भारत में हर साल करोड़ों लोगों की नजर मानसून पर टिकी रहती है। खेती से लेकर जल भंडारण और बिजली उत्पादन तक, मानसून देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसी बीच Kerala Monsoon 2026 को लेकर भारतीय मौसम विभाग (IMD) का नया अपडेट सामने आया है, जिसने किसानों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
ताजा मौसम मॉडल के अनुसार, केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत पहले के अनुमान की तुलना में थोड़ी धीमी रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के लिए जरूरी ऊपरी स्तर की हवाएं अभी पूरी तरह मजबूत नहीं हुई हैं, जिसके कारण शुरुआत कमजोर रह सकती है। हालांकि अगले कुछ दिनों में परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद जताई गई है।

Kerala Monsoon 2026 की नई टाइमलाइन क्या है?
केरल में मानसून के आगमन को लेकर पहले अनुमान लगाया गया था कि यह मई के आखिरी सप्ताह में दस्तक दे सकता है, लेकिन अब मौसम की परिस्थितियों में बदलाव देखने को मिल रहा है। ताज़ा मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि मानसून की सक्रियता जून के पहले सप्ताह में धीरे-धीरे बढ़ेगी।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण भारत के ऊपर बनने वाली मजबूत ऊपरी हवाएं, जो मानसून को ताकत देने और बारिश की गतिविधियों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं, 5-6 जून के बाद ही पूरी तरह विकसित हो पाएंगी। ऐसे में मानसून की शुरुआती दस्तक हल्की या सामान्य से कमजोर रह सकती है। हालांकि, इसके बाद इसके धीरे-धीरे मजबूत होने और देश के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियों के बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। Kerala Monsoon 2026 की रफ्तार जून के दूसरे सप्ताह में और तेज हो सकती है।
क्या है देरी की मुख्य वजह?
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में हाल के दिनों में बनी चक्रवाती गतिविधियों ने मानसूनी हवाओं की रफ्तार को प्रभावित किया है। इसके अलावा पश्चिम से आने वाला एक पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) भी मौसम प्रणाली पर असर डाल रहा है।
जब तक यह प्रणाली पूरी तरह आगे नहीं बढ़ती, तब तक मानसून के लिए जरूरी पूर्वी और पश्चिमी हवाओं का संतुलन नहीं बन पाएगा। यही कारण है कि monsoon arrival in Kerala की प्रक्रिया उम्मीद से थोड़ी धीमी दिखाई दे रही है।
IMD Monsoon Forecast: मानसून घोषित करने के लिए क्या जरूरी है?
कई लोगों के मन में सवाल होता है कि आखिर मौसम विभाग किस आधार पर मानसून के आगमन की घोषणा करता है।
इसके लिए तीन प्रमुख शर्तें पूरी होना जरूरी होती हैं:
- केरल के कम से कम 60% मौसम केंद्रों पर लगातार बारिश दर्ज हो।
- अरब सागर से आने वाली पश्चिमी हवाएं निर्धारित गति तक पहुंचें।
- पर्याप्त बादल और नमी का स्तर मौजूद हो।
वर्तमान स्थिति में बारिश और बादलों की मात्रा संतोषजनक बताई जा रही है, लेकिन हवाओं की गति अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची है। यही वजह है कि IMD monsoon forecast में बदलाव देखने को मिला है।
इस साल देश में कितनी बारिश होने का अनुमान है?
मौसम विभाग ने इस वर्ष देशभर में औसतन 78 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान जताया है। यह सामान्य स्तर से लगभग 10 प्रतिशत कम है।

