कर्नाटक में सत्ता संग्राम तेज: क्या सिद्धारमैया की विदाई तय? डीके शिवकुमार के नाम पर कांग्रेस में मंथन

कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। राज्य में कांग्रेस सरकार बनने के तीन साल बाद अब मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा यही है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जल्द इस्तीफा दे सकते हैं और उनकी जगह उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंपी जा सकती है।

दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई लंबी बैठकों के बाद इन अटकलों ने और जोर पकड़ लिया है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और नेताओं के बयानों से साफ है कि कर्नाटक कांग्रेस में बड़ा फैसला कभी भी सामने आ सकता है।

Power struggle intensifies in Karnataka

दिल्ली बैठक के बाद तेज हुई सियासी हलचल

मंगलवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ कई घंटों तक चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में राज्य की राजनीतिक स्थिति, नेतृत्व परिवर्तन और आने वाले चुनावों को लेकर गंभीर बातचीत हुई।

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने सिद्धारमैया से नेतृत्व परिवर्तन को लेकर खुलकर चर्चा की। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि कर्नाटक में सत्ता संतुलन और संगठन दोनों को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति बनाई जाए। इसी कारण दिल्ली में हुई यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका देने और राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव भी रखा गया। हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

गुरुवार की बैठक पर सबकी नजर

राजनीतिक चर्चाओं के बीच सबसे ज्यादा ध्यान उस बैठक पर है जो गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री आवास पर होने वाली है। सिद्धारमैया ने मंत्रियों और करीबी नेताओं को ब्रेकफास्ट मीटिंग के लिए बुलाया है। माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद आगे का फैसला स्पष्ट हो सकता है।

सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से मिलने का समय भी मांगा है। इससे इस्तीफे की अटकलें और तेज हो गई हैं। कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में चर्चा है कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है।

हालांकि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता अब भी सार्वजनिक रूप से यही कह रहे हैं कि पार्टी में किसी तरह का संकट नहीं है और सारी खबरें सिर्फ अटकलें हैं।

 

डीके शिवकुमार क्यों माने जा रहे सबसे बड़े दावेदार?

डीके शिवकुमार लंबे समय से कर्नाटक कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत में उनकी भूमिका अहम मानी गई थी। संगठन को मजबूत करने, विधायकों को एकजुट रखने और चुनावी रणनीति बनाने में उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी।

जब 2023 में कांग्रेस सरकार बनी थी, तभी से यह चर्चा चल रही थी कि मुख्यमंत्री पद को लेकर “ढाई-ढाई साल” का फॉर्मूला तय हुआ था। यानी शुरुआती ढाई साल सिद्धारमैया मुख्यमंत्री रहेंगे और उसके बाद डीके शिवकुमार को मौका दिया जाएगा।

हालांकि सिद्धारमैया समर्थक लगातार इस दावे को खारिज करते रहे हैं। लेकिन शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने सत्ता संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसा आश्वासन दिया था।

अब सरकार के तीन साल पूरे होने के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा के केंद्र में आ गया है।

 

सिद्धारमैया की ताकत क्या है?

सिद्धारमैया सिर्फ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ही नहीं, बल्कि कर्नाटक की राजनीति में बड़ा सामाजिक आधार रखने वाले नेता भी हैं। खासकर ओबीसी समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

यही वजह है कि कांग्रेस नेतृत्व किसी भी बदलाव को बहुत सावधानी से करना चाहता है। पार्टी नहीं चाहती कि नेतृत्व परिवर्तन से संगठन में टूट-फूट या नाराजगी पैदा हो।

सूत्रों के मुताबिक सिद्धारमैया ने हाईकमान से साफ कहा था कि अगर उन्हें अचानक हटाया गया तो इसका राजनीतिक असर पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक खड़े हैं।

इसी कारण कांग्रेस नेतृत्व सत्ता परिवर्तन को बेहद संतुलित तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है।

 

सिद्धारमैया के बेटे की भी बढ़ सकती है भूमिका

राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह भी कहा जा रहा है कि सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया को नई कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। वर्तमान में वे विधान परिषद सदस्य हैं और पार्टी में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन की स्थिति में सिद्धारमैया खेमे को संतुष्ट रखने के लिए यह कदम उठाया जा सकता है। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि बदलाव के बावजूद पार्टी में एकता बनी रहे।

इसके साथ ही यह भी चर्चा है कि सिद्धारमैया के करीबी नेता सतीश जारकीहोली को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश मानी जाएगी।

 

कांग्रेस क्यों बदलना चाहती है चेहरा?

