RSS Registration: आखिर RSS ने 100 साल में रजिस्ट्रेशन क्यों नहीं कराया? मोहन भागवत के बयान के बाद फिर छिड़ी बहस

 

RSS Registration को लेकर एक बार फिर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खरगे की ओर से संघ के रजिस्ट्रेशन और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हिंदू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है। उनके इस बयान के बाद यह सवाल फिर चर्चा में है कि आखिर RSS Registration क्यों नहीं कराया गया, क्या भारतीय कानून इसकी अनिवार्यता तय करता है और इस पूरे विवाद की कानूनी व ऐतिहासिक पृष्ठभूमि क्या है? आइए विस्तार से समझते हैं।

 

RSS Registration विवाद क्या है?

कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को खुला पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, फंडिंग, आय-व्यय और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि यदि अन्य संस्थाओं को पंजीकरण कराना पड़ता है तो इतने बड़े संगठन को भी जवाबदेह होना चाहिए।

इसके जवाब में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ अपने कामकाज को छिपाकर नहीं करता और उसकी गतिविधियां पूरी तरह सार्वजनिक हैं। उन्होंने कहा कि केवल सरकार से आर्थिक सहायता लेने वाले संगठनों के लिए रजिस्ट्रेशन आवश्यक होता है और RSS ऐसी कोई सरकारी सहायता नहीं लेता।

 

RSS Registration कानून के अनुसार जरूरी है या नहीं?

भारत में ऐसा कोई सामान्य कानून नहीं है जो हर सामाजिक, धार्मिक या स्वैच्छिक संगठन के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य बनाता हो। कोई संस्था यदि कानूनी पहचान, संपत्ति, सरकारी अनुदान या विशेष अधिकार चाहती है तो वह सोसायटी, ट्रस्ट, कंपनी या अन्य कानूनी ढांचे के तहत पंजीकरण करा सकती है। इसलिए केवल अपंजीकृत होना किसी संगठन को स्वतः अवैध नहीं बनाता।

यही कानूनी आधार RSS भी वर्षों से रखता आया है।

 

RSS रजिस्टर्ड क्यों नहीं है? इतिहास क्या कहता है

Rashtriya Swayamsevak Sangh की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी।

संघ की स्थापना एक पारंपरिक संस्था की तरह नहीं बल्कि समाज आधारित स्वयंसेवी आंदोलन के रूप में हुई थी। इसकी कार्यप्रणाली व्यक्तिगत संपर्क, शाखाओं और स्वयंसेवकों की भागीदारी पर आधारित रही।

इसी कारण:

  • कोई औपचारिक सदस्यता कार्ड नहीं होता।
  • स्वयंसेवक शाखा में भाग लेकर जुड़ते हैं।
  • संगठन पारंपरिक सदस्यता मॉडल पर आधारित नहीं है।
  • स्थानीय स्तर पर कई गतिविधियां स्वतंत्र रूप से संचालित होती हैं।

RSS का तर्क है कि उसकी मूल संरचना के लिए अलग से RSS Registration आवश्यक नहीं है।

 

RSS Registration Law: किन कानूनों के तहत संगठन रजिस्टर्ड होते हैं?

भारत में किसी संस्था का पंजीकरण कई अलग-अलग कानूनों के तहत कराया जा सकता है जैसे,

  • Societies Registration Act
  • Indian Trusts Act
  • Companies Act
  • Trade Unions Act

लेकिन इन कानूनों के तहत पंजीकरण तभी आवश्यक होता है जब संगठन उस विशेष कानूनी ढांचे के लाभ लेना चाहता हो, जैसे—

  • संपत्ति का स्वामित्व
  • सरकारी अनुदान
  • कानूनी अनुबंध
  • बैंकिंग एवं वित्तीय सुविधाएं

यही कारण है कि हर सामाजिक या धार्मिक संगठन के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं माना जाता।

Rss regestration

क्या RSS का कोई संविधान है?

