IAEA Iran nuclear talks bombed sites: परमाणु ठिकानों की जांच फिर शुरू करना चाहता है IAEA, ईरान से सहयोग की अपील

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरान से अपील की है कि वह एजेंसी के साथ दोबारा सक्रिय सहयोग शुरू करे ताकि उन परमाणु ठिकानों का निरीक्षण किया जा सके, जिन्हें एक साल पहले अमेरिका और इजराइल के हमलों में नुकसान पहुंचा था।

IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने सोमवार को कहा कि एजेंसी और ईरान के बीच संवाद लगभग टूट चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि परमाणु निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत बहाल होना बेहद जरूरी है।

IAEA को अब तक नहीं मिली पूरी जानकारी

IAEA का कहना है कि ईरान ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि हमलों के बाद प्रभावित परमाणु ठिकानों पर क्या स्थिति है और वहां मौजूद परमाणु सामग्री का क्या हुआ।

विशेष चिंता उस उच्च संवर्धित यूरेनियम (Highly Enriched Uranium) को लेकर है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्तर परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाले 90 प्रतिशत संवर्धन के काफी करीब माना जाता है।

हालांकि हमलों में कुछ यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन माना जा रहा है कि बड़ी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम सुरक्षित बच गया हो सकता है।

 

अमेरिका और यूरोपीय देशों ने पेश किया प्रस्ताव

अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सामने एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया है। इसमें ईरान से मांग की गई है कि वह अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार की पूरी जानकारी दे और एजेंसी को आवश्यक निरीक्षण की अनुमति बिना देरी के प्रदान करे।

राजनयिकों का मानना है कि इस प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन मिल सकता है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत प्रभावित हो सकती है।

 

ईरान ने प्रस्ताव पर जताई नाराजगी

ईरान ने इस प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। वियना स्थित उसके मिशन ने कहा कि जिन देशों ने परमाणु ठिकानों पर हमले किए, उनकी जिम्मेदारी पीड़ित देश पर नहीं डाली जा सकती।

ईरान का कहना है कि दबाव और टकराव की नीति से सहयोग नहीं बढ़ेगा, बल्कि कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर होंगी। इससे पहले भी जब IAEA ने ईरान के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए थे, तब तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को और आगे बढ़ाने या एजेंसी के साथ सहयोग कम करने जैसे कदम उठाए थे।

 

मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

इस बीच ईरान और इजराइल के बीच तनाव भी जारी है। दोनों देशों के बीच हाल के दिनों में मिसाइल और सैन्य हमलों का आदान-प्रदान हुआ है। ऐसे माहौल में परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ती चिंता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि IAEA को जल्द निरीक्षण की अनुमति नहीं मिलती, तो ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वास्तविक स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ सकती है।

 

IAEA क्या है?

IAEA यानी International Atomic Energy Agency संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी वह संस्था है जो दुनिया भर में परमाणु कार्यक्रमों की निगरानी करती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परमाणु तकनीक का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हो और उसका उपयोग हथियार बनाने में न किया जाए।

 

FAQs

Q1. What is IAEA?

IAEA (International Atomic Energy Agency) संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था है, जो विभिन्न देशों के परमाणु कार्यक्रमों की निगरानी करती है।

 

Q2. Why is Iran being urged to re-engage?

IAEA चाहती है कि ईरान परमाणु ठिकानों पर निरीक्षण की अनुमति दे और हमलों के बाद परमाणु सामग्री की स्थिति स्पष्ट करे।

 

Q3. Are Iran’s nuclear sites confirmed destroyed?

कुछ परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि निरीक्षण के बाद ही हो सकेगी।

 

Q4. What is the concern internationally?

अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चिंता है कि निरीक्षण न होने से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पारदर्शिता कम हो सकती है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है।