FCRA Rules for NGOs: अब विदेशी फंड लेना हुआ और मुश्किल? सरकार के नए नियमों से क्या बदल जाएगा

 

अगर कोई NGO विदेश से फंड लेता है, तो उसके लिए FCRA Rules for NGOs पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो गए हैं। केंद्र सरकार ने Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) Rules, 2011 में संशोधन करते हुए कई नए नियम लागू किए हैं। अब NGOs को पहले से तय उद्देश्यों में से अपना काम चुनना होगा, यह बताना होगा कि वे किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में काम करेंगे और विदेशी फंड का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

 

सरकार ने FCRA नियमों में क्या बदलाव किए हैं?

गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार अब किसी भी NGO को FCRA के तहत पंजीकरण या नवीनीकरण के लिए आवेदन करते समय अपने कार्य का स्पष्ट उद्देश्य बताना होगा। यह उद्देश्य सरकार द्वारा तय सूची में से ही चुना जा सकेगा।इसके साथ ही संस्था को यह भी बताना होगा कि वह किन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में अपनी गतिविधियां चलाएगी। यही जानकारी उसके FCRA प्रमाणपत्र में भी दर्ज होगी।

FCRA Rules for NGOs

FCRA Rules for NGOs के तहत अब क्या-क्या बताना होगा?

नए नियमों के तहत NGOs को आवेदन करते समय कई अतिरिक्त जानकारियां देनी होंगी।

  • संस्था का स्पष्ट उद्देश्य
  • कार्य करने वाले राज्य या केंद्र शासित प्रदेश
  • सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी
  • यदि फंड Donor Advised Fund या किसी मध्यस्थ के जरिए आया है तो असली दाता (Ultimate Donor) का विवरण
  • वार्षिक गतिविधि रिपोर्ट के साथ वित्तीय विवरण
  • यह जानकारी कि संस्था या उसके प्रमुख पदाधिकारियों ने कोई पुस्तक या लेख प्रकाशित किया है या नहीं

सरकार का मानना है कि इससे NGO FCRA Compliance और मजबूत होगी।

 

विदेशी नागरिकों को लेकर भी बदले नियम

संशोधित नियमों के अनुसार यदि किसी NGO के प्रमुख पदाधिकारियों (Key Functionaries) में भारतीय मूल के अलावा कोई विदेशी नागरिक शामिल है, तो ऐसे मामलों में FCRA पंजीकरण या पूर्व अनुमति सामान्य तौर पर नहीं दी जाएगी। हालांकि केंद्र सरकार विशेष आदेश जारी कर ऐसे मामलों में अनुमति दे सकती है। साथ ही Key Functionary की परिभाषा भी बढ़ा दी गई है। अब इसमें कंपनी के निदेशक, ट्रस्टी, पार्टनर, HUF के कर्ता और संस्था के प्रबंधन पर नियंत्रण रखने वाले अन्य लोग भी शामिल होंगे।

 

अब लाइसेंस बचाने के लिए खर्च भी करना होगा

सरकार ने निष्क्रिय NGOs पर भी सख्ती की है। अब किसी NGO को अपना FCRA पंजीकरण नवीनीकृत कराने या रद्द होने से बचाने के लिए पिछले दो वित्तीय वर्षों में कम से कम 10 लाख रुपये की विदेशी राशि अपने घोषित उद्देश्यों पर खर्च करनी होगी। इसके अलावा यदि किसी NGO को किसी विशेष उद्देश्य के लिए विदेशी फंड किस्तों में मिलता है, तो अगली किस्त तभी जारी होगी जब पहली किस्त का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग हो चुका होगा। इसके बाद सरकार फील्ड जांच भी कर सकती है।

 

धार्मिक गतिविधियों पर क्या कहा गया है?

नए नियम धार्मिक गतिविधियों की अनुमति देते हैं, जिनमें धार्मिक स्थलों का निर्माण, मरम्मत, धार्मिक शिक्षा और भक्ति संगीत जैसी गतिविधियां शामिल हैं। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि धार्मिक शिक्षा, आदिवासी और पारंपरिक आस्था का संरक्षण तथा अन्य धार्मिक गतिविधियां Proselytisation (धर्म परिवर्तन के प्रचार) के बिना ही की जानी चाहिए।

FCRA Rules for NGOs

पुराने NGOs के लिए भी नया नियम

जो संस्थाएं 2026 से पहले FCRA के तहत पंजीकृत हैं, उन्हें भी एक वर्ष के भीतर सरकार को यह बताना होगा कि वे किन उद्देश्यों और किन राज्यों में अपना पंजीकरण जारी रखना चाहती हैं।यदि कोई संस्था आवेदन में अतिरिक्त उद्देश्य या नया राज्य जोड़ना चाहती है, तो प्रत्येक अतिरिक्त प्रविष्टि पर 300 रुपये का शुल्क देना होगा।

 

इन बदलावों का NGOs पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि नए FCRA Amendment के बाद विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही बढ़ेगी। सरकार को यह स्पष्ट जानकारी मिलेगी कि पैसा कहां से आया, किस उद्देश्य से आया और उसका उपयोग कैसे किया गया। दूसरी ओर NGOs को अब दस्तावेजी प्रक्रिया, रिपोर्टिंग और अनुपालन (Compliance) पर पहले से ज्यादा ध्यान देना होगा। छोटी संस्थाओं के लिए प्रशासनिक काम बढ़ सकता है, जबकि पारदर्शी संस्थाओं के लिए नियमों का पालन करना आसान रहेगा।

 

निष्कर्ष

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए FCRA Rules for NGOs का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और निगरानी योग्य बनाना है। अब NGOs को अपने उद्देश्य, कार्यक्षेत्र, सोशल मीडिया, विदेशी दाताओं और खर्च की विस्तृत जानकारी देनी होगी। आने वाले समय में इन नियमों का पालन करना सभी विदेशी फंड प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए अनिवार्य होगा।

 

FAQs

Q1. FCRA क्या है?

FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act एक कानून है जो भारत में विदेशी फंड प्राप्त करने और उसके उपयोग को नियंत्रित करता है।

 

Q2. सरकार ने FCRA नियमों में क्या बदलाव किए हैं?

अब NGOs को अपना उद्देश्य, कार्यक्षेत्र, सोशल मीडिया विवरण, वास्तविक विदेशी दाता और खर्च की विस्तृत जानकारी देनी होगी।

 

Q3. NGOs को अब कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी?

उद्देश्य, राज्य, सोशल मीडिया अकाउंट, Ultimate Donor, वार्षिक गतिविधि रिपोर्ट और वित्तीय विवरण सहित कई नई जानकारियां देना अनिवार्य होगा।

 

Q4. FCRA नियमों का NGOs पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन दस्तावेजी प्रक्रिया और अनुपालन की जिम्मेदारी भी बढ़ जाएगी।

 

Q5. Foreign Contribution Regulation Act का उद्देश्य क्या है?

इसका उद्देश्य विदेशी धन के उपयोग को नियंत्रित करना, राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना और विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।