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स्विट्जरलैंड के मतदाताओं ने एक महत्वपूर्ण जनमत संग्रह में देश की आबादी को 1 करोड़ तक सीमित करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। शुरुआती नतीजों के अनुसार करीब 55 प्रतिशत लोगों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया, जबकि 45 प्रतिशत मतदाता इसके समर्थन में रहे। इस फैसले के साथ एक बार फिर साफ हो गया है कि स्विस नागरिक बढ़ती आबादी को लेकर चिंतित जरूर हैं, लेकिन वे आव्रजन पर कड़े प्रतिबंध लगाने को इसका समाधान नहीं मानते। यही वजह है कि स्विट्जरलैंड द्वारा जनसंख्या सीमा प्रस्ताव को खारिज करने (Switzerland Rejects Population Cap Proposal) की खबर पूरे यूरोप में चर्चा का विषय बन गई है

क्या था जनसंख्या सीमा का प्रस्ताव?
यह प्रस्ताव दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी (SVP) लेकर आई थी। पार्टी का तर्क था कि देश की आबादी तेजी से बढ़ रही है और यदि यही रफ्तार जारी रही तो 2050 तक जनसंख्या 1 करोड़ से ऊपर पहुंच सकती है। प्रस्ताव में संविधान में बदलाव कर यह सुनिश्चित करने की मांग की गई थी कि आबादी 1 करोड़ की सीमा से अधिक न हो।
सरकारी अनुमानों के मुताबिक स्विट्जरलैंड की आबादी 2040 के शुरुआती वर्षों में ही 1 करोड़ के करीब पहुंच सकती है। फिलहाल देश की जनसंख्या लगभग 91 लाख है, जबकि 2002 में यह करीब 73 लाख थी। यानी दो दशकों में आबादी में 23 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

आखिर इतनी तेजी से क्यों बढ़ी आबादी?
स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ के बीच 2002 में लोगों के स्वतंत्र आवागमन को लेकर समझौता हुआ था। इसके बाद यूरोपीय देशों के नागरिकों के लिए स्विट्जरलैंड में काम करना और बसना आसान हो गया।
आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के अनुसार 2024 तक स्विट्जरलैंड की लगभग 32 प्रतिशत आबादी विदेश में जन्मे लोगों की है। OECD के सदस्य देशों में इस मामले में केवल लक्ज़मबर्ग और ऑस्ट्रेलिया उससे आगे हैं।
देश की मजबूत अर्थव्यवस्था, ऊंचे वेतन और बेहतर जीवन स्तर ने बड़ी संख्या में विदेशी कामगारों को आकर्षित किया है।
प्रस्ताव के समर्थक क्या चाहते थे?
SVP का कहना था कि लगातार बढ़ती आबादी देश की बुनियादी सुविधाओं पर दबाव बढ़ा रही है। पार्टी के अनुसार आवास संकट, बढ़ते किराए, ट्रैफिक जाम, स्कूलों पर बोझ और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत का एक बड़ा कारण जनसंख्या वृद्धि है।
पार्टी नेताओं का दावा था कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो स्विट्जरलैंड की प्राकृतिक सुंदरता, पर्यावरण और जीवनशैली प्रभावित हो सकती है।
कुछ समर्थकों का यह भी कहना था कि देश को अपनी सीमाओं और संसाधनों के हिसाब से जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना चाहिए।
प्रस्ताव के विरोध में क्यों खड़े हुए मतदाता?
हालांकि कई मतदाता बढ़ती आबादी को लेकर चिंतित थे, लेकिन उन्हें इस प्रस्ताव के संभावित परिणाम ज्यादा गंभीर लगे।
विशेषज्ञ उर्स बिएरी के अनुसार लोगों को डर था कि इस प्रस्ताव के कारण स्विट्जरलैंड और यूरोपीय संघ के बीच संबंध कमजोर हो सकते हैं। साथ ही श्रम बाजार पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
स्वास्थ्य सेवाएं, होटल उद्योग, तकनीक, फार्मास्युटिकल और वित्तीय क्षेत्र पहले से ही विदेशी कर्मचारियों पर काफी हद तक निर्भर हैं। ऐसे में आव्रजन पर सख्त रोक लगाने से कर्मचारियों की कमी पैदा हो सकती थी।
क्या यह “स्विस ब्रेक्जिट” बन सकता था?
कई विश्लेषकों ने इस प्रस्ताव को “स्विस ब्रेक्जिट” तक कहा। इसकी वजह यह थी कि यदि जनसंख्या सीमा लागू होती तो स्विट्जरलैंड को यूरोपीय संघ के साथ लोगों के स्वतंत्र आवागमन वाले समझौते को समाप्त करना पड़ सकता था। यूरोपीय संघ स्विट्जरलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। देश के आधे से अधिक उत्पाद यूरोपीय बाजारों में निर्यात किए जाते हैं। ऐसे में किसी भी तरह का तनाव अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता था।
स्विस व्यापारिक संगठनों और उद्योग जगत ने भी इसी कारण इस प्रस्ताव का विरोध किया था।
अगर प्रस्ताव पास हो जाता तो क्या बदलता?
