घुसपैठ और जनसंख्या बदलाव पर केंद्र सख्त, सरकार ने बनाई हाई-लेवल कमिटी – जानिए क्या है मामला?

देश में बदलते जनसंख्या संतुलन और अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने एक हाई-लेवल कमिटी का गठन किया है, जो देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे असामान्य जनसंख्या बदलावों की जांच करेगी। इस समिति की जिम्मेदारी यह पता लगाना होगी कि किन कारणों से कुछ इलाकों में आबादी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और इसका देश की सुरक्षा, संसाधनों और सामाजिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ रहा है।

केंद्र सरकार ने इस समिति का गठन ऐसे समय में किया है, जब कई राज्यों में अवैध घुसपैठ और जनसंख्या असंतुलन को लेकर लगातार बहस चल रही है। सरकार का कहना है कि यह केवल जनगणना का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।

 

रिटायर्ड जज को मिली कमिटी की कमान

सरकार ने रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर को इस कमिटी का अध्यक्ष बनाया है। समिति में कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी शामिल किए गए हैं। इनमें सेंसस कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण, पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि सदस्य के रूप में शामिल हैं।

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-I) को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। जरूरत पड़ने पर यह कमिटी राज्यों की सरकारों, सुरक्षा एजेंसियों, सामाजिक संगठनों और शिक्षण संस्थानों से भी राय ले सकेगी।

Centre takes strict action on infiltration and population change

अमित शाह बोले- यह देश के भविष्य का सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि अवैध घुसपैठ और अन्य कारणों से होने वाला असामान्य जनसंख्या बदलाव देश के वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए गंभीर चुनौती है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 के भाषण में इस तरह की कमिटी बनाने की घोषणा की थी। अब उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने यह हाई-लेवल कमिटी बनाई है।

अमित शाह के मुताबिक यह समिति पूरे देश में धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर जनसंख्या बदलाव के पैटर्न का अध्ययन करेगी और समाधान भी सुझाएगी।

 

कमिटी किन बातों की जांच करेगी

सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार समिति यह जांच करेगी कि देश के किन हिस्सों में आबादी में असामान्य बदलाव हो रहे हैं और इसके पीछे क्या कारण हैं। इसमें खासतौर पर अवैध घुसपैठ, सीमा पार से लोगों का आना, अनियंत्रित बसावट और प्रशासनिक लापरवाही जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी।

कमिटी यह भी देखेगी कि इन बदलावों का असर स्थानीय संसाधनों, रोजगार, कानून व्यवस्था और सामाजिक संतुलन पर कितना पड़ रहा है।

इसके अलावा समिति यह सुझाव भी देगी कि अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत और देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया को कैसे मजबूत बनाया जाए।

 

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा

सरकार का कहना है कि अचानक बढ़ती आबादी वाले इलाकों में जमीन, पानी, राशन, स्कूल और अस्पताल जैसे संसाधनों पर दबाव बढ़ जाता है। इससे स्थानीय लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

अगर समिति की रिपोर्ट के आधार पर नई नीतियां लागू होती हैं, तो सीमा सुरक्षा और पहचान व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है। इससे सरकारी योजनाओं का सही लाभ असली नागरिकों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

इसके साथ ही उन इलाकों में संसाधनों की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी, जहां अचानक आबादी बढ़ने से दबाव बढ़ गया है।

 

क्यों बढ़ी चिंता?

देश में अवैध घुसपैठ को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा असम और बंगाल जैसे सीमावर्ती राज्यों में होती रही है। असम के पूर्व राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा ने 1998 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ के कारण असम के कई जिलों का जनसंख्या संतुलन बदल गया है।

रिपोर्ट में कहा गया था कि कुछ इलाकों में मूल निवासी धीरे-धीरे अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल और बिहार के कुछ सीमावर्ती जिलों में भी पिछले कई दशकों में आबादी के स्वरूप में बड़े बदलाव दर्ज किए गए हैं।

 

धार्मिक जनसंख्या पर भी चर्चा

मई 2024 में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की ओर से जारी एक रिसर्च पेपर में 1950 से 2015 के बीच धार्मिक आबादी के आंकड़ों का अध्ययन किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि इस दौरान देश की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी में गिरावट आई, जबकि मुस्लिम आबादी का प्रतिशत बढ़ा।

इस अध्ययन में शामिल अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि अब नई हाई-लेवल कमिटी की सदस्य भी हैं।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या बदलाव को केवल धर्म के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। इसमें शिक्षा, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार जैसे कई कारण भी भूमिका निभाते हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट भी जता चुका है चिंता

साल 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘सर्वानंद सोनोवाल बनाम भारत संघ’ मामले में असम में अवैध घुसपैठ पर सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि बड़े पैमाने पर हो रही अवैध घुसपैठ राज्य के नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा पर असर डाल रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने इसे एक तरह का “अघोषित बाहरी आक्रमण” बताया था। अदालत ने अवैध प्रवासियों की पहचान से जुड़े पुराने कानून को भी रद्द कर दिया था।

 

सीमा इलाकों पर खास नजर

सरकार के मुताबिक यह समस्या केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रही है। अब इसका असर शहरों, औद्योगिक इलाकों और आदिवासी क्षेत्रों तक भी दिखाई देने लगा है।

इसी वजह से कमिटी को पूरे देश में डेटा जुटाने और लगातार निगरानी का सिस्टम तैयार करने का काम भी दिया गया है। इससे भविष्य में जनसंख्या बदलाव के पैटर्न को जल्दी समझने में मदद मिल सकेगी।

 

एक साल में देनी होगी रिपोर्ट

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार यह हाई-लेवल कमिटी एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार नई नीतियां और कानून बना सकती है।

सरकार का मानना है कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी और अवैध घुसपैठ जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। वहीं विपक्षी दल और कुछ सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर सरकार की मंशा और आंकड़ों की जांच को लेकर सवाल भी उठा सकते हैं।

फिलहाल यह साफ है कि आने वाले समय में जनसंख्या बदलाव और अवैध घुसपैठ का मुद्दा देश की राजनीति और नीतियों के केंद्र में रहने वाला है।