भारत में Medical Device सेक्टर को तेज़ी से बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने Medical Devices Rules, 2017 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य Medical Device Manufacturing के लिए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को तेज़, पारदर्शी और आसान बनाना है। अगर ये प्रस्ताव लागू होता है, तो मेडिकल डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को पहले की तुलना में कम समय में लाइसेंस मिल सकेगा। इससे India Medical Devices सेक्टर में निवेश बढ़ने, घरेलू उत्पादन को गति मिलने और मरीजों तक बेहतर गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरण जल्दी पहुंचने की उम्मीद है।
क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?
केंद्र सरकार ने Medical Device Rules में संशोधन का मसौदा जारी किया है। प्रस्ताव के अनुसार मेडिकल डिवाइस निर्माण के लिए लाइसेंस जारी करने की समय-सीमा कम की जाएगी। साथ ही आवेदन की जांच, ऑडिट, अनुपालन सत्यापन और अंतिम लाइसेंस जारी करने के हर चरण के लिए तय समय निर्धारित किया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज़ होगी।
Medical Device लाइसेंसिंग में क्या बदलने वाला है?
फिलहाल भारत में मेडिकल डिवाइस को जोखिम के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा गया है–
- Class A
- Class B
- Class C
- Class D (सबसे अधिक जोखिम वाली)
सरकार ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए लाइसेंस मिलने का समय कम करने का प्रस्ताव रखा है।
- Class B Medical Devices
इनमें ब्लड प्रेशर मॉनिटर, हाइपोडर्मिक नीडल और पल्स ऑक्सीमीटर जैसे उपकरण शामिल हैं।
वर्तमान समय: 140 दिन
प्रस्तावित समय: 115 दिन
यानी लगभग 25 दिन की बचत।
- Class C और Class D Medical Devices
इन श्रेणियों में कार्डियक स्टेंट, हिप और नी इम्प्लांट तथा अन्य जीवनरक्षक मेडिकल उपकरण आते हैं।
वर्तमान समय: 105 दिन
प्रस्तावित समय: 90 दिन
इससे हाई-रिस्क मेडिकल डिवाइस का उत्पादन और बाज़ार तक पहुंच पहले से तेज़ हो सकती है।

Medical Device Manufacturing को कैसे मिलेगा फायदा?
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से Healthcare Manufacturing और Medical Technology सेक्टर को कई बड़े लाभ मिलेंगे। मुख्य फायदे:
- लाइसेंस प्रक्रिया तेज़ होगी।
- उद्योग को अनावश्यक देरी से राहत मिलेगी।
- निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
- घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
- मरीजों को गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरण जल्दी उपलब्ध होंगे।
- Ease of Doing Business में सुधार होगा।
- Make in India अभियान को मजबूती मिलेगी।
भारत का Medical Device Industry वर्तमान में लगभग 13 अरब डॉलर का है और आने वाले वर्षों में इसके और तेज़ी से बढ़ने की संभावना है।
CDSCO की भूमिका क्यों होगी अहम?
CDSCO (Central Drugs Standard Control Organisation) इस पूरी लाइसेंसिंग प्रक्रिया की प्रमुख नियामक संस्था है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत:
- आवेदन की प्रारंभिक जांच
- नोटिफाइड बॉडी द्वारा ऑडिट
- अनुपालन सत्यापन
- अंतिम लाइसेंस जारी करने
हर चरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाएगी। इससे कंपनियों को पहले से पता रहेगा कि उनका आवेदन किस चरण में है और कितने समय में निर्णय आएगा।
आगे क्या होगा?
स्वास्थ्य मंत्रालय ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन सार्वजनिक कर दिया है। सभी हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। यदि संशोधन लागू होते हैं, तो यह India Healthcare Policy और Medical Device Policy के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जाएगा।
निष्कर्ष:
प्रस्तावित बदलाव Medical Device सेक्टर के लिए एक अहम सुधार साबित हो सकते हैं। यदि लाइसेंसिंग प्रक्रिया वास्तव में तेज़ और पारदर्शी बनती है, तो Medical Device Manufacturing को नई गति मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और भारत वैश्विक Healthcare Industry में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकेगा। साथ ही मरीजों तक सुरक्षित और गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरण पहले से अधिक तेज़ी से पहुंच पाएंगे।
FAQs:
सरकार ने मेडिकल डिवाइस निर्माण लाइसेंस जारी करने की समय-सीमा कम करने और पूरी प्रक्रिया के हर चरण के लिए निश्चित समय तय करने का प्रस्ताव रखा है।
इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना, आयात पर निर्भरता कम करना और मरीजों तक गुणवत्तापूर्ण मेडिकल उपकरण जल्दी पहुंचाना है।
लाइसेंस जल्दी मिलेगा, नियामकीय देरी कम होगी, कारोबार करना आसान होगा और उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
CDSCO आवेदन की जांच, नियामकीय मंजूरी और मेडिकल डिवाइस निर्माण लाइसेंस जारी करने वाली प्रमुख संस्था है।
यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल डिवाइस सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरण बाज़ार में पहले से अधिक तेजी से उपलब्ध हो सकते हैं।