यदि जनमत संग्रह में प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती तो सरकार को कई सख्त कदम उठाने पड़ते। जनसंख्या 95 लाख के करीब पहुंचने पर नए निवास परमिट सीमित किए जा सकते थे। शरणार्थियों की संख्या पर नियंत्रण लगाया जा सकता था। पारिवारिक पुनर्मिलन के नियम सख्त हो सकते थे। इसके अलावा यूरोपीय संघ के साथ स्वतंत्र आवागमन समझौता भी खतरे में पड़ सकता था।
यानी इसका असर सिर्फ आव्रजन तक सीमित नहीं रहता बल्कि रोजगार, व्यापार और विदेश नीति तक पहुंच सकता था।
शहरों और गांवों में क्यों दिखा अलग रुख?
वोटिंग के नतीजों में शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला। बर्न जैसे बड़े शहरों में लगभग 84 प्रतिशत मतदाताओं ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। जिन क्षेत्रों में विदेशी कामगारों की संख्या अधिक है, वहां भी इस प्रस्ताव को ज्यादा समर्थन नहीं मिला।
वहीं कुछ ग्रामीण इलाकों में प्रस्ताव को अपेक्षाकृत बेहतर समर्थन मिला, जहां लोगों को जनसंख्या वृद्धि का असर सीधे महसूस हो रहा है।
स्विट्जरलैंड की अर्थव्यवस्था को विदेशी कामगारों से कितना फायदा?
आंकड़े बताते हैं कि 2002 के बाद आबादी में 23 प्रतिशत वृद्धि हुई, लेकिन इसी अवधि में देश का आर्थिक उत्पादन भी करीब 24 प्रतिशत बढ़ा।
स्वास्थ्य सेवाओं, बुजुर्गों की देखभाल, पर्यटन और तकनीकी क्षेत्र में बड़ी संख्या में विदेशी कर्मचारी काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप की तरह स्विट्जरलैंड भी वृद्ध होती आबादी की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में युवा कामगारों की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से कई मतदाताओं ने माना कि केवल आव्रजन को समस्या मानना वास्तविक समाधान नहीं है।
स्विट्जरलैंड की लोकतांत्रिक व्यवस्था में रेफरेंडम क्यों अहम है?
स्विट्जरलैंड दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां नागरिकों को सीधे नीति निर्धारण में भाग लेने का अवसर मिलता है। यदि किसी मुद्दे पर पर्याप्त हस्ताक्षर जुटा लिए जाएं तो राष्ट्रीय स्तर पर जनमत संग्रह कराया जा सकता है। आमतौर पर साल में चार बार ऐसे मतदान होते हैं। इसी व्यवस्था के तहत यह प्रस्ताव भी जनता के सामने लाया गया था।
Switzerland Rejects Population Cap Proposal: इस फैसले का क्या मतलब है?
यह नतीजा दिखाता है कि स्विस नागरिक आव्रजन और जनसंख्या वृद्धि पर चर्चा तो चाहते हैं, लेकिन कठोर प्रतिबंधों के पक्ष में नहीं हैं। मतदाताओं ने आर्थिक जरूरतों, यूरोपीय संघ के साथ संबंधों और श्रम बाजार की वास्तविकताओं को प्राथमिकता दी है।
हालांकि बढ़ते किराए, आवास की कमी, भीड़भाड़ और सार्वजनिक सेवाओं पर दबाव जैसे मुद्दे अभी भी मौजूद हैं। इसलिए यह कहना गलत होगा कि बहस खत्म हो गई है। आने वाले वर्षों में यह मुद्दा स्विस राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रह सकता है।
FAQs
What was the population cap proposal in Switzerland?
यह प्रस्ताव स्विट्जरलैंड की आबादी को वर्ष 2050 तक 1 करोड़ के भीतर सीमित रखने के लिए लाया गया था।
Why did Swiss citizens reject the proposal?
मतदाताओं को आशंका थी कि इससे अर्थव्यवस्था, श्रम बाजार और यूरोपीय संघ के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
How would the population cap have affected immigration?
प्रस्ताव लागू होने पर निवास परमिट, शरणार्थी प्रवेश और पारिवारिक पुनर्मिलन के नियम सख्त हो सकते थे।
What were the arguments for and against the proposal?
समर्थकों का कहना था कि इससे संसाधनों पर दबाव कम होगा, जबकि विरोधियों का मानना था कि इससे आर्थिक विकास और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं।
What happens after the referendum result?
Switzerland Rejects Population Cap Proposal के बाद मौजूदा आव्रजन नीति जारी रहेगी, लेकिन बढ़ती आबादी और आवास जैसी चुनौतियों पर बहस जारी रहने की संभावना है।

