रुचि दिखा रहे हैं।
2023 में बिगड़े थे रिश्ते
भारत और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड समझौते पर बातचीत साल 2010 से चल रही थी। लेकिन 2023 में दोनों देशों के संबंधों में गंभीर तनाव आ गया था।
कनाडा की तत्कालीन सरकार ने खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में भारत पर आरोप लगाए थे। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया था और कनाडा पर चरमपंथी तत्वों को संरक्षण देने का आरोप लगाया था।
इन घटनाओं के बाद दोनों देशों के रिश्ते ठंडे पड़ गए और व्यापार वार्ता भी रुक गई थी।
मार्क कार्नी के आने के बाद बदला माहौल
विशेषज्ञ मानते हैं कि मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार शुरू हुआ है। उनकी भारत यात्रा ने दोनों देशों के बीच संवाद का रास्ता फिर से खोल दिया।
गोयल ने कहा कि कार्नी की भारत यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को पूरी तरह नई दिशा दी है। अब दोनों पक्ष पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं।
CEPA क्या है?
Comprehensive Economic Partnership Agreement यानी CEPA एक व्यापक व्यापार समझौता होता है। इसके तहत दो देश आयात-निर्यात पर लगने वाले टैक्स कम करते हैं, निवेश को आसान बनाते हैं और सेवाओं के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाते हैं।
अगर भारत और कनाडा के बीच यह समझौता होता है, तो दोनों देशों के कारोबारियों को बड़ा फायदा मिल सकता है। इससे व्यापार की लागत कम होगी, निवेश बढ़ेगा और नई नौकरियों के अवसर पैदा हो सकते हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है कनाडा?
कनाडा प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध देश है। वहां तेल, गैस, यूरेनियम और खनिजों का बड़ा भंडार है। वहीं भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसे ऊर्जा, तकनीक और निवेश की जरूरत है।
दोनों देशों की जरूरतें एक-दूसरे को पूरक बनाती हैं। यही वजह है कि व्यापार विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर राजनीतिक मतभेद कम होते हैं तो भारत-कनाडा साझेदारी आने वाले वर्षों में काफी मजबूत हो सकती है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ती बातचीत यह संकेत दे रही है कि भारत और कनाडा अब रिश्तों के नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जहां फोकस टकराव नहीं बल्कि आर्थिक सहयोग और साझा विकास पर रहेगा।