कांग्रेस 2028 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर अभी से रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी को लगता है कि लंबे समय तक एक ही नेतृत्व रहने से सत्ता विरोधी माहौल बन सकता है।

डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस नए चेहरे और नई ऊर्जा के साथ अगले चुनाव में जाना चाहती है। इसके अलावा पार्टी दक्षिण भारत में मजबूत नेतृत्व तैयार करने पर भी ध्यान दे रही है।

सूत्रों के मुताबिक प्रियंका गांधी वाड्रा भी नेतृत्व परिवर्तन के पक्ष में मानी जा रही हैं। पार्टी का मानना है कि समय रहते बदलाव करने से राजनीतिक नुकसान कम होगा और संगठन को नई दिशा मिलेगी।

 

बीजेपी ने भी साधा निशाना

कर्नाटक में चल रही इस राजनीतिक उठापटक पर बीजेपी लगातार कांग्रेस को घेर रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य में पिछले एक साल से सरकार की बजाय सत्ता संघर्ष ज्यादा दिख रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि अगर कांग्रेस ओबीसी चेहरे सिद्धारमैया को हटाती है तो इसका असर पिछड़े वर्गों में दिख सकता है। उन्होंने दावा किया कि इससे कांग्रेस और INDIA गठबंधन दोनों को राजनीतिक नुकसान हो सकता है।

वहीं भाजपा नेता आर अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार प्रशासन चलाने की बजाय अंदरूनी लड़ाई में उलझी हुई है।

 

सुरजेवाला और वेणुगोपाल की भूमिका अहम

कांग्रेस हाईकमान की ओर से रणदीप सिंह सुरजेवाला और केसी वेणुगोपाल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। दोनों नेताओं को कर्नाटक का राजनीतिक संकट संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक, हाईकमान चाहता है कि अगर नेतृत्व परिवर्तन हो तो वह बिना किसी बड़े विवाद के पूरा हो। इसी कारण लगातार बातचीत और समन्वय की कोशिश की जा रही है।

सुरजेवाला जल्द बेंगलुरु पहुंच सकते हैं, जहां वे विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करेंगे।

 

जातिगत समीकरण भी बड़ी वजह

कर्नाटक की राजनीति में जातिगत समीकरण बेहद अहम माने जाते हैं। सिद्धारमैया ओबीसी समुदाय से आते हैं, जबकि डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय के बड़े नेता हैं।

कांग्रेस नेतृत्व को यह ध्यान रखना होगा कि किसी भी फैसले से किसी वर्ग में असंतोष न पैदा हो। यही कारण है कि पार्टी संगठन और सरकार दोनों में संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

अगर शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं, तो कांग्रेस ओबीसी समुदाय को साधने के लिए संगठन में नई नियुक्तियां कर सकती है।

 

2023 से अब तक कैसे बढ़ा विवाद?

2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने शानदार जीत हासिल की थी। लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर तभी से चर्चा शुरू हो गई थी। आखिरकार सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया।

इसके बाद समय-समय पर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें सामने आती रहीं। जून 2025 में शिवकुमार समर्थक विधायकों ने खुलकर उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठाई थी। उस समय कांग्रेस हाईकमान को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

नवंबर 2025 में सरकार के ढाई साल पूरे होने के बाद यह चर्चा फिर तेज हो गई। तब भी पार्टी नेतृत्व ने किसी बदलाव से इनकार किया था।

अब 2026 में फिर वही मुद्दा पूरी ताकत से सामने आ गया है।

 

क्या सच में बदल जाएगा कर्नाटक का मुख्यमंत्री?

फिलहाल कांग्रेस की ओर से कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह लगातार बैठकें हो रही हैं और राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं, उससे साफ है कि कर्नाटक में बड़ा बदलाव संभव है।

अगर सिद्धारमैया इस्तीफा देते हैं तो यह सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि कांग्रेस की भविष्य की राजनीति के लिए भी अहम मोड़ साबित होगा। दूसरी ओर अगर वे पद पर बने रहते हैं, तो पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और बढ़ सकती है।

अब सबकी नजर गुरुवार की बैठकों और कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ दिन कर्नाटक की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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