RSS का लिखित RSS Constitution 1950 के दशक में तैयार किया गया था और सरकार को उपलब्ध कराया गया था।

यह संविधान संगठन की कार्यप्रणाली, पदाधिकारियों और संगठनात्मक व्यवस्था को परिभाषित करता है। हालांकि संविधान होने का अर्थ यह नहीं कि किसी संस्था का अलग से सोसायटी या ट्रस्ट के रूप में पंजीकरण अनिवार्य हो जाए।

 

टैक्स और अदालतों में RSS की कानूनी स्थिति

1970 के दशक में आयकर से जुड़े मामलों में RSS की कानूनी स्थिति पर सवाल उठे थे।

बाद में टैक्स अपीलीय प्राधिकरणों और न्यायालयों ने ‘गुरु दक्षिणा‘ से जुड़े मामलों में RSS को Association of Persons (AOP) के रूप में स्वीकार किया और संबंधित मामलों में राहत दी।

इसलिए विवाद यह नहीं है कि RSS गैरकानूनी है, बल्कि यह है कि इतने बड़े प्रभाव वाले संगठन को औपचारिक पंजीकरण के दायरे में होना चाहिए या नहीं।

 

क्या RSS के सहयोगी संगठन रजिस्टर्ड हैं?

RSS का कहना है कि उसके अधिकांश सहयोगी संगठन अलग-अलग कानूनी संस्थाओं के रूप में पंजीकृत हैं।

इनमें कई संस्थाएं ट्रस्ट, सोसायटी या अन्य कानूनी ढांचे के तहत संचालित होती हैं। उनका ऑडिट होता है, आयकर नियम लागू होते हैं और वे अपनी कानूनी जिम्मेदारियां निभाती हैं।

यही मॉडल RSS वर्षों से अपनाता आया है।

 

मोहन भागवत ने क्या कहा?

  • संघ अपने कार्यों को सार्वजनिक रूप से करता है।
  • संगठन के पास छिपाने जैसा कुछ नहीं है।
  • कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाएं बिना औपचारिक रजिस्ट्रेशन के भी कार्य करती हैं।
  • हिंदू धर्म भी रजिस्टर्ड नहीं है कहकर उन्होंने यह तर्क दिया कि हर सामाजिक या वैचारिक संगठन के लिए पंजीकरण जरूरी नहीं होता।

 

विवाद आखिर किस बात पर है?

इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग पक्ष सामने आते हैं।

एक पक्ष का कहना है कि इतने बड़े संगठन को वित्तीय और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए पंजीकरण कराना चाहिए।

दूसरा पक्ष का तर्क है कि भारतीय कानून ऐसा कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं करता और RSS अपनी गतिविधियों के लिए अलग कानूनी संरचना अपनाने को बाध्य नहीं है।

यानी यह विवाद कानूनी से ज्यादा राजनीतिक और संस्थागत जवाबदेही की बहस बन चुका है।

 

निष्कर्ष

RSS Registration को लेकर छिड़ी बहस केवल एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठाती है कि भारत में स्वैच्छिक, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के लिए कानूनी ढांचा कितना स्पष्ट है। मौजूदा कानून के अनुसार केवल अपंजीकृत होना किसी संस्था को अवैध नहीं बनाता, लेकिन पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है। आने वाले समय में यह मुद्दा सार्वजनिक विमर्श और राजनीति दोनों में महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

 

FAQs

Q1. RSS रजिस्टर्ड क्यों नहीं है?

RSS का कहना है कि भारतीय कानून हर सामाजिक संगठन के लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं बनाता और उसकी कार्यप्रणाली पारंपरिक संस्था से अलग है।

 

Q2. क्या RSS को रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता है?

मौजूदा भारतीय कानून के तहत सभी सामाजिक या वैचारिक संगठनों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं है। यह संगठन की कानूनी संरचना और गतिविधियों पर निर्भर करता है।

 

Q3. RSS किस कानून के तहत काम करता है?

RSS किसी एक विशेष पंजीकरण कानून के तहत संचालित नहीं है। हालांकि उसके सहयोगी संगठन अलग-अलग कानूनी ढांचों के तहत पंजीकृत हैं।

 

Q4. RSS की स्थापना कब हुई?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितंबर 1925 (विजयादशमी) को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी।

 

Q5. RSS का संविधान कब बना?

RSS का लिखित संविधान 1950 के दशक में तैयार किया गया था और सरकार को उपलब्ध कराया गया था।