भारत में 1971 से 2020 के बीच के आंकड़ों के आधार पर औसत वार्षिक मानसूनी बारिश लगभग 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। इसी औसत को लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) कहा जाता है।
पहले अनुमान में मानसून को LPA का 92 प्रतिशत बताया गया था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया। इसका मतलब है कि इस बार सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बढ़ गई है।
LPA क्या होता है?
LPA यानी Long Period Average वह मानक औसत बारिश है जिसके आधार पर मानसून का मूल्यांकन किया जाता है।
- 100% LPA = सामान्य बारिश
- 104% से अधिक = सामान्य से ज्यादा बारिश
- 96% से कम = सामान्य से कम बारिश
अगर किसी वर्ष मानसून 90% LPA रहने का अनुमान दिया जाता है, तो इसका मतलब है कि बारिश औसत से लगभग 10% कम हो सकती है।
जून में किन राज्यों में कम बारिश की संभावना?
India weather forecast के अनुसार जून महीने में देश के कई महत्वपूर्ण कृषि राज्यों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है।
इन राज्यों में शामिल हैं:
- मध्य प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- झारखंड
वहीं राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर शुरुआती मानसून कमजोर रहता है तो खरीफ फसलों की बुवाई पर असर पड़ सकता है।
मानसून कोर जोन में कम बारिश क्यों चिंता बढ़ा रही है?
मौसम विभाग ने जिस क्षेत्र को मानसून कोर जोन बताया है, वहां की खेती सबसे ज्यादा वर्षा पर निर्भर रहती है।
इस क्षेत्र में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से, बिहार के कुछ इलाके शामिल हैं। अगर इन क्षेत्रों में rainfall forecast अपेक्षा से कम रहता है तो धान, दाल और अन्य खरीफ फसलों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ सकता है।
कमजोर मानसून का आम लोगों पर क्या असर होगा?
देश में होने वाली कुल बारिश का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा मानसून के दौरान ही प्राप्त होता है। ऐसे में delayed monsoon Kerala और कमजोर मानसून का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा।
खाद्य पदार्थ महंगे हो सकते हैं: कम बारिश की स्थिति में कृषि उत्पादन घट सकता है। इससे बाजार में सब्जियों, दालों और अन्य खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी: भारत की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। फसल उत्पादन कम होने पर ग्रामीण आय में कमी आ सकती है, जिससे बाजार में मांग घटने का खतरा रहेगा।
जल संकट बढ़ सकता है: कम बारिश के कारण बांधों और जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से नीचे रह सकता है। इसका असर पीने के पानी और सिंचाई दोनों पर पड़ सकता है।
बिजली की मांग बढ़ेगी: यदि बारिश कम और गर्मी ज्यादा रहती है तो एयर कंडीशनर, कूलर और पंखों का उपयोग बढ़ेगा, जिससे बिजली की खपत भी बढ़ सकती है।
El Nino का Kerala Monsoon 2026 पर कितना असर पड़ेगा?
मौसम विभाग ने बताया है कि इस वर्ष मानसून पर अल नीनो (El Nino) का प्रभाव देखने को मिल सकता है।
अल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे दुनिया भर के मौसम पैटर्न प्रभावित होते हैं।

भारत के संदर्भ में देखा जाए तो अल नीनो अक्सर मानसूनी हवाओं को कमजोर करता है। इसी कारण southwest monsoon update में इस बार बारिश के अनुमान को घटाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जून से लेकर अगस्त तक कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो प्रभाव बना रह सकता है।
क्या आने वाले दिनों में मानसून मजबूत हो सकता है?
हालांकि शुरुआती संकेत कमजोर शुरुआत की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।
यदि अरब सागर और हिंद महासागर से आने वाली नमी वाली हवाएं मजबूत होती हैं तो जून के दूसरे सप्ताह से मानसून की रफ्तार बढ़ सकती है। यही वजह है कि मौसम विभाग लगातार नए डेटा के आधार पर अपनी निगरानी जारी रखे हुए है।
निष्कर्ष:
Kerala Monsoon 2026 फिलहाल देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। मौसम विभाग के नए आकड़ों के अनुसार केरल में मानसून की शुरुआत सामान्य से थोड़ी कमजोर रह सकती है और देशभर में बारिश भी औसत से करीब 10 प्रतिशत कम रहने का अनुमान है। हालांकि आने वाले दिनों में मौसम की परिस्थितियों में सुधार होने पर मानसून मजबूत हो सकता है। ऐसे में किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों और आम लोगों के लिए आगामी southwest monsoon forecast India पर नजर बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।
FAQs-
Q1. Kerala monsoon 2026 arrival date क्या है?
उत्तर: मौसम विभाग के नवीनतम संकेतों के अनुसार केरल में मानसून जून के पहले सप्ताह में सक्रिय हो सकता है, हालांकि इसकी शुरुआत कमजोर रह सकती है।
Q2. IMD predicts new monsoon timeline का क्या मतलब है?
उत्तर: इसका मतलब है कि मौसम विभाग ने नए मौसम डेटा के आधार पर मानसून के आगमन की समयसीमा में बदलाव किया है।
Q3. क्या इस साल बारिश सामान्य से कम होगी?
उत्तर: हां, IMD के अनुसार इस साल देश में बारिश लगभग 90% LPA रहने का अनुमान है, जो सामान्य से करीब 10% कम है।
Q4. अल नीनो का मानसून पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर: अल नीनो मानसूनी हवाओं को कमजोर कर सकता है, जिससे भारत में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना बढ़ जाती है।
Q5. कम बारिश का सबसे ज्यादा असर किस पर पड़ेगा?
उत्तर: खेती, जल भंडारण, खाद्य उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ सकता है